KPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं पर HD कुमारस्वामी का सवाल, CJI की चुप्पी पर उठाए सवाल

HD कुमारस्वामी ने KPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने NEET प्रदर्शनकारियों से पूछा कि कर्नाटक में भर्ती आरोपों पर आवाज क्यों नहीं उठ रही।

HD कुमारस्वामी ने KPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने NEET प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वालों से पूछा कि कर्नाटक में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर वे चुप क्यों हैं और युवाओं से सवाल उठाने की अपील की।

बेंगलुरु: केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। बेंगलुरु में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पूछा कि KPSC भर्ती में उठ रहे आरोपों पर वे लोग अब कहां हैं, जिन्होंने नई दिल्ली में NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया था। कुमारस्वामी ने कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर युवाओं से सवाल उठाने की अपील की। उन्होंने KPSC के माध्यम से सहायक कार्यकारी अभियंताओं (Assistant Executive Engineers) की नियुक्ति और पशु चिकित्सकों की भर्ती से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया।

NEET प्रदर्शन को लेकर कुमारस्वामी का सवाल

कुमारस्वामी ने कहा कि जो लोग NEET प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हें कर्नाटक में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठाना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले लोग अब KPSC से जुड़े आरोपों पर आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि भर्ती प्रक्रिया में पैसे के बदले सरकारी नौकरी दिए जाने जैसे आरोप सामने आ रहे हैं, तो इस मुद्दे पर युवाओं और नौकरी के अभ्यर्थियों को सवाल करना चाहिए।

कुमारस्वामी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कर्नाटक में KPSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं।

KPSC भर्ती मामले में जांच जारी

KPSC की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों में हाल के महीनों में खासतौर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती मामला सामने आया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सितंबर 2026 में इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया था। SIT की अध्यक्षता वरिष्ठ IPS अधिकारी आलोक कुमार को सौंपी गई है। अदालत ने जांच पूरी करने के लिए 100 दिनों की समयसीमा तय की है।

यह मामला 400 Veterinary Officers की भर्ती से जुड़ा है। आरोपों में प्रश्नपत्र लीक, OMR शीट में कथित हेरफेर और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं जैसे मुद्दे शामिल हैं। अदालत ने पहले से चल रही CID जांच को SIT को सौंपने का निर्देश दिया था।

इस मामले में जांच एजेंसियों ने उम्मीदवारों और कथित बिचौलियों के बीच वित्तीय लेनदेन की भी जांच की है। एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर करीब ₹1.52 करोड़ का मनी ट्रेल सामने आया और परीक्षा के 60 से 80 प्रश्न पहले लीक होने के आरोपों की जांच की गई।

पशु चिकित्सकों की भर्ती में कथित गड़बड़ी

KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती को लेकर पुलिस जांच में कई उम्मीदवारों से पूछताछ की गई है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में ऐसे उम्मीदवारों की पहचान की गई, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए पैसे दिए थे। मामले में कथित तौर पर बिचौलियों और कुछ उम्मीदवारों की भूमिका की जांच चल रही है।

जांच के दौरान OMR शीट में कथित बदलाव और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।

KPSC से संबंधित इस मामले में पहले FIR भी दर्ज की जा चुकी है। FIR में निलंबित KPSC अध्यक्ष एस. शिवशंकरप्पा साहूकर, पूर्व सदस्यों, अधिकारियों और 29 चयनित उम्मीदवारों के खिलाफ कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप शामिल किए गए थे।

सहायक कार्यकारी अभियंताओं की भर्ती भी चर्चा में

कुमारस्वामी ने अपने बयान में KPSC के जरिए Assistant Executive Engineers (AEE) की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया।

इस मामले को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक विवाद पहले से चल रहा है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, AEE भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए हैं और सरकार ने इन आरोपों का राजनीतिक स्तर पर जवाब दिया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विपक्ष के आरोपों के जवाब में कहा था कि सरकार के पास मामले से जुड़े तथ्य और रिकॉर्ड मौजूद हैं।

इससे KPSC की अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हुई है। हालांकि, अलग-अलग भर्ती मामलों में लगाए गए आरोपों की प्रकृति और जांच की स्थिति एक जैसी नहीं है।

हाई कोर्ट ने SIT को दी जांच की जिम्मेदारी

KPSC मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट का सितंबर का आदेश इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अदालत ने पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित की और CID तथा संबंधित पुलिस इकाइयों से मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड SIT को सौंपने को कहा।

अदालत ने जांच को केवल पहले से सामने आए आरोपों तक सीमित नहीं रखने का निर्देश दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में अन्य परीक्षाओं और संभावित अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा सकती है, यदि जांच के दौरान संबंधित साक्ष्य सामने आते हैं।

सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

KPSC विवाद अब केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से आरोपों का जवाब दिया गया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हाई कोर्ट द्वारा SIT प्रमुख के रूप में एक अधिकारी का नाम तय किए जाने पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि जांच दल में अधिकारियों की नियुक्ति कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है। वहीं, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में आलोक कुमार की अध्यक्षता में SIT गठित करने का निर्देश दिया।

युवाओं से सवाल उठाने की अपील

कुमारस्वामी ने अपने बयान में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को सीधे युवाओं और नौकरी के अभ्यर्थियों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ सवाल उठाने चाहिए।

उनका आरोप है कि यदि सरकारी नौकरियों में पैसे के बदले नियुक्ति जैसे मामले सामने आते हैं, तो इससे योग्यता के आधार पर नौकरी हासिल करने की कोशिश कर रहे अभ्यर्थियों पर सीधा असर पड़ता है।

हालांकि, KPSC से जुड़े विभिन्न आरोपों पर जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणामों पर निर्भर करेगा। फिलहाल हाई कोर्ट द्वारा गठित SIT को मामले की आगे जांच करनी है।

KPSC विवाद का व्यापक असर

कर्नाटक में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि KPSC राज्य में विभिन्न सरकारी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है। भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, OMR हेरफेर या पैसे के लेनदेन जैसे आरोप अभ्यर्थियों के भरोसे और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

ऐसे में कुमारस्वामी का बयान KPSC भर्ती विवाद को राजनीतिक बहस के साथ-साथ युवाओं और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों के मुद्दे के रूप में भी सामने लाता है। दूसरी ओर, चल रही SIT और अन्य जांचों के निष्कर्ष यह निर्धारित करेंगे कि सामने आए आरोपों में कौन-कौन से दावे जांच में प्रमाणित होते हैं।

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