उत्तराखंड के Karnaprayag में निहंग सिखों के साथ हुए विवाद के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर Himachal Pradesh-Uttarakhand सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। इसी क्रम में सीमा पर पहुंच रहे निहंगों को रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में निहंग वहां एकत्र हो गए और जमकर नारेबाजी की।
नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। हिमाचल प्रदेश से आए निहंग सिखों के एक जत्थे के उत्तराखंड में प्रवेश की कोशिश के बाद हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है, जबकि दोनों राज्यों के अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास जारी है।
यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था, स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संवाद से भी जुड़ा हुआ है। प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा
कर्णप्रयाग विवाद के बाद निहंग सिखों के उत्तराखंड कूच की घोषणा को देखते हुए हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। विकासनगर के कुल्हाल बॉर्डर सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने-जाने वाले वाहनों की गहन जांच की जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।
प्रशासन के अनुसार, कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग तोड़ने और पथराव की घटनाओं की भी सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत सुरक्षा घेरा मजबूत कर हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।
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क्या है नगरासू गुरुद्वारा विवाद?
विवाद की शुरुआत 16 जून को कर्णप्रयाग क्षेत्र में हुई, जब निहंग सिख श्रद्धालुओं और कुछ स्थानीय लोगों के बीच विवाद बढ़कर मारपीट में बदल गया। इस घटना में चार स्थानीय लोग घायल हुए थे। मामले में पुलिस ने जांच के बाद चार निहंगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद नगरासू स्थित गुरुद्वारे को लेकर भी विवाद सामने आया। प्रशासन के अनुसार, मध्यस्थता और वार्ता के बाद संबंधित परिसर को शांतिपूर्ण तरीके से खाली कराया गया। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
निहंग प्रतिनिधियों की क्या है मांग?
सीमा पर पहुंचे निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं है। उनका दावा है कि वे शांतिपूर्वक धार्मिक यात्रा करते हुए हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने मांग रखी कि गिरफ्तार किए गए चारों निहंगों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए। प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक उनके साथियों के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपनी मांग पर कायम रहेंगे।
उत्तराखंड पुलिस ने पूरे मामले को लेकर स्पष्ट किया है कि घटना को सांप्रदायिक या धार्मिक विवाद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक विवाद गुरुद्वारे के प्रबंधन और कुछ श्रद्धालुओं के बीच हुआ था। पुलिस का कहना है कि सूचना मिलने के बाद तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ श्रद्धालु पुलिस की मौजूदगी से घबराकर भवन की छत पर चले गए थे, जिसके बाद कई दौर की बातचीत के जरिए उन्हें शांतिपूर्वक नीचे लाया गया।











