मणिपुर में JFD के 24 घंटे के बंद से जनजीवन प्रभावित, घाटी के 5 जिलों में बाजार-स्कूल बंद

मणिपुर में NRC अपडेट करने की मांग को लेकर JFD के 24 घंटे के बंद से मंगलवार को इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग में जनजीवन प्रभावित रहा।

मणिपुर में NRC अपडेट करने की मांग को लेकर JFD के 24 घंटे के बंद से मंगलवार को इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग में जनजीवन प्रभावित रहा। बाजार, स्कूल और सार्वजनिक परिवहन बंद रहे, जबकि कुछ निजी वाहन चलते रहे।

इम्फाल: मणिपुर में मंगलवार को 24 घंटे के राज्यव्यापी बंद के कारण घाटी के पांच जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। Campaign for Just and Fair Delimitation (JFD) ने जनगणना से पहले National Register of Citizens (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर इस बंद का आह्वान किया था। बंद के दौरान बाजार, दुकानें, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित रहीं।

इम्फाल समेत पांच जिलों में बंद का असर

बंद का सबसे ज्यादा असर मणिपुर घाटी के इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों में देखने को मिला। इन क्षेत्रों में अधिकांश बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। आम दिनों की तुलना में सड़कों पर भी काफी कम आवाजाही दिखाई दी।

स्थानीय स्तर पर बंद समर्थकों की सक्रियता के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। सार्वजनिक परिवहन के वाहन सड़कों से दूर रहे, जिससे रोजाना कामकाज और आवागमन पर निर्भर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, कुछ निजी वाहन सड़कों पर चलते दिखाई दिए।

स्कूल और शिक्षण संस्थान भी रहे बंद

बंद का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा। घाटी के प्रभावित जिलों में कई शिक्षण संस्थान बंद रहे। विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही नहीं होने के कारण सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हुईं। बंद के आयोजकों की ओर से यह कार्रवाई NRC को लेकर उनकी मांग को प्रमुखता से सामने लाने के उद्देश्य से की गई। JFD की मांग है कि जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले NRC को अपडेट किया जाए।

यायरिपोक में सड़क पर लगाए गए बांस

थौबल जिले के यायरिपोक इलाके में बंद समर्थकों द्वारा कथित तौर पर सड़कों पर बांस के खंभे लगाए जाने की सूचना मिली। इसका उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को रोकना बताया गया। इस तरह के अवरोधों के कारण स्थानीय यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन के लिए बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण चुनौती रहा। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी सीमित रही और कई स्थानों पर सड़कों का सामान्य व्यस्त माहौल नजर नहीं आया।

NRC अपडेट करने की मांग क्या है?

National Register of Citizens यानी NRC भारतीय नागरिकों से संबंधित एक रजिस्टर है। मणिपुर में NRC को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। इसके समर्थक इसे नागरिकता और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। JFD ने इसी मुद्दे को जनगणना की प्रक्रिया से जोड़ा है। संगठन का कहना है कि जनगणना से पहले NRC को अपडेट किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उसने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया।

जनगणना से पहले मांग तेज

मणिपुर में NRC और जनगणना को लेकर राजनीतिक चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब राज्य में जनगणना प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्षों की चिंताएं सामने आती रही हैं। JFD का ताजा बंद इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। संगठन के अनुसार, जनगणना से पहले नागरिकों से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित और अपडेट करना आवश्यक है। इसी वजह से उसने सरकार पर अपनी मांग पर कार्रवाई करने का दबाव बनाने के लिए बंद का सहारा लिया।

घाटी के जिलों में कारोबार प्रभावित

इम्फाल ईस्ट और इम्फाल वेस्ट सहित घाटी के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में दुकानें बंद रहने से कारोबार पर सीधा असर पड़ा। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए निकलने वाले लोगों को भी कई जगह परेशानी हुई। थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग में भी व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रहीं। सार्वजनिक परिवहन के बंद रहने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ा।

सामान्य स्थिति पर पड़ा व्यापक असर

24 घंटे के बंद ने केवल बाजार और परिवहन को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि शिक्षा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाला। कई इलाकों में सड़कों के खाली रहने से बंद की व्यापकता साफ नजर आई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ निजी वाहन चलते रहे। इसका मतलब यह है कि पूरी तरह से आवाजाही बंद नहीं हुई थी, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के ठप रहने से सामान्य यातायात व्यवस्था बाधित रही।

मणिपुर में संवेदनशील मुद्दा है नागरिकता और जनसांख्यिकी

मणिपुर में नागरिकता, जनसांख्यिकीय बदलाव और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। राज्य में अलग-अलग समुदायों और संगठनों की अपनी-अपनी मांगें हैं। NRC को अपडेट करने की मांग भी इसी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में देखी जा रही है।

JFD का बंद यह संकेत देता है कि संगठन इस मुद्दे को जनगणना से पहले सरकार के सामने मजबूती से उठाना चाहता है। बंद के जरिए बाजार और सार्वजनिक गतिविधियों को रोककर संगठन ने अपनी मांग पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।

सरकार के सामने चुनौती

बंद के बाद सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे सामान्य जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर NRC और जनगणना से जुड़ी मांगों पर विभिन्न संगठनों के साथ संवाद करना भी जरूरी होगा। मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में ऐसे मुद्दों पर प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था के साथ-साथ संवाद और भरोसा कायम रखना भी अहम माना जाता है।

आगे क्या?

JFD की ओर से बुलाया गया 24 घंटे का बंद मंगलवार को घाटी के पांच जिलों में सामान्य गतिविधियों पर असर डालता रहा। बाजारों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक परिवहन के बंद रहने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। अब इस आंदोलन की अगली रणनीति और सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

NRC को जनगणना से पहले अपडेट करने की मांग पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मंगलवार का बंद मणिपुर में इस मुद्दे को लेकर बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को सामने लाता है।

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