कर्नाटक में विधान परिषद की 7 सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। चुनाव परिणाम में सत्तारूढ़ Indian National Congress (कांग्रेस) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि Bharatiya Janata Party (भाजपा) के 2 उम्मीदवार विजयी रहे।
Karnataka Legislative Council Election Results 2026: कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित करते हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। सात सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस के पांच उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो प्रत्याशी विजयी रहे। जनता दल (सेक्युलर) [JDS] को इस चुनाव में कोई सीट नहीं मिली।
यह परिणाम राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और विधानसभा में दलों की ताकत को दर्शाता है। खासतौर पर कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प था।
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में किसे मिली जीत?
चुनाव परिणाम के अनुसार, कांग्रेस के निम्नलिखित उम्मीदवार विजयी रहे:
- बी.के. हरिप्रसाद
- थिप्पन्नप्पा कामकनूर
- पी.वी. मोहन
- शिवन्ना बी.एस. (मालवल्ली)
- विनय कार्तिक
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के दो उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की:
- लिंगराज पाटिल
- रघु आर.
दूसरी ओर, जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा, जिससे पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह जीत?
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कर्नाटक विधानसभा में बहुमत रखने वाली कांग्रेस के लिए यह चुनाव केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती का भी परीक्षण था। पार्टी ने अपने पांचवें उम्मीदवार को मैदान में उतारकर अतिरिक्त सीट जीतने की रणनीति बनाई थी, जिसमें उसे सफलता मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम कांग्रेस की विधायकों पर मजबूत पकड़ और चुनावी प्रबंधन क्षमता को भी दर्शाता है।
विधान परिषद चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए व्यापक तैयारी की थी। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को एक रिसॉर्ट में ठहराया और मतदान प्रक्रिया से पहले उन्हें प्रशिक्षण दिया। बताया गया कि पार्टी के कई विधायक पहली बार निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में उन्हें वरीयता आधारित मतदान (Preferential Voting System) की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई।
इस दौरान वरिष्ठ नेताओं ने मॉक पोलिंग कराकर मतदान की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास भी कराया। यह रणनीति पार्टी के लिए प्रभावी साबित हुई और मतदान के दौरान एकजुटता बनाए रखने में मदद मिली।
7 सीटों पर 8 उम्मीदवार होने से हुआ मुकाबला
कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे। विधानसभा में दलों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस के चार और भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी हालांकि, सबसे दिलचस्प मुकाबला कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक और JDS के उम्मीदवार गोविंदराजू के बीच था। यही सीट चुनाव का केंद्र बिंदु बनी रही।
विधान परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी। जब पहले वरीयता (First Preference) के मतों से स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया, तब दूसरे वरीयता (Second Preference) के वोटों की गणना की गई। कांग्रेस के उम्मीदवार विनय कार्तिक को दूसरे वरीयता के अधिक वोट मिले, जिसके चलते उन्होंने जीत हासिल कर ली। इस नतीजे ने कांग्रेस को कुल पांच सीटों पर विजय दिलाई।









