कहानी: नन्ही चिड़िया का बड़ा साहस

कहानी: नन्ही चिड़िया का बड़ा साहस

साहस उम्र या आकार का मोहताज नहीं होता। कभी-कभी सबसे छोटा प्राणी भी बड़ी सीख दे जाता है। यह कहानी एक नन्ही चिड़िया की है, जिसने अपने साहस, धैर्य और समझदारी से यह साबित कर दिया कि हिम्मत हो तो असंभव भी संभव बन सकता है।

कहानी

एक घने जंगल के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ था। उसी पेड़ की ऊँची डाल पर एक नन्ही चिड़िया अपने छोटे-से घोंसले में रहती थी। उसका संसार बहुत छोटा था, कुछ तिनके, थोड़े से दाने और खुला नीला आसमान। रोज़ सुबह वह चहचहाते हुए उड़ जाती, अपने बच्चों के लिए दाना लाती और शाम को घोंसले में लौट आती।

एक दिन जंगल में भयानक तूफान आया। तेज़ हवा चलने लगी, काले बादल गरजने लगे और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। हवा इतनी तेज़ थी कि पेड़ों की डालियाँ टूटने लगीं। नन्ही चिड़िया का घोंसला भी हिलने लगा। तभी एक ज़ोरदार झोंके से घोंसला टूटकर नीचे गिर पड़ा। उसके अंडे मिट्टी में जा गिरे।

चिड़िया नीचे उतरी और अपने टूटे अंडों को देखकर विलाप करने लगी। इतने बड़े जंगल में वह अकेली, छोटी-सी चिड़िया क्या कर सकती थी? तभी उसे याद आया कि पास ही कुछ लकड़हारे जंगल काटने आने वाले हैं। अगर पेड़ कट गए तो न सिर्फ उसका, बल्कि कई पक्षियों और जानवरों का घर उजड़ जाएगा।

अगले दिन सचमुच लकड़हारे कुल्हाड़ी लेकर आ गए। बड़े-बड़े पेड़ों पर वार होने लगे। जंगल में शोर मच गया। जानवर भागने लगे, पक्षी इधर-उधर उड़ने लगे। लेकिन नन्ही चिड़िया ने हार नहीं मानी। वह उड़कर नदी तक गई, अपनी चोंच में पानी की एक-एक बूंद भरकर लाई और आग जैसी गर्म कुल्हाड़ियों पर टपकाने लगी।

लकड़हारे हँस पड़े।

'इस छोटी-सी चिड़िया से क्या होगा?' वे बोले।

लेकिन चिड़िया बार-बार जाती, हर बार पानी की एक बूंद लाती और गिरा देती। उसका शरीर थक गया, पंख भारी हो गए, फिर भी उसने उड़ना नहीं छोड़ा। उसकी आँखों में डर नहीं, सिर्फ़ दृढ़ निश्चय था।

यह देखकर जंगल के दूसरे जानवर और पक्षी भी रुक गए। हिरण, खरगोश, बंदर, सब चुपचाप यह दृश्य देखने लगे। नन्ही चिड़िया का साहस उन्हें छू गया। तभी एक बूढ़ा लकड़हारा आगे आया। उसने कुल्हाड़ी रोक दी और बोला,
'हम बड़े होकर भी इतना साहस नहीं दिखा पाए। यह चिड़िया जानती है कि अकेली है, फिर भी कोशिश कर रही है।'

लकड़हारों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने पेड़ काटना बंद कर दिया और जंगल को छोड़कर चले गए। जंगल में फिर से शांति लौट आई। जानवरों ने राहत की साँस ली।

कुछ दिनों बाद उसी बरगद पर चिड़िया ने फिर से घोंसला बनाया। इस बार पूरा जंगल उसकी रखवाली करता था। जब उसके नए बच्चे पैदा हुए, तो उनकी चहचहाहट में साहस की कहानी गूँज रही थी।

सीख: छोटा होना कमजोरी नहीं है। सच्चा साहस और दृढ़ संकल्प हो, तो अकेला इंसान भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

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