लेबनान में संघर्ष जारी: आंशिक युद्धविराम पर सहमति के बावजूद इजराइल-हिजबुल्लाह के बीच हमले नहीं रुके

अमेरिका की मध्यस्थता में हुए आंशिक सीजफायर के बावजूद इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान में संघर्ष जारी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं

अमेरिका की मध्यस्थता में हुए आंशिक सीजफायर के बावजूद इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान में संघर्ष जारी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और युद्धविराम उल्लंघन पर चिंता जताई है।

इजराइल/लेबनान वॉर:  मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजराइल और हिजबुल्लाह द्वारा अमेरिकी प्रस्तावित आंशिक युद्धविराम योजना को स्वीकार किए जाने के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। दोनों पक्षों के बीच नई झड़पों और हमलों ने संकेत दिया है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिशें अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की और उन्हें गोलीबारी रोकने पर सहमत कराया। हालांकि जमीन पर हालात इससे अलग दिखाई दिए, जहां युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही सीमा क्षेत्रों में नए हमलों की खबरें सामने आईं।

क्या है आंशिक युद्धविराम योजना?

अमेरिका की ओर से प्रस्तावित योजना का उद्देश्य इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों को सीमित करना था। प्रस्ताव के अनुसार हिजबुल्लाह इजराइली शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले रोकता, जबकि इजराइल लेबनान की राजधानी Beirut पर हवाई हमले नहीं करता।

लेबनान सरकार ने पुष्टि की कि हिजबुल्लाह ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। दूसरी ओर इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी समझौते की पुष्टि की, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से हमले जारी रहे तो इजराइल जवाबी कार्रवाई करेगा।

युद्धविराम के बाद भी जारी रहे हमले

समझौते के बावजूद दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजराइल में रातभर तनावपूर्ण हालात बने रहे।

हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने उत्तरी इजराइल के दो सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात इजराइली सैनिकों और टैंकों को निशाना बनाकर तीन अलग-अलग हमले किए। संगठन के अनुसार इन हमलों में ड्रोन और तोपखाने का इस्तेमाल किया गया।

दूसरी ओर इजराइली सेना ने कहा कि उसने लेबनान की ओर से दागे गए दो प्रोजेक्टाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार इन हमलों में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी दक्षिणी क्षेत्रों में कई इजराइली हमलों की जानकारी दी। कुछ इलाकों में शक्तिशाली विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिससे स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल बन गया।

बेरूत पर हमलों को लेकर विवाद

युद्धविराम से पहले इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में स्थित कथित हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमले किए थे। इजराइल का कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह की ओर से किए गए रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।

हालांकि इन हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम व्यवस्था में लेबनान भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी एक मोर्चे पर युद्धविराम का उल्लंघन होता है तो इसे पूरे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।

ईरान का यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि तेहरान लंबे समय से हिजबुल्लाह का प्रमुख समर्थक रहा है।

ईरान-अमेरिका वार्ता पर भी असर

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लेबनान में जारी इजराइली सैन्य कार्रवाई के कारण तेहरान अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं को निलंबित करने पर विचार कर रहा है।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान और उसके सहयोगी समूह अन्य रणनीतिक मोर्चों को सक्रिय करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें लाल सागर के प्रवेश द्वार के रूप में महत्वपूर्ण माने जाने वाले बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का नाम भी शामिल है।

यदि ऐसा होता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है।

ट्रम्प का दावा- दोनों पक्षों ने गोलीबारी रोकने पर सहमति दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू और हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों से बातचीत की है।

ट्रम्प के अनुसार इजराइल ने बेरूत की ओर बढ़ रही सैन्य टुकड़ियों को वापस बुलाने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले रोकने का आश्वासन दिया है।

हालांकि जमीनी घटनाक्रम से स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है और युद्धविराम पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाया है।

अमेरिका की कूटनीतिक चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस संघर्ष को ईरान के साथ चल रही व्यापक बातचीत से अलग रखना चाहता है। लेकिन ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और लेबनान की स्थिति को किसी भी समझौते से अलग नहीं किया जा सकता।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हाल ही में नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun के साथ बातचीत कर तनाव कम करने का प्रयास किया था।

अमेरिका का लक्ष्य एक चरणबद्ध तनाव-नियंत्रण योजना लागू करना है, जिसके तहत दोनों पक्ष धीरे-धीरे सैन्य गतिविधियां कम करें और व्यापक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ें।

तेल बाजार पर दिखाई दे रहा असर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। निवेशकों को चिंता है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है या समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है।

विशेष चिंता का विषय Strait of Hormuz है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बरकरार

पिछले कुछ महीनों में इजराइल, हिजबुल्लाह, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आंशिक युद्धविराम एक सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों के बीच व्यापक राजनीतिक समझौता आवश्यक होगा।

लेबनान और इजराइल की सीमा पर जारी सैन्य गतिविधियां यह दर्शाती हैं कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। यदि संघर्ष को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।

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