कोटा में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: उद्योग नगर थाने का कॉन्स्टेबल ₹7,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

कोटा में ACB ने उद्योग नगर थाने के कॉन्स्टेबल हरिओम को 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर मामले को रफा-दफा कराने के लिए घूस मांगी थी

राजस्थान के कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उद्योग नगर थाने में तैनात कॉन्स्टेबल हरिओम को 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी पर झूठे मामले में समझौता कराने और कार्रवाई रोकने के नाम पर घूस मांगने का आरोप है।

कोटा: राजस्थान के कोटा शहर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए उद्योग नगर थाना क्षेत्र में तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी कॉन्स्टेबल हरिओम पर एक मामले में कार्रवाई रोकने और समझौता कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है।

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मी ने शिकायतकर्ता से कुल 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। वह पहले ही 5,000 रुपये ले चुका था और शेष राशि के लिए लगातार दबाव बना रहा था। गुरुवार रात को एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर उसे 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राजस्थान में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पिछले कुछ दिनों में कोटा एसीबी द्वारा की गई यह तीसरी बड़ी ट्रैप कार्रवाई बताई जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच

एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क कर बताया था कि उसके नाबालिग बेटे का कॉलोनी में किसी व्यक्ति के साथ विवाद हो गया था। इसके बाद बेटे के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

परिवार का आरोप था कि शिकायत तथ्यात्मक रूप से गलत थी और मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा था। इसी दौरान आरोपी कॉन्स्टेबल ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और कथित तौर पर मामले में राहत दिलाने का भरोसा दिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी कार्रवाई रोकने, समझौता करवाने और पूरे मामले को खत्म करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था।

15 हजार रुपये की मांग, पहले ही ले चुका था 5 हजार

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी कॉन्स्टेबल हरिओम ने शिकायतकर्ता से कुल 15,000 रुपये की मांग की थी। आरोप है कि उसने पहले चरण में 5,000 रुपये प्राप्त भी कर लिए थे। इसके बाद वह शेष राशि के लिए लगातार दबाव बना रहा था। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय एसीबी से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। एसीबी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले का सत्यापन शुरू किया। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि आरोपी वास्तव में रिश्वत की मांग कर रहा था।

एसीबी ने किया सत्यापन, शिकायत सही पाई गई

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की मानक प्रक्रिया के तहत पहले शिकायत का सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने उपलब्ध तथ्यों और बातचीत की जांच की, जिसके बाद रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान आरोपी कॉन्स्टेबल कथित तौर पर शिकायतकर्ता से समझौता करते हुए 8,000 रुपये लेने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को आवश्यक निर्देश दिए और पूरी कार्रवाई की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित की गई।

कोटा में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: उद्योग नगर थाने का कॉन्स्टेबल ₹7,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

उद्योग नगर थाने के बाहर बिछाया गया जाल

गुरुवार रात एसीबी टीम ने उद्योग नगर थाना क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की। शिकायतकर्ता को आरोपी से मिलने के लिए भेजा गया। जानकारी के अनुसार, आरोपी कॉन्स्टेबल ने थाने के बाहर शिकायतकर्ता से 7,000 रुपये की राशि ली। जैसे ही राशि का लेन-देन पूरा हुआ, एसीबी टीम ने पूर्व निर्धारित संकेत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की। टीम ने मौके पर ही आरोपी को हिरासत में ले लिया। रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान आसपास मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों में भी हलचल देखने को मिली।

पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

एक सक्रिय पुलिस थाने से जुड़े कॉन्स्टेबल की गिरफ्तारी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। एसीबी की कार्रवाई के बाद उद्योग नगर थाना परिसर और पुलिस लाइन में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब कानून लागू करने वाली एजेंसियों से जुड़े कर्मचारी भ्रष्टाचार के आरोपों में पकड़े जाते हैं, तो इससे जनता का विश्वास प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष और त्वरित जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और यह भी देखा जाएगा कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा था या नहीं।

एसीबी की लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई

कोटा क्षेत्र में पिछले 15 दिनों के दौरान एसीबी द्वारा की गई यह तीसरी महत्वपूर्ण ट्रैप कार्रवाई बताई जा रही है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां सरकारी कार्यालयों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैप कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं होता, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देना भी होता है। ऐसी कार्रवाइयां यह संदेश देती हैं कि रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

रिश्वतखोरी के खिलाफ बढ़ती सख्ती

भारत के विभिन्न राज्यों में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां लगातार शिकायतों पर कार्रवाई कर रही हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल निगरानी, शिकायत पोर्टल और विशेष जांच इकाइयों के कारण ऐसे मामलों का खुलासा पहले की तुलना में अधिक तेजी से हो रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रिश्वत मांगना और लेना दोनों ही भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत गंभीर अपराध हैं। दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों का प्रभाव केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे संस्थागत ढांचे की विश्वसनीयता पर असर डालता है।

आगे क्या होगा?

एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए कॉन्स्टेबल से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपी ने पहले भी इसी तरह के मामलों में रिश्वत ली थी या नहीं। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेजों, बातचीत और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।

फिलहाल, कोटा में हुई यह कार्रवाई राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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