अमेरिका के मैसाचुसेट्स में लिंडसे क्लैंसी के तीन बच्चों की हत्या के मामले में शुक्रवार को मिस्ट्रायल घोषित कर दिया गया। सात दिन की विचार-विमर्श प्रक्रिया के बाद जूरी किसी सर्वसम्मत फैसले पर नहीं पहुंच सकी। अब अभियोजन के सामने आगे की कार्रवाई का विकल्प है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के मैसाचुसेट्स में तीन बच्चों की मौत के मामले में पूर्व नर्स लिंडसे क्लैंसी के खिलाफ चल रहा मुकदमा शुक्रवार को मिस्ट्रायल के साथ समाप्त हो गया। सात दिनों तक विचार-विमर्श करने के बाद जूरी इस सवाल पर सर्वसम्मत निर्णय नहीं ले सकी कि क्लैंसी अपने तीन बच्चों की मौत के लिए कानूनी रूप से आपराधिक रूप से जिम्मेदार थीं या नहीं।
जज विलियम सुलिवन ने जूरी के निर्णय के बाद मिस्ट्रायल घोषित किया। इस फैसले से मामला फिलहाल अनिर्णीत रह गया है। अभियोजन पक्ष के पास अब 36 वर्षीय पूर्व लेबर एंड डिलीवरी नर्स के खिलाफ दोबारा मुकदमा चलाने, आरोपों को वापस लेने या बचाव पक्ष के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के विकल्प हैं।
अदालत में मिस्ट्रायल की घोषणा के समय क्लैंसी, उनके परिवार और जूरी सदस्यों की ओर से कोई खास भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दी।
सात दिन की जूरी विचार-विमर्श के बाद फैसला
मामले में जूरी ने सात दिनों तक विचार-विमर्श किया, लेकिन वह इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी कि क्लैंसी अपने बच्चों की हत्या के समय मानसिक रूप से इतनी सक्षम थीं कि उन्हें आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सके।
शुक्रवार को कार्यवाही में उस समय नाटकीय मोड़ आया, जब जज विलियम सुलिवन ने मिस्ट्रायल घोषित करने का संकेत दिया। इसके बाद उन्होंने अचानक अपना रुख बदला और क्लैंसी के बचाव पक्ष के वकील को मैसाचुसेट्स की सर्वोच्च अदालत में अपील करने का अवसर दिया। हालांकि, आपातकालीन अपील को जल्द ही खारिज कर दिया गया। इसके बाद जज ने मिस्ट्रायल घोषित कर दिया।
तीन बच्चों की मौत का मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, क्लैंसी ने 24 जनवरी 2023 को अपने तीन बच्चों की जान जानबूझकर ली थी। मृत बच्चों की पहचान पांच वर्षीय कोरा, तीन वर्षीय डॉसन और आठ महीने के कैलन क्लैंसी के रूप में हुई।
अभियोजकों का कहना था कि क्लैंसी ने बच्चों की हत्या से पहले अपने पति को घर से बाहर भेजने की योजना बनाई थी। उनके अनुसार, उन्होंने पति को एक बच्चे की दवा और परिवार के लिए खाना लाने के लिए बाहर भेजा था।
अभियोजन का दावा था कि इसके बाद क्लैंसी ने बच्चों का गला व्यायाम में इस्तेमाल होने वाले बैंड से घोंटा।
हालांकि बचाव पक्ष ने इस बात से इनकार नहीं किया कि बच्चों की मौत क्लैंसी के हाथों हुई। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह रहा कि हत्या के समय क्लैंसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं और इसलिए उन्हें आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए।
बचाव पक्ष ने पोस्टपार्टम साइकोसिस को बनाया आधार
क्लैंसी के वकील केविन रेडिंगटन ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल पोस्टपार्टम साइकोसिस से पीड़ित थीं। यह एक दुर्लभ मानसिक स्थिति है, जो बच्चे के जन्म के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और अत्यधिक मानसिक तनाव से जुड़ी हो सकती है।
बचाव पक्ष के अनुसार, कैलन के जन्म के बाद क्लैंसी की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई थी। वह अपनी नौकरी पर वापस लौटने को लेकर बेहद चिंतित थीं, उन्हें नींद नहीं आती थी और वह मानसिक धुंध जैसी स्थिति महसूस करती थीं।
उन्होंने प्रसव के बाद होने वाले मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों के विशेषज्ञों से मदद ली थी और उन्हें कई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दवाएं भी दी गई थीं।
अस्पताल में भी भर्ती हुई थीं क्लैंसी
मुकदमे के दौरान क्लैंसी के परिवार के सदस्यों ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर गवाही दी। उनके पूर्व सास-ससुर के परिवार की सदस्य सुसान क्लैंसी ने उन्हें बेहद देखभाल करने वाली और प्यार करने वाली मां बताया तथा कहा कि वह मदद की मांग कर रही थीं।
