KPSC पेपर लीक मामले में BJP के गंभीर आरोप, 30-40 लाख में पेपर बेचने का दावा

KPSC पशु चिकित्सा भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों पर BJP ने 30-40 लाख रुपये में पेपर बेचने का दावा किया। ED-CID जांच और SIT विवाद की पूरी जानकारी।

कर्नाटक KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और रिश्वत के आरोपों पर BJP ने कांग्रेस सरकार को घेरा है। जांच में 11 उम्मीदवारों से जुड़े 1.52 करोड़ रुपये के लेनदेन और प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए हैं।

बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने दावा किया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कथित तौर पर उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया और प्रत्येक उम्मीदवार से 30 से 40 लाख रुपये तक लिए गए। हालांकि, ये आरोप जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

BJP ने लगाए पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोप

BJP नेता संबित पात्रा ने गुरुवार को KPSC भर्ती मामले को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र को कथित तौर पर पैसे लेकर उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया।

BJP के आरोपों के बीच जांच एजेंसियों की ओर से सामने आई जानकारी में भी प्रश्नपत्र लीक और पैसे के लेनदेन की बात सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, तत्कालीन KPSC परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने कथित तौर पर परीक्षा से एक दिन पहले पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने उम्मीदवारों से संपर्क किया और उन्हें चयन का भरोसा दिलाया।

80 लाख रुपये तक मांगे जाने का आरोप

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों से शुरुआत में प्रत्येक सीट के लिए करीब 80 लाख रुपये तक की मांग की गई थी। बाद में कथित तौर पर कई सौदे 30 से 40 लाख रुपये के बीच तय हुए।

CID की जांच में 11 उम्मीदवारों के बारे में जानकारी सामने आई, जिन्होंने कथित तौर पर प्रश्नपत्र तक पहुंच के लिए रकम का भुगतान किया। कुछ रिपोर्टों में अलग-अलग उम्मीदवारों द्वारा 35 लाख से 80 लाख रुपये तक भुगतान किए जाने का उल्लेख है।

ED की जांच के मुताबिक, कथित तौर पर बिचौलिए ने ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को करीब 1.30 करोड़ रुपये पहुंचाए। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पैसे और अन्य लाभ के बदले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।

11 उम्मीदवारों से जुड़े 1.52 करोड़ रुपये के लेनदेन

जांच से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्टों के मुताबिक, 11 उम्मीदवारों से कुल करीब 1.52 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि 11 उम्मीदवारों ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए भुगतान किया था। इनमें कुछ उम्मीदवारों ने काफी अधिक रकम दी थी। एक अन्य उम्मीदवार पर परीक्षा के बाद OMR शीट में कथित हेरफेर के लिए 30 लाख रुपये देने का आरोप है।

जांच एजेंसियां इन पैसों के स्रोत, बैंक खातों और बिचौलियों के माध्यम से हुए लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।

ED जांच में गंगवार और कन्नाले की भूमिका सामने आई

ED ने KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले के खिलाफ कार्रवाई की है। दोनों को मामले से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ED का आरोप है कि गंगवार ने अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए गोपनीय परीक्षा सामग्री तक पहुंच बनाई और प्रश्नपत्र को कन्नाले तक पहुंचाने में मदद की। इसके बाद कन्नाले ने कथित तौर पर उम्मीदवारों से संपर्क कर उन्हें प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया।

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि प्रश्नपत्र में सही उत्तर शामिल थे। इससे उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले तैयारी करने का लाभ मिला।

उम्मीदवारों को रिसॉर्ट और विला में ठहराने का दावा

ED की जांच में कथित पेपर लीक के बाद उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले विशेष तैयारी कराने की बात भी सामने आई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों को बेंगलुरु के आसपास स्थित रिसॉर्ट और विला में ठहराया गया था। वहां उन्हें कथित तौर पर परीक्षा में आने वाले प्रश्नों और उनके उत्तरों की जानकारी दी गई। जांच में करीब 20 उम्मीदवारों को ऐसे ठिकानों पर ले जाने की जानकारी सामने आई है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवस्था उम्मीदवारों को परीक्षा में कथित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी।

जांच में 60 से 80 प्रश्न लीक होने का आरोप

KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा की जांच में कथित तौर पर 60 से 80 प्रश्न पहले ही बाहर पहुंचने की बात सामने आई है।

CID की जांच में यह भी पाया गया कि कुछ शीर्ष रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के उत्तरों में असामान्य समानता थी। एक सांख्यिकीय संभावना परीक्षण के आधार पर जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि 14 शीर्ष रैंक वाले उम्मीदवारों ने कथित तौर पर पहले से उपलब्ध प्रश्नों का लाभ उठाया हो सकता है।

हालांकि, ऐसे निष्कर्षों का अंतिम कानूनी मूल्य अदालत और आगे की जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

डायमंड नेकलेस और संपत्ति की भी जांच

ED और CID की जांच में कथित रिश्वत के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों और कीमती सामान की भी जांच की जा रही है।

जांच रिपोर्टों के अनुसार, एक 22 लाख रुपये की डायमंड नेकलेस समेत कुछ संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन को जांच के दायरे में लिया गया है। ED ने कथित तौर पर गंगवार और उनसे जुड़े लोगों के वित्तीय लेनदेन की जांच की है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित रिश्वत की रकम कहां से आई, किन खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश दिया था

KPSC भर्ती मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सितंबर में विशेष जांच दल यानी SIT गठित कर नए सिरे से जांच के निर्देश दिए थे। अदालत ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़ी कथित अनियमितताओं के साथ अन्य KPSC भर्ती मामलों को भी जांच के दायरे में रखा था।

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, SIT को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया था। हालांकि, कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने SIT के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक

1 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस हिस्से पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें SIT गठित करने और नए सिरे से जांच का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि CID पहले से मामले की जांच कर रही है और जांच लगभग पूरी होने की स्थिति में है। राज्य ने नए सिरे से जांच शुरू करने के हाईकोर्ट के निर्देश पर आपत्ति जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने राज्य सरकार से SIT में शामिल अधिकारियों को लेकर अपनी आपत्तियां सीलबंद कवर में दाखिल करने को कहा है।

KPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

मामले ने कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कुल 400 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी।

जांच में कथित पेपर लीक, उम्मीदवारों से पैसों की मांग, बिचौलियों की भूमिका और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया और चयनित उम्मीदवारों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

राजनीतिक आरोपों के बीच जांच जारी

BJP ने मामले को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और इसमें प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है।

हालांकि, सरकार या कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए सभी राजनीतिक आरोपों और उनके जवाबों को अलग-अलग जांचना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जांच रिकॉर्ड में कुछ अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, जबकि कथित रूप से पैसे देने वाले उम्मीदवारों की कानूनी स्थिति भी जांच और अदालत की प्रक्रिया से तय होगी।

मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और CID तथा ED की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि KPSC भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक किस स्तर तक हुआ, कितने उम्मीदवारों को इसका लाभ मिला और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

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