ट्रम्प के मीडिया बैन पर कोर्ट की रोक, CNN समेत 3 संस्थानों को फिर व्हाइट हाउस एंट्री

अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प का CNN, MS NOW और Politico पर व्हाइट हाउस बैन 14 दिनों के लिए रोक दिया। तीनों संस्थानों के प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया।

अमेरिकी कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के CNN, MS NOW और Politico पर व्हाइट हाउस बैन पर अस्थायी रोक लगा दी। जज टिमोथी केली ने तीनों संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास तुरंत बहाल करने का आदेश दिया।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने के फैसले पर संघीय अदालत ने अस्थायी रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला जज टिमोथी केली ने 24 सितंबर 2026 को आदेश देते हुए प्रशासन को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के व्हाइट हाउस प्रेस पास तत्काल बहाल करने को कहा। अदालत का यह आदेश फिलहाल 14 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। ट्रम्प ने 18 सितंबर को इन तीनों मीडिया संस्थानों पर व्हाइट हाउस पहुंच से रोक लगाने का ऐलान किया था। इसके बाद CNN, MS NOW और Politico ने संयुक्त रूप से संघीय अदालत का रुख किया और आरोप लगाया कि प्रशासन का फैसला अमेरिकी संविधान के First Amendment और उचित प्रक्रिया यानी due process के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

अदालत ने 14 दिनों के लिए बैन रोका

जज टिमोथी केली ने तीनों मीडिया संस्थानों को तत्काल राहत देते हुए प्रशासन को उनके पत्रकारों के hard-pass press credentials वापस करने और व्हाइट हाउस परिसर में उनकी पहुंच बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश फिलहाल 14 दिनों तक लागू रहेगा, जब तक अदालत की ओर से कोई दूसरा आदेश नहीं आता। इस अवधि में तीनों मीडिया संस्थान अपने पत्रकारों को व्हाइट हाउस कवरेज के लिए भेज सकेंगे।

कैली ने अपने आदेश में कहा कि मीडिया संस्थानों ने यह दिखाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है कि उनका प्रतिबंध संवैधानिक और प्रक्रियात्मक सवाल खड़े करता है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि पत्रकारों के प्रेस पास रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था।

ट्रम्प ने 18 सितंबर को लगाया था प्रतिबंध

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस कवरेज से बाहर करने का फैसला किया था। ट्रम्प ने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए उन पर गलत और नकारात्मक खबरें प्रकाशित करने के आरोप लगाए थे।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा था कि ये संस्थान लगातार ऐसी रिपोर्टिंग करते हैं जिसे वह गलत मानते हैं। बाद में पत्रकारों के सवालों के जवाब में भी उन्होंने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग की आलोचना की।

ट्रम्प प्रशासन ने बाद में अदालत में प्रतिबंध का बचाव करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तर्क भी पेश किए। सरकार ने दावा किया कि तीनों संस्थानों की कुछ रिपोर्टों में संवेदनशील या गोपनीय जानकारी प्रकाशित हुई थी।

मीडिया संस्थानों ने First Amendment का हवाला दिया

CNN, MS NOW और Politico ने अदालत में कहा कि व्हाइट हाउस का फैसला उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। तीनों संस्थानों ने First Amendment के तहत प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रेस पास रद्द करने से पहले प्रशासन ने उन्हें अपने पक्ष में सफाई देने या फैसले को चुनौती देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। अदालत में दायर याचिका में मीडिया संस्थानों ने तत्काल राहत की मांग की थी ताकि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक उनके पत्रकार व्हाइट हाउस में अपनी नियमित जिम्मेदारियां निभा सकें।

जज ने due process पर जताई चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने इस बात पर सवाल उठाया था कि क्या व्हाइट हाउस ने तीनों मीडिया संस्थानों के प्रेस पास रद्द करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया था। अदालत ने पहले के मामलों का भी संदर्भ लिया, जिनमें पत्रकारों के व्हाइट हाउस प्रेस पास रद्द करने से पहले नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर देने से जुड़े सिद्धांत स्थापित किए गए थे।