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जनवरी 2023 की शुरुआत में क्लैंसी ने अधिक गहन उपचार के लिए खुद को एक मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि, उनका अस्पताल में रहना ज्यादा लंबा नहीं रहा।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के 19 दिन बाद बच्चों की मौत हो गई। घटना मैसाचुसेट्स के समुद्र तटीय शहर डक्सबरी स्थित परिवार के घर के बेसमेंट में हुई थी।
बच्चों की मौत के तुरंत बाद क्लैंसी ने घर की दूसरी मंजिल की खिड़की से छलांग लगाने की कोशिश की। इस घटना में वह कमर से नीचे तक लकवाग्रस्त हो गईं।
अभियोजन पक्ष का तर्क- मानसिक बीमारी के बावजूद नियंत्रण था
अभियोजन पक्ष ने यह स्वीकार किया कि क्लैंसी गंभीर मानसिक बीमारी से गुजर रही थीं। लेकिन उनका कहना था कि वह अपने कार्यों को समझने और उन्हें नियंत्रित करने की क्षमता रखती थीं।
अभियोजन ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्लैंसी ने हत्या से पहले अपने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को कभी यह नहीं बताया था कि उन्हें किसी पुरुष की आवाज सुनाई देती है।
क्लैंसी ने कथित तौर पर बताया था कि एक पुरुष आवाज उन्हें बच्चों की हत्या करने का आदेश दे रही थी। अभियोजन पक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाया और कहा कि इसे उनके पहले के मानसिक स्वास्थ्य उपचार के रिकॉर्ड से समर्थन नहीं मिलता।
मेडिकल विशेषज्ञों के बयान पर टिका मुकदमा
मुकदमे के अंतिम चरण में दोनों पक्षों के मेडिकल विशेषज्ञों के बीच मतभेद प्रमुख मुद्दा बन गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही देने वाले फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक किर्क हेलब्रुन ने कहा कि उन्हें क्लैंसी के आवाज सुनने वाले दावे पर विश्वास नहीं था। उनका मानना था कि बच्चों की हत्या के समय क्लैंसी गंभीर मनोविकृति की स्थिति में नहीं थीं।
हेलब्रुन के अनुसार, क्लैंसी का उद्देश्य बच्चों को अपने बाद संभावित पीड़ा से बचाना हो सकता था, क्योंकि वह खुद भी आत्महत्या करने की योजना बना रही थीं।
इसके विपरीत, बचाव पक्ष के फोरेंसिक मनोचिकित्सक फिलिप रेसनिक ने कहा कि क्लैंसी स्पष्ट रूप से मनोविकृति की स्थिति में थीं और अपने कार्यों पर नियंत्रण नहीं रख रही थीं। उन्होंने उनकी मानसिक स्थिति की तुलना ऐसी अवस्था से की, जिसमें व्यक्ति किसी दूसरे के नियंत्रण में कठपुतली जैसा हो।
रेसनिक ने यह भी संभावना जताई कि क्लैंसी बाइपोलर डिसऑर्डर का अनुभव कर रही थीं।
पति ने बच्चों की मौत के बाद क्लैंसी को माफ किया
मुकदमे की शुरुआत में क्लैंसी के पति पैट्रिक क्लैंसी ने अदालत में उस भयावह स्थिति के बारे में गवाही दी, जिसका सामना उन्हें घर लौटने के बाद करना पड़ा था। अभियोजन पक्ष ने लगभग सात मिनट की आपातकालीन कॉल भी अदालत में सुनाई, जिसमें उन्हें बच्चों के शव मिलने के दौरान सुना जा सकता था।
बाद के साक्षात्कारों में पैट्रिक क्लैंसी ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को माफ कर दिया है। उनका मानना है कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार घटनाएं उनकी पत्नी की गंभीर मानसिक बीमारी से जुड़ी थीं।
अब अभियोजन के सामने क्या विकल्प?
मिस्ट्रायल के बाद लिंडसे क्लैंसी के खिलाफ मामला समाप्त नहीं हुआ है। जूरी के सर्वसम्मत फैसले तक नहीं पहुंचने के कारण अब अभियोजन पक्ष को आगे की रणनीति तय करनी होगी।
अभियोजन दोबारा मुकदमा शुरू कर सकता है, आरोपों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर सकता है या बचाव पक्ष के साथ किसी संभावित समझौते पर बातचीत कर सकता है।
यह मुकदमा एक महीने से अधिक समय तक सार्वजनिक और मीडिया का ध्यान आकर्षित करता रहा। मामले ने विशेष रूप से प्रसव के बाद महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और गंभीर मानसिक बीमारी की स्थिति में आपराधिक जिम्मेदारी जैसे जटिल सवालों को सामने रखा है।
फिलहाल मिस्ट्रायल के कारण तीन बच्चों की मौत से जुड़ा कानूनी विवाद अनसुलझा है। आगे की दिशा अब अभियोजन पक्ष के अगले फैसले और संभावित कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी।










