कोलकाता में TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप, अभिषेक बनर्जी ने BJP पर साधा निशाना

कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित TMC कार्यालय में कथित तोड़फोड़ पर अभिषेक बनर्जी ने BJP पर आरोप लगाए। BJP ने आरोपों से इनकार किया है। पुलिस जांच जारी है।

कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित TMC कार्यालय में तड़के कथित तोड़फोड़ को लेकर अभिषेक बनर्जी ने BJP पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने CCTV फुटेज साझा कर हमलावरों की गिरफ्तारी मांगी। BJP ने आरोपों को खारिज करते हुए घटना में अपने कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से इनकार किया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बनर्जी ने दावा किया कि गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे हथियारों से लैस कुछ लोग कार्यालय में घुसे और वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट की।

अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कथित घटना से जुड़े CCTV फुटेज और वीडियो साझा किए हैं। उनके अनुसार, हमलावरों ने कार्यालय के भीतर फर्नीचर और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया, कर्मचारियों के मोबाइल फोन छीने और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त किया या अपने साथ ले गए। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि घटना में पार्टी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था।

तड़के कार्यालय में घुसने का लगाया आरोप

अभिषेक बनर्जी के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह लगभग 4:30 बजे हुई। उनका आरोप है कि कुछ लोग हथियारों के साथ TMC कार्यालय में दाखिल हुए और वहां मौजूद कर्मचारियों को निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय के अंदर सामान को इधर-उधर फेंका गया और फर्नीचर समेत कई वस्तुओं को नुकसान पहुंचाया गया।

TMC सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान कर्मचारियों के फोन छीन लिए गए। इसके अलावा एयर प्यूरिफायर, प्रिंटर, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के गायब होने का भी उन्होंने दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बनर्जी ने कहा कि TMC कर्मचारियों और वहां मौजूद वकीलों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी थी। उनका आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद लगभग दो घंटे तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इस कथित देरी को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

अभिषेक ने CCTV फुटेज साझा कर उठाए सवाल

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो साझा किए। इनमें से एक वीडियो में कथित तौर पर तोड़फोड़ के बाद कार्यालय के अंदर सामान बिखरा हुआ दिखाई देता है। दूसरे वीडियो और उपलब्ध दृश्य सामग्री के आधार पर घटना की परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

TMC सांसद ने मांग की है कि पुलिस घटना की विस्तृत जांच करे और कथित हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर घटना पूर्व नियोजित थी, तो इसकी योजना किसने बनाई और इसे अंजाम देने के लिए किसे निर्देश दिया गया।

बनर्जी ने मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए कहा कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पुलिस को कथित घटना की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।

राज्यपाल और केंद्र से कार्रवाई की मांग

अभिषेक बनर्जी ने इस मामले को केवल पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाया। TMC नेता ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में तड़के हथियारों के साथ लोग प्रवेश कर सकते हैं और कथित तौर पर कर्मचारियों पर हमला कर सकते हैं, तो राज्य में कानून के शासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय से भी मामले में हस्तक्षेप की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट से घटना का संज्ञान लेने का अनुरोध किया।

कोलकाता में TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप, अभिषेक बनर्जी ने BJP पर साधा निशाना

बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर भी राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि विपक्ष के खिलाफ हिंसा और डर का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी परिस्थितियां बनी रहती हैं तो मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने के नैतिक अधिकार पर विचार करना चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए।

BJP ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

TMC के आरोपों पर BJP ने अलग रुख अपनाया है। बारानगर से BJP विधायक सजल घोष ने पार्टी की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना में BJP का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था।

घोष ने यह भी सवाल उठाया कि सुबह करीब 4:30 बजे TMC के लोग पार्टी कार्यालय में क्यों मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को राजनीतिक चर्चा में बने रहने के लिए इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस तरह घटना को लेकर TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। वास्तविक स्थिति का पता पुलिस जांच, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

कैमक स्ट्रीट कार्यालय पहले से विवाद में

जिस कार्यालय में कथित तोड़फोड़ की घटना हुई, वह पिछले कुछ दिनों से TMC और प्रशासन के बीच विवाद का केंद्र रहा है। 31 अगस्त को कोलकाता नगर निगम के अधिकारी पुलिस की मौजूदगी में कैमक स्ट्रीट स्थित इमारत में पहुंचे थे। वहां लगे TMC के एक बड़े साइनबोर्ड को हटाने की कार्रवाई की गई थी।

नगर निगम की ओर से आरोप लगाया गया था कि साइनबोर्ड बिना आवश्यक अनुमति के लगाया गया था। अधिकारियों ने यह भी कहा था कि इमारत और वहां लगे ढांचे से सुरक्षा संबंधी चिंताएं जुड़ी हो सकती हैं।

कार्रवाई के दौरान TMC कार्यकर्ताओं और नगर निगम अधिकारियों के बीच कथित तौर पर विवाद हुआ। अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और धमकी देने सहित अन्य आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में अभिषेक बनर्जी सहित तीन TMC नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने और 13 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी।

भवन की सुरक्षा और अनुमति को लेकर भी जांच

साइनबोर्ड हटाने की कार्रवाई के बाद पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारियों ने इमारत का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने भवन के स्वीकृत नक्शे और मौजूदा निर्माण के बीच संभावित अंतर के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की।

प्रशासन की ओर से कथित तौर पर कुछ कमियों की पहचान किए जाने की बात सामने आई थी। इस संबंध में TMC को नोटिस दिए जाने की संभावना भी जताई गई थी। हालांकि, भवन से जुड़े प्रशासनिक और कानूनी मामलों की स्थिति को अलग से संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना आवश्यक है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। एक ओर TMC कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर विपक्षी दल पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर BJP इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज कर रही है।

जांच के नतीजे पर टिकी नजर

कैमक स्ट्रीट की ताजा घटना अब पुलिस जांच के दायरे में है। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, कार्यालय में मौजूद लोगों की जानकारी और कथित तौर पर गायब या क्षतिग्रस्त सामान की सूची जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि कार्यालय में वास्तव में क्या हुआ, वहां कौन लोग मौजूद थे और कथित तोड़फोड़ के पीछे किसकी भूमिका थी। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल TMC ने हमलावरों की गिरफ्तारी और जवाबदेही तय करने की मांग की है, जबकि BJP ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। ऐसे में यह घटना पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक तनाव के बीच एक और विवाद के रूप में सामने आई है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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