करोड़पति कारोबारी की बहू से पूछे जाएंगे 7 सवाल कानपुर कोर्ट में रिमांड पर आज सुनवाई पति सुब्रत से पुलिस आमना-सामना कराएगी

कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में शालू और विशाल की 24 घंटे की रिमांड पर आज सुनवाई है। पुलिस सुब्रत से आमना-सामना कराकर पूछताछ करेगी।
करोड़पति कारोबारी की बहू से पूछे जाएंगे 7 सवाल कानपुर कोर्ट में रिमांड पर आज सुनवाई पति सुब्रत से पुलिस आमना-सामना कराएगी
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कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच अब उन सवालों पर पहुंच गई है, जिनके जवाब से पुलिस वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। कारोबारी की बहू शालू और पुराने नौकर विशाल गौतम की पुलिस कस्टडी रिमांड पर आज यानी 19 सितंबर को कानपुर कोर्ट में सुनवाई होनी है। पुलिस ने दोनों से पूछताछ के लिए 24 घंटे की रिमांड मांगी है। इससे पहले 17 सितंबर को रिमांड पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य बहिष्कार के चलते सुनवाई टल गई थी।

पुलिस का कहना है कि रिमांड मिलने पर शालू और विशाल से अलग-अलग पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनके बयानों का मिलान दूसरे आरोपितों और कारोबारी के बेटे सुब्रत के बयानों से कराया जाएगा। पुलिस विनीत मिनोचा के फ्लैट की चाबियों, आरोपितों की आवाजाही, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़कर देख रही है। पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल रिमांड आवेदन में भी फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी समेत कई साक्ष्यों की बरामदगी और पूछताछ की जरूरत बताई गई है।

इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 5 सितंबर की रात विनीत मिनोचा के फ्लैट में आखिर क्या हुआ था। इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट में कारोबारी की चाकू से हत्या की गई थी। पुलिस ने पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान विशाल ने कथित तौर पर शालू का नाम लिया और उसके कहने पर हत्या करने की बात कही। शालू ने हालांकि हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है। इस समय दोनों के बयानों की स्वतंत्र जांच पुलिस कर रही है।

शालू से पूछताछ में पुलिस यह जानना चाहती है कि विशाल के साथ उसका संपर्क कब और किस वजह से हुआ, हत्या की कथित योजना कब बनी और कारोबारी के फ्लैट तक आरोपितों की पहुंच कैसे बनी। पुलिस की पूछताछ में डुप्लीकेट चाबी का मुद्दा भी अहम है। पुलिस के अनुसार फ्लैट की चार चाबियां थीं और उनमें से कुछ चाबियों की बरामदगी तथा डुप्लीकेट चाबी कहां और कैसे तैयार हुई, इसकी जांच की जा रही है। यही वजह है कि पुलिस रिमांड के दौरान शालू और विशाल से इस संबंध में आमने-सामने पूछताछ करना चाहती है।

शालू से पुलिस यह भी पूछ सकती है कि गार्ड मदन सिंह को विशाल के बारे में क्या जानकारी दी गई थी और वारदात से पहले उसकी गतिविधियां क्या थीं। पुलिस के सामने यह सवाल भी है कि हत्या की रात शालू और उसके पति सुब्रत कहां थे, पार्टी में कब पहुंचे और कब वहां से निकले। पुलिस पहले ही पार्टी के रिकॉर्ड और दोनों की गतिविधियों की जांच कर चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 5 सितंबर की रात सुब्रत और शालू एक कपल किटी पार्टी में गए थे और देर रात वापस लौटे थे। पुलिस इस टाइमलाइन को हत्या के अनुमानित समय से मिलाकर देख रही है।

