कानपुर दवा कारोबारी मर्डर केस पुलिस के 6 सवालों में फंसा सुब्रत; पत्नी और सुपारी किलर से कराया जाएगा सामना

कानपुर दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बेटे सुब्रत से पुलिस ने छह अहम सवाल किए। नए सिम से छह कॉल के बाद पत्नी शालू और विशाल से आमना-सामना होगा।
कानपुर दवा कारोबारी मर्डर केस पुलिस के 6 सवालों में फंसा सुब्रत; पत्नी और सुपारी किलर से कराया जाएगा सामना
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कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पहले इस मामले में कारोबारी की बहू शालू और हत्या में शामिल बताए जा रहे आरोपितों तक पुलिस की जांच सीमित थी, लेकिन अब कारोबारी के बेटे सुब्रत की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस को हत्या की रात सुब्रत और कथित शूटर विशाल के बीच हुई फोन बातचीत ने कई सवालों के सामने खड़ा किया है। इसी वजह से पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विशाल ने हत्या के लिए नया सिम लेने के बाद सुब्रत से संपर्क क्यों किया और दोनों के बीच हुई बातचीत का हत्या की साजिश से कोई संबंध था या नहीं।

पुलिस की पूछताछ में सुब्रत से करीब 15 से 20 सवाल किए जाने की बात सामने आई है। इनमें कुछ सवाल सीधे तौर पर उसकी पत्नी शालू, कथित शूटर विशाल और हत्या की रात हुई गतिविधियों से जुड़े थे। पुलिस ने उससे यह जानने की कोशिश की कि पार्टी के दौरान वह और शालू फोन पर किससे बातचीत कर रहे थे, नए सिम से विशाल ने उसे फोन क्यों किया, विशाल को वह पहले से जानता था तो शुरुआती पूछताछ में उसकी पहचान से इनकार क्यों किया और अगर शालू ने हत्या की साजिश रची थी तो उसकी वजह क्या हो सकती है। पुलिस ने यह सवाल भी किया कि अगर शालू जेल से बाहर आती है तो क्या वह उसके साथ अपना रिश्ता जारी रखेगा और क्या वह उसे बचाने की कोशिश करेगा या उसके खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेगा।

पूछताछ के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर सुब्रत को यह भी बताया कि शालू जेल में यह कह रही है कि हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका थी। इस सवाल पर सुब्रत ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि शालू झूठ बोल रही है। यानी इस समय मामले में पुलिस के सामने दो अलग-अलग दावे हैं और जांच एजेंसियां इन बयानों को दूसरे साक्ष्यों से मिलाकर देख रही हैं। सुब्रत पर किसी अपराध में भूमिका साबित होना अभी जांच का विषय है और केवल पूछताछ या शक के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता।

इस मामले में सबसे अहम कड़ी नया सिम और उससे हुई फोन कॉल बनी हुई है। पुलिस की जांच के अनुसार, कथित शूटर विशाल ने 3 सितंबर को नया सिम खरीदा था और 5 सितंबर की रात विनीत मिनोचा की हत्या हुई। जांच में सामने आया कि इस नए नंबर से विशाल ने शालू को सात बार और सुब्रत को छह बार कॉल किया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन छह कॉल के दौरान दोनों के बीच क्या बातचीत हुई और क्या यह बातचीत हत्या की तैयारी, घटनाक्रम या हत्या के बाद की गतिविधियों से संबंधित थी।

पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े कई मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 1 मई से 6 सितंबर तक के करीब एक हजार पन्नों के कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई। इनमें सुब्रत और विशाल के बीच 1 मई से 5 सितंबर के बीच करीब 309 बार बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इतनी बार बातचीत होना अपने आप में हत्या में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों की पुरानी जान-पहचान किस प्रकार की थी, बातचीत किन परिस्थितियों में होती थी और हत्या से पहले के दिनों में संपर्क का स्वरूप बदला था या नहीं।

विनीत मिनोचा की हत्या 5 सितंबर की रात या देर रात उनके घर में हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, 60 से अधिक उम्र के दवा कारोबारी को उनके घर में चाकू से कई वार किए गए थे। घटना के समय उनका बेटा सुब्रत और बहू शालू बाहर पार्टी में होने की बात सामने आई थी। दोनों देर रात घर लौटे, जिसके बाद कारोबारी को कमरे में घायल अवस्था में पाया गया और पुलिस को सूचना दी गई। मामले की जांच में घर के CCTV फुटेज भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सामने आए।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान विनीत मिनोचा के पूर्व कर्मचारी विशाल और उसके सहयोगी राज किशोर को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, विशाल पहले कारोबारी के यहां काम करता था, लेकिन कथित चोरी के आरोप में उसे नौकरी से हटा दिया गया था। इसके बावजूद उसकी सुब्रत से बातचीत बनी हुई थी। पूछताछ के दौरान विशाल ने कथित तौर पर शालू पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया और दावा किया कि उसे हत्या के बदले छह लाख रुपये देने तथा नौकरी दिलाने की बात कही गई थी। शालू की ओर से इन आरोपों से इनकार किए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।

