केन्या में जेन-ज़ी विरोध प्रदर्शनों की दूसरी वर्षगांठ पर तनाव, नैरोबी की प्रमुख सड़कें बंद, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर

केन्या में 2024 के प्रदर्शनकारियों की मौत की बरसी पर Gen Z विरोध प्रदर्शन से पहले नैरोबी में प्रमुख सड़कें सील कर दी गईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें

केन्या की राजधानी नैरोबी में Gen Z विरोध प्रदर्शनों की दूसरी बरसी पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने प्रमुख सड़कों को सील कर दिया, जबकि कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारी मृतकों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

नैरोबी: पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में जेन-ज़ी आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों से पहले राजधानी नैरोबी समेत कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने केंद्रीय नैरोबी की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया है और शहर के महत्वपूर्ण इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

इन प्रदर्शनों का उद्देश्य वर्ष 2024 में हुए सरकार विरोधी कर-विरोधी आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देना और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए न्याय की मांग करना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले आंदोलनों में 80 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी कारण वे जवाबदेही और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

राजधानी नैरोबी में सामान्य जीवन प्रभावित

प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने नैरोबी के केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। कई स्थानों पर जल तोपों, पुलिस वाहनों और घुड़सवार पुलिस बल की तैनाती की गई।

इन सुरक्षा उपायों के कारण हजारों यात्रियों को शहर की सीमाओं पर रुकना पड़ा। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं और कई लोग अपने कार्यस्थलों तक नहीं पहुंच सके। एहतियात के तौर पर कई व्यापारिक प्रतिष्ठान, कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहे।

शहर के सामान्यतः व्यस्त रहने वाले कई हिस्से दिनभर लगभग सुनसान दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह कदम संभावित हिंसा और अव्यवस्था को रोकने के लिए उठाया गया है।

सोशल मीडिया के माध्यम से संगठित हुए प्रदर्शन

वर्तमान प्रदर्शनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिए संगठित किया गया है। युवा कार्यकर्ता और नागरिक समूह डिजिटल माध्यमों पर अभियान चलाकर लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील कर रहे हैं।

प्रदर्शन केवल नैरोबी तक सीमित नहीं हैं। मोंबासा सहित देश के कई अन्य प्रमुख शहरों और मध्य केन्या के क्षेत्रों में भी रैलियों और स्मृति कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया ने केन्या के युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर संगठित होने के लिए एक प्रभावशाली मंच उपलब्ध कराया है।

कुछ इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें

हालांकि कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ क्षेत्रों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार, नैरोबी के बाहरी इलाकों और कुछ अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम करने और आग जलाने का प्रयास किया।

इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी किए जाने की भी खबरें सामने आई हैं।

गिथुराई क्षेत्र से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो में धुएं और आग के दृश्य दिखाई दिए, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है, हालांकि अधिकारियों ने गिरफ्तारी की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है।

मृतकों के परिजनों ने शांतिपूर्ण स्मरण की मांग की

वर्ष 2024 के प्रदर्शनों में जान गंवाने वाले कई लोगों के परिवारों ने सरकार से अपील की है कि उन्हें अपने प्रियजनों को शांतिपूर्वक श्रद्धांजलि देने की अनुमति दी जाए।

परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि उन लोगों की स्मृति को सम्मान देना है जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई थी। कई परिवारों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे हिंसा या संघर्ष नहीं चाहते और केवल न्याय तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

विपक्षी नेताओं और नागरिक संगठनों का समर्थन

देश के कई विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने और सरकार से जवाब मांगने का अधिकार है।

कुछ विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर के निकट मृतकों की स्मृति में पुष्पांजलि भी अर्पित की। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पिछले आंदोलनों के दौरान हुई मौतों और कथित दुर्व्यवहार की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

सिविल सोसाइटी समूहों ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति रूटो की अपील और चेतावनी

केन्या के राष्ट्रपति William Ruto ने हाल ही में कहा था कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या हिंसा फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने लोगों से कानून का पालन करने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की। सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों की तैनाती केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

मुआवजा योजना पर भी विवाद

प्रदर्शनों से कुछ दिन पहले राष्ट्रपति रूटो ने 2017 से 2025 के बीच विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मानवाधिकार उल्लंघनों के पीड़ितों के लिए लगभग 1.5 करोड़ डॉलर के मुआवजा कोष की घोषणा की थी।

सरकार का कहना है कि यह कदम प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए उठाया गया है। हालांकि कई मानवाधिकार संगठनों ने इस योजना की आलोचना की है। उनका आरोप है कि कुछ पीड़ितों को योजना में शामिल नहीं किया गया और मुआवजा प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।

2024 के आंदोलन की पृष्ठभूमि

जून 2024 में केन्या में प्रस्तावित कर वृद्धि के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे और राजधानी में संसद भवन तक पहुंच गए थे। व्यापक जनविरोध के बाद सरकार को विवादास्पद वित्तीय विधेयक वापस लेना पड़ा था।

हालांकि उन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे थे। इसके बाद कई लोगों के लापता होने, हिरासत में लिए जाने और कथित न्यायेतर हत्याओं को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

इन्हीं घटनाओं की याद में आयोजित वर्तमान प्रदर्शन केवल अतीत को याद करने का प्रयास नहीं हैं, बल्कि वे केन्या में लोकतांत्रिक अधिकारों, जवाबदेही और मानवाधिकारों पर चल रही व्यापक बहस का भी हिस्सा बन चुके हैं। आगामी चुनावों से पहले बढ़ता जनअसंतोष और राजनीतिक ध्रुवीकरण इन प्रदर्शनों को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है।

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