कैली ने यह भी माना कि तीनों मीडिया संस्थानों ने यह तर्क देने का पर्याप्त आधार दिया है कि प्रतिबंध से उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता है, खासकर तब जब व्हाइट हाउस की दैनिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग में नियमित पहुंच महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क को अदालत ने माना पर्याप्त नहीं

ट्रम्प प्रशासन ने अदालत में कहा था कि मीडिया संस्थानों की कुछ रिपोर्टों में संवेदनशील जानकारी प्रकाशित होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठता है। हालांकि, जज केली ने कहा कि प्रशासन की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड में इस दावे को पर्याप्त तथ्यात्मक समर्थन नहीं मिला कि तीनों संस्थानों के प्रेस पास रद्द करने से राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा होगी।

अदालत ने प्रशासन से जुड़े तर्कों और राष्ट्रपति की सार्वजनिक टिप्पणियों के बीच भी अंतर पर ध्यान दिया। राष्ट्रपति की ओर से प्रतिबंध के लिए मीडिया संस्थानों की कथित गलत और नकारात्मक रिपोर्टिंग का उल्लेख किया गया था, जबकि अदालत में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार पेश किया।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों की एंट्री फिर शुरू होगी

अदालत के आदेश के बाद CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों के व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश का रास्ता फिर खुल गया है। तीनों संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास तत्काल बहाल करने का आदेश दिया गया है। इसका मतलब है कि प्रशासन अगले 14 दिनों तक इन मीडिया संस्थानों को प्रतिबंधित करने वाले फैसले को लागू नहीं कर सकेगा, जब तक अदालत कोई नया आदेश जारी नहीं करती।

मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अभी तय नहीं हुई है। 14 दिन की अस्थायी रोक के बाद अदालत इस विवाद पर आगे सुनवाई कर सकती है या अंतरिम आदेश को बदल सकती है।

बैन के बाद दूसरे मीडिया संस्थानों ने भी कवरेज रोकी

ट्रम्प प्रशासन के फैसले के बाद व्हाइट हाउस की मीडिया कवरेज को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई प्रमुख अमेरिकी टीवी नेटवर्क और अन्य मीडिया संस्थानों ने तीनों प्रतिबंधित संस्थानों के समर्थन में व्हाइट हाउस के मीडिया पूल की कवरेज से दूरी बनाने का फैसला किया था।

इस घटनाक्रम से व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को लेकर बहस फिर तेज हुई। ट्रम्प इससे पहले भी CNN और अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे हैं। उनके पहले कार्यकाल में भी CNN के पत्रकारों के प्रेस एक्सेस को लेकर विवाद हुआ था।

व्हाइट हाउस ने शुरू किया ‘TRUMP TV’

तीनों मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध के बीच व्हाइट हाउस ने अपना ऑनलाइन वीडियो चैनल भी शुरू किया। इसका नाम “TRUMP TV: The Essentials Station” रखा गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवा पर ट्रम्प प्रशासन के भाषणों और कार्यक्रमों से जुड़ी वीडियो सामग्री दिखाई जाती है। यह पहल ऐसे समय शुरू हुई जब CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस कवरेज से बाहर किया गया था।व्हाइट हाउस की इस पहल को प्रशासन और पारंपरिक मीडिया के बीच बढ़ते टकराव के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल अमेरिकी संघीय अदालत का आदेश CNN, MS NOW और Politico को अस्थायी राहत देता है। तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल रहेगी और प्रशासन 14 दिनों तक प्रतिबंध लागू नहीं कर सकेगा। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। अदालत आगे इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करेगी। मुख्य कानूनी सवाल यह रहेगा कि क्या राष्ट्रपति प्रशासन किसी मीडिया संस्थान का व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस उसकी रिपोर्टिंग के आधार पर सीमित कर सकता है और ऐसा करते समय उसे किस संवैधानिक तथा प्रक्रियात्मक मानकों का पालन करना होगा।

इस मामले का असर केवल तीन मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति और स्वतंत्र प्रेस के बीच संबंध, पत्रकारों की सरकारी संस्थानों तक पहुंच और First Amendment की व्यावहारिक व्याख्या से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

Leave a comment