अब पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि अगर हत्या की साजिश केवल शालू और विशाल के बीच थी, तो हत्या से ठीक पहले विशाल ने सुब्रत को छह बार फोन क्यों किया। पुलिस के सामने यह भी सवाल है कि विशाल के पास सुब्रत का नंबर कैसे था और दोनों के बीच पहले से किस तरह का संपर्क था। इन सवालों के जवाब कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, बातचीत से जुड़े उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य और आरोपितों के बयानों को मिलाकर तलाशे जा रहे हैं।

जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण शालू और विशाल का सुब्रत से आमना-सामना कराना हो सकता है। पुलिस ने दोनों आरोपितों की रिमांड मांगी है। अदालत से रिमांड मिलने की स्थिति में जांचकर्ता तीनों से सामने बैठाकर पूछताछ कर सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग बयानों में मौजूद विरोधाभासों को सामने लाना और यह पता लगाना होगा कि हत्या से पहले, हत्या के दौरान और हत्या के बाद किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस शालू और विशाल से अलग-अलग तरीके से सुब्रत का सामना कराने की तैयारी कर रही है।

पुलिस की पूछताछ में एक और अहम सवाल यह है कि सुब्रत ने विशाल को पहली बार पहचानने से इनकार क्यों किया। अगर दोनों के बीच पहले से बातचीत होती रही थी और कॉल रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में संपर्क सामने आया है, तो पुलिस यह जानना चाहती है कि पूछताछ के शुरुआती दौर में उसकी पहचान को लेकर अलग जवाब क्यों दिया गया। सुब्रत की ओर से इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसे भी पुलिस अपने रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देख रही है।

मामले में पुलिस कारोबारी परिवार के भीतर के संबंधों और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस कमिश्नर के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 में बनाई गई पंजीकृत वसीयत में संपत्ति का बंटवारा पत्नी पुनिता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम किया गया था। इसलिए जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि हत्या के पीछे संपत्ति या आर्थिक कारण से जुड़ा कोई पहलू था या नहीं। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल संपत्ति से जुड़े सवाल या पारिवारिक विवाद के आधार पर हत्या की साजिश का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पुलिस ने हत्या से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच शुरू कर रखी है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, CCTV फुटेज और हत्या के बाद आरोपितों की आवाजाही को आपस में मिलाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के बाद विशाल ने अपने सहयोगी राज किशोर को पांच बार फोन किया और Uber कैब से उसके ठिकाने तक पहुंचा। पुलिस कैब के रूट, ड्राइवर के बयान और डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि हत्या के बाद आरोपितों की गतिविधियों का क्रम स्पष्ट किया जा सके।

इस मामले में पुलिस पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि कुछ सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से सामने आए दावों की भी जांच की जा रही है। पुलिस कमिश्नर ने शालू द्वारा इंटरनेट पर हत्या को आत्महत्या या हार्ट अटैक जैसा दिखाने के तरीके खोजने संबंधी कुछ रिपोर्टों को अफवाह बताया था। हालांकि पुलिस ने उसके फोन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी रहने की बात कही है। इससे साफ है कि जांच केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों को भी मिलाकर पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

अब तक इस हत्याकांड में शालू, विशाल और राज किशोर की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि सुब्रत की भूमिका को लेकर जांच जारी है। पुलिस की ओर से यह संकेत दिया गया है कि अगर पूछताछ और आमना-सामना के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उसके खिलाफ भी आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सुब्रत को लेकर पुलिस की जांच को गिरफ्तारी से पहले की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उसकी गिरफ्तारी या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

कानपुर का यह हत्याकांड अब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि पुलिस एक ही घटना में अलग-अलग लोगों की भूमिकाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। एक तरफ बहू शालू और कथित सुपारी किलर विशाल के बीच कथित संपर्क की जांच हो रही है, वहीं दूसरी तरफ विशाल और सुब्रत के बीच हुई फोन बातचीत ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस के सामने अब यह स्पष्ट करना अहम है कि ये फोन कॉल सामान्य बातचीत का हिस्सा थीं या हत्या की साजिश से उनका कोई संबंध था। इसी सवाल का जवाब मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल पुलिस रिमांड, आमना-सामना, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए मामले की कड़ियां जोड़ रही है। आने वाले दिनों में शालू और विशाल से पूछताछ के बाद अगर उनके बयान सुब्रत के बयान से मेल खाते हैं या उनमें महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है, तो पुलिस के पास जांच को आगे बढ़ाने के लिए नए आधार हो सकते हैं। वहीं, सुब्रत के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने आता है या नहीं, यह पुलिस की आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगा

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