झारखंड JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा घोटाले में मिथिलेश सिंह जांच एजेंसियों के निशाने पर है। आरोप है कि अभ्यर्थियों से चयन के बदले 12-20 लाख रुपये वसूले गए और कथित तौर पर 300 करोड़ से अधिक की संपत्ति बनाई गई।
Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच में मिथिलेश सिंह का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा में चयन कराने के बदले कई अभ्यर्थियों से 12 लाख से 20 लाख रुपये तक लेने का आरोप है। सीआईडी उसकी वित्तीय और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर रही है, जबकि वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा घोटाले में मिथिलेश सिंह की भूमिका जांच के घेरे में
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच के दौरान मिथिलेश सिंह का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अभ्यर्थियों से चयन के नाम पर 12 लाख से 20 लाख रुपये तक वसूली का आरोप है। सीआईडी उसके वित्तीय और डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है। बताया गया है कि वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में कई शहरों में टीमें भेजी गई हैं।
अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का आरोप
जांच में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान अभ्यर्थियों से रकम वसूले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि JSSC CGL समेत प्रमुख परीक्षाओं में चयन कराने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 12 लाख से 20 लाख रुपये तक लिए गए।
मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी से पूछताछ में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अभय ने खुद, अपने भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन सुनिश्चित कराने के लिए मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये दिए थे। इस तरह कुल 36 लाख रुपये देने की बात जांच में सामने आई है।
OMR और प्रश्न-पत्र से जुड़ी प्रक्रिया में भूमिका
जांच के मुताबिक, वेबेल और आईसीएन जैसी एजेंसियों को परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां दी गई थीं। इनमें OMR शीट की प्रोसेसिंग और प्रश्न-पत्र की प्रिंटिंग शामिल थी।
दिल्ली से गिरफ्तार आईसीएन के कर्मचारियों सुमांश प्रकाश और राहुल कुमार से पूछताछ में भी मिथिलेश सिंह की भूमिका को लेकर जानकारी मिलने की बात कही गई है। आरोप है कि आयोग और संबंधित अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण डीलिंग वही संभालता था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि परीक्षा पोर्टल के बैकएंड सॉफ्टवेयर में अनधिकृत बदलाव कर अभ्यर्थियों के अंकों में हेरफेर किया गया। इस डिजिटल नेटवर्क और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
300 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की जांच
जांच एजेंसियों को कथित तौर पर मिथिलेश सिंह से जुड़ी 300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति की जानकारी मिली है। जांच में दिल्ली, पटना, रांची, मुंबई, पुणे, राजस्थान और हरियाणा में जमीन, मकान, फ्लैट, होटल और कमर्शियल प्रॉपर्टी की जानकारी जुटाने का दावा किया गया है।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और क्या इनका संबंध कथित परीक्षा घोटाले से अर्जित रकम से है। वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
कई राज्यों में परीक्षा घोटालों से जुड़ने का दावा
मिथिलेश सिंह को मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का निवासी बताया गया है। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उसका नाम बिहार के अलावा पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना में परीक्षा गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों में भी सामने आया है।
उसके करीब चार बार जेल जाने का भी दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने झारखंड में भी दूसरे राज्यों में इस्तेमाल किए गए संगठित परीक्षा सिंडिकेट के मॉडल को लागू किया। फिलहाल सीआईडी कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, वित्तीय लेनदेन और परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।