पूछताछ का एक अहम हिस्सा सुब्रत और विशाल के बीच लंबे समय से रहे संपर्क को लेकर है। पुलिस के अनुसार दोनों के बीच 1 मई से 5 सितंबर तक 300 से ज्यादा बार बातचीत हुई थी। एक रिपोर्ट में यह संख्या करीब 309 कॉल बताई गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विशाल से नौकरी छूटने के बाद भी सुब्रत लगातार उसके संपर्क में क्यों था और दोनों के बीच बातचीत का उद्देश्य क्या था। हालांकि केवल फोन पर बातचीत होना किसी व्यक्ति की हत्या में संलिप्तता साबित नहीं करता और पुलिस को इसका संबंध अपराध से साबित करने के लिए अन्य साक्ष्यों की जरूरत होगी।

जांच में विशाल के मोबाइल से भी कुछ ऐसी जानकारियां सामने आई हैं जिन्हें पुलिस महत्वपूर्ण मान रही है। रिपोर्ट के अनुसार विशाल ने 3 सितंबर को नया सिम कार्ड खरीदा था। इस नए नंबर से उसने शालू को सात और सुब्रत को छह बार कॉल की थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हत्या से कुछ दिन पहले नए नंबर का इस्तेमाल क्यों किया गया और इन कॉल के दौरान किन मुद्दों पर बातचीत हुई। पुलिस के मुताबिक नया सिम हत्या की योजना से जुड़ा था या सामान्य संपर्क के लिए इस्तेमाल हुआ, यह जांच से स्पष्ट होना बाकी है।

विशाल की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री भी पुलिस की जांच का हिस्सा बनी है। रिपोर्ट के अनुसार हत्या से एक दिन पहले उसने धारदार चाकू और उसकी उपलब्धता से संबंधित जानकारी गूगल पर खोजी थी। इसके अलावा वारदात वाले दिन रतन आर्बिट अपार्टमेंट पहुंचने के बाद विशाल और राजकिशोर के बीच कुछ ही मिनटों के अंतराल में फोन पर बातचीत हुई थी। पुलिस इन कॉल और सीसीटीवी फुटेज को मिलाकर यह समझने की कोशिश कर रही है कि दोनों आरोपितों की वास्तविक गतिविधियां क्या थीं।

पुलिस के अनुसार विशाल और राजकिशोर अपार्टमेंट पहुंचने के बाद कुछ समय गार्डन की ओर भी गए थे। रिपोर्टों में 10:29, 10:31 और 10:37 बजे उनके बीच फोन पर बातचीत का उल्लेख है। पुलिस अनुमान लगा रही है कि हत्या से पहले दोनों के बीच किसी तरह की योजना या समन्वय हुआ हो सकता है। हालांकि यह पुलिस की जांच का अनुमान है और बातचीत में वास्तव में क्या कहा गया, इसका पता कॉल रिकॉर्ड से अकेले नहीं चलता। इसके लिए आरोपितों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जरूरत होगी।

पुलिस कारोबारी के बेटे सुब्रत को भी जांच के केंद्र में रखकर पूछताछ कर चुकी है। सुब्रत से कई घंटे पूछताछ की गई और बाद में उसे छोड़ दिया गया। पुलिस आयुक्त के अनुसार उससे आगे भी पूछताछ की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि हत्याकांड से जुड़े कई तथ्य अभी स्पष्ट नहीं हैं और इन्हें आरोपितों के बयानों, कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज से जोड़कर देखा जाएगा। फिलहाल सुब्रत को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है।

सुब्रत और विशाल के बीच लंबे समय तक संपर्क पुलिस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विशाल कभी विनीत मिनोचा के यहां काम करता था। रिपोर्टों के अनुसार वह करीब 12 साल तक परिवार के संपर्क में रहा था। बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था, लेकिन सुब्रत उससे छोटे-मोटे कामों के लिए संपर्क में रहता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नौकरी से अलग होने के बाद दोनों के बीच संपर्क किस प्रकृति का था और क्या इसका हत्या से कोई संबंध था। सुब्रत ने पूछताछ में बताया है कि विशाल बिजली का काम अच्छी तरह जानता था, इसलिए वह उसे कभी-कभी बुलाता था।

