कर्नाटक में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सभी दलों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की। बैठक में कानूनी, प्रशासनिक और जल प्रबंधन रणनीति पर चर्चा हुई।
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा विवाद और हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए एक उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक आयोजित की। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में उनके आधिकारिक आवास पर हुई इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना और राज्य की ओर से एकजुट रुख प्रस्तुत करना था।
सभी प्रमुख दलों और वरिष्ठ नेताओं की रही भागीदारी
बैठक में राज्य के कई पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, विपक्ष के नेता, सांसद, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद रहे। सरकार ने इसे एक ऐसी पहल बताया, जिसमें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के साझा हितों को प्राथमिकता दी गई।
मुख्यमंत्री ने बैठक की शुरुआत में कहा कि कावेरी जल विवाद कोई नया विषय नहीं है, बल्कि कई दशकों से यह कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक संवेदनशील अंतरराज्यीय मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विवाद को लेकर कर्नाटक के लोगों ने लंबे समय से संघर्ष देखा है और अब भी राज्य के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राज्यहित में एकजुट रहने की अपील
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि जब भी राज्य के हितों की बात आती है, कर्नाटक की राजनीतिक परंपरा रही है कि सभी दल अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर एक मंच पर आते हैं। उन्होंने कहा कि पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों की सोच समान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कावेरी विवाद को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक हितों और नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, एकजुट रुख राज्य की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति को भी मजबूत बनाता है।
केंद्र सरकार से भी किया गया संवाद
मुख्यमंत्री ने बैठक में जानकारी दी कि कावेरी जल प्रबंधन से संबंधित हालिया बैठकों से पहले उन्होंने केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और राज्य के अनुभवी नेताओं से मुलाकात कर कर्नाटक की चिंताओं से अवगत कराया था। उन्होंने उन नेताओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखा। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की भी सराहना की, जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित बैठक में राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकमत होकर समर्थन व्यक्त किया।

तमिलनाडु के साथ संवाद का रास्ता खुला
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए संवाद और सहयोग की नीति पर विश्वास करती है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के नेतृत्व के साथ प्रस्तावित बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है और वर्तमान स्थिति सामान्य होने के बाद आगे की बातचीत की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक प्रक्रिया, न्यायिक निर्देशों और आपसी सहमति के माध्यम से निकालने के पक्ष में है। उनका कहना था कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग और संवाद से ही दीर्घकालिक समाधान संभव है।
बारिश से स्थिति में आया सुधार
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में जलाशयों की मौजूदा स्थिति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश से जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है और इससे स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, काबिनी जलाशय अपनी पूर्ण भंडारण क्षमता तक पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त प्राकृतिक जल प्रवाह को रोका नहीं जा सकता, इसलिए निर्धारित नियमों के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह बना रहेगा और जल प्रबंधन संतुलित रहेगा।
किसानों और पेयजल दोनों पर सरकार का फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य के नागरिकों के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है और घरेलू उपयोग के लिए पानी की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। साथ ही सिंचाई परियोजनाओं के तहत नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है, जिससे कावेरी बेसिन के किसानों को राहत मिलेगी और कृषि गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कृषि और पेयजल आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना है ताकि किसी भी वर्ग को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कानूनी और प्रशासनिक रणनीति पर भी चर्चा
सर्वदलीय बैठक में कावेरी जल विवाद से जुड़े कानूनी विकल्पों और प्रशासनिक रणनीतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सरकार ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकरणों और न्यायिक संस्थाओं के समक्ष राज्य का पक्ष तथ्यों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मजबूती से रखेगी। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जल उपलब्धता, वर्षा के आंकड़े, जलाशयों की स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक नीति तैयार की जानी चाहिए।
कावेरी विवाद का व्यापक महत्व
कावेरी नदी दक्षिण भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और इसका पानी कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी के लिए महत्वपूर्ण है। वर्षों से जल बंटवारे को लेकर विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं चलती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु पैटर्न, अनियमित वर्षा और बढ़ती जल मांग को देखते हुए भविष्य में जल प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण विषय बनता जाएगा। ऐसे में राज्यों के बीच सहयोग और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।












