भारतीय सेना की मेजर Abhilasha Barak ने लेबनान में शांति बहाली और पुनर्निर्माण को लेकर कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध प्रभावित देशों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बातचीत और युद्धविराम की प्रक्रिया का जारी रहना बेहद जरूरी है।
World News: संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने लेबनान में स्थायी शांति की स्थापना के लिए कूटनीति, संवाद और युद्धविराम को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक समाधान और मानवीय पुनर्निर्माण ही किसी संघर्षग्रस्त देश को स्थायी स्थिरता की ओर ले जा सकते हैं।
मेजर बराक को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ सम्मान प्रदान किया गया है।
लेबनान में शांति के लिए कूटनीति पर जोर
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत तैनात मेजर अभिलाषा बराक ने कहा कि युद्धविराम का जारी रहना बेहद जरूरी है, ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि स्थायी शांति केवल तभी संभव है जब, कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी रहें। संवाद के रास्ते खुले रहें और युद्धविराम का सम्मान किया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि लोगों के मानसिक और सामाजिक पुनर्वास की होती है।
युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती
मेजर बराक के अनुसार, किसी भी युद्ध प्रभावित देश में पुनर्निर्माण केवल सड़कों, घरों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होता। उन्होंने कहा कि, युद्ध से प्रभावित लोगों को मानसिक आघात से उबरने में समय लगता है. समुदायों में भरोसा फिर से स्थापित करना जरूरी होता है. सामाजिक एकता को पुनः मजबूत करना शांति प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. उनके अनुसार, यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थायी शांति हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में UNIFIL के तहत भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में कार्यरत हैं। UNIFIL मिशन दक्षिणी लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण शांति अभियानों में से एक माना जाता है, जहां क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
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महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
मेजर बराक ने बताया कि उनके कार्य का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं और किशोरियों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना है।उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में महिलाएं पुरुष शांति सैनिकों के साथ संवाद करने में सहज नहीं थीं, इसलिए उनके लिए विशेष पहल की गई। उनके द्वारा चलाए गए कार्यक्रमों में शामिल हैं:
- व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास
- शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
- शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान गतिविधियां
- सामुदायिक संवाद और विश्वास निर्माण पहल
इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में मजबूत भूमिका देना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मेजर अभिलाषा बराक की सराहना करते हुए उन्हें अग्रिम मोर्चे पर नेतृत्व और मानवीय कार्यों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। UN ने उनके कार्य को महिलाओं और लड़कियों के जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना है।
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उन्होंने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के रूप में भी सेवाएं दी हैं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक मानी जाती है।