पुलिस के सामने पार्टी की रात की टाइमलाइन भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार हत्या वाली रात सुब्रत और शालू एक कपल पार्टी में गए थे। पार्टी की बुकिंग और रेस्टोरेंट रिकॉर्ड से पुलिस ने उनके पहुंचने और वहां से निकलने का समय जुटाया है। जांच में पार्टी के खर्च को लेकर भी पुलिस ने सवाल किए हैं। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि उस रात दोनों की गतिविधियां क्या थीं और क्या पार्टी में मौजूद रहने की टाइमलाइन हत्या के समय से पूरी तरह मेल खाती है।

मामले में सोशल मीडिया गतिविधियों को भी पुलिस ने जांच के दायरे में रखा है। रिपोर्टों के अनुसार हत्या के बाद सुब्रत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ पोस्ट और तस्वीरें हटाई थीं। पुलिस इस बात को भी जांच रही है कि पोस्ट हटाने की वजह क्या थी। हालांकि किसी सोशल मीडिया पोस्ट को हटाना अपने आप में अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। पुलिस को यह देखना होगा कि पोस्ट कब हटाए गए, उनमें क्या सामग्री थी और उनका हत्याकांड से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

पुलिस विनीत मिनोचा की संपत्ति और पारिवारिक दस्तावेजों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच में 2022 की एक वसीयत का दस्तावेज सामने आने की बात कही गई है। पुलिस यह देख रही है कि वसीयत में किन लोगों का नाम था और संपत्ति से संबंधित व्यवस्था क्या थी। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि वसीयत हत्या की वजह थी। पुलिस कई संभावित कारणों की पड़ताल कर रही है।

इससे पहले पुलिस ने दावा किया था कि शालू ने कथित तौर पर विशाल को डुप्लीकेट चाबी उपलब्ध कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से कुछ समय पहले विशाल को शालू और सुब्रत के साथ देखा गया था। पुलिस इन घटनाओं की टाइमलाइन और सीसीटीवी फुटेज को मिलाकर जांच कर रही है। वहीं, शालू की ओर से हत्या में शामिल होने से इनकार किया गया है। इसलिए पुलिस के लिए यह जरूरी है कि आरोपों और बयानों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से की जाए।

रिमांड मिलने पर पुलिस शालू और विशाल से अलग-अलग पूछताछ के बाद उनके बयानों का मिलान कर सकती है। इसके बाद सुब्रत से भी उन्हीं बिंदुओं पर सवाल किए जाने की संभावना है। खास तौर पर विशाल और सुब्रत के बीच हुई कॉल, डुप्लीकेट चाबी, हत्या से पहले की मुलाकातें, पार्टी की टाइमलाइन और वारदात के बाद की गतिविधियों को लेकर सवाल हो सकते हैं। पुलिस इन सभी जानकारियों को सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों के साथ मिलाने की तैयारी में है।

अदालत में आज होने वाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस ने शालू और विशाल की 24 घंटे की कस्टडी रिमांड मांगी है। यदि अदालत रिमांड मंजूर करती है तो पुलिस को दोनों से हिरासत में पूछताछ का मौका मिलेगा। यदि रिमांड मंजूर नहीं होती है तो जांच एजेंसी को उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना होगा। फिलहाल रिमांड पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।

विनीत मिनोचा हत्याकांड में अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। हत्या की वास्तविक वजह क्या थी, किसने योजना बनाई, डुप्लीकेट चाबी किसके निर्देश पर बनी, विशाल और सुब्रत के बीच लगातार संपर्क का कारण क्या था और हत्या की रात सभी आरोपितों की वास्तविक गतिविधियां क्या थीं—इन सवालों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपितों से पूछताछ और साक्ष्यों के मिलान से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल शालू और विशाल जेल में हैं और उनकी पुलिस कस्टडी रिमांड पर 19 सितंबर को सुनवाई होनी है। सुब्रत से पुलिस पूछताछ कर चुकी है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। हत्याकांड में किसी भी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तभी माना जा सकता है जब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं।

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