केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों के चलते श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिलहाल बंद ही रहेगा। शुक्रवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने यह जानकारी दी।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब तक पहुंच प्रदान करने वाला करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिलहाल बंद ही रहेगा। संसद में दिए गए एक जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए कॉरिडोर का संचालन फिर से शुरू करना संभव नहीं है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विभिन्न सिख धार्मिक संगठनों और समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग लगातार उठाई जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और इसकी यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है।
लोकसभा में उठाया गया था मुद्दा
लोकसभा में इस विषय पर प्रश्न पूछे जाने के बाद केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार को विभिन्न सिख धार्मिक समूहों और संगठनों की ओर से कॉरिडोर को पुनः शुरू करने के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर को बंद रखना आवश्यक माना गया है।
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और क्षेत्रीय परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है।
पहलगाम हमले के बाद प्रभावित हुई सेवाएं
सरकारी जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसी संदर्भ में करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाओं को निलंबित रखा गया है। सरकार ने बताया कि 7 मई 2025 से शुरू हुई सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण कॉरिडोर के नियमित संचालन पर रोक लगी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक सुरक्षा स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं हो जाती, तब तक कॉरिडोर को दोबारा खोलने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
भारत-पाकिस्तान समझौते के तहत शुरू हुआ था कॉरिडोर

करतारपुर साहिब कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है। दोनों देशों ने 24 अक्टूबर 2019 को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत भारतीय श्रद्धालुओं को बिना वीजा के पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब जाने की अनुमति मिली थी।
यह पहल सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के लिए शुरू की गई थी। गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया था, जिसे भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया। बाद में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और धार्मिक महत्व को देखते हुए इस व्यवस्था को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते को पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया था।
सिख समुदाय के लिए क्यों महत्वपूर्ण है करतारपुर साहिब?
करतारपुर साहिब सिख धर्म के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह वही स्थान है जहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे। इतिहासकारों के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के लगभग 18 वर्ष करतारपुर में बिताए और यहीं से उन्होंने मानवता, समानता और सेवा का संदेश दिया। इसी कारण यह स्थान दुनिया भर के सिख श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र माना जाता है।
हर वर्ष भारत समेत दुनिया के कई देशों से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं। कॉरिडोर खुलने के बाद यह यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुविधाजनक हो गई थी।
कहां स्थित है गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब?
गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित है। यह पवित्र स्थल रावी नदी के पश्चिमी तट पर बसे करतारपुर नगर में मौजूद है। भारत की ओर से पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक डेरा बाबा नानक इस कॉरिडोर का प्रवेश बिंदु है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब की दूरी लगभग 4.5 किलोमीटर है, जबकि डेरा बाबा नानक सीमा के बेहद निकट स्थित है।
कॉरिडोर शुरू होने से पहले श्रद्धालु भारतीय सीमा से दूरबीन के माध्यम से गुरुद्वारे के दर्शन किया करते थे। कॉरिडोर खुलने के बाद उन्हें सीधे गुरुद्वारा पहुंचने का अवसर मिला, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली।












