लखनऊ की पाककला विरासत को मिला यूनेस्को का वैश्विक सम्मान, 'क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी' की लिस्ट में हुआ शामिल

लखनऊ की समृद्ध पाककला विरासत को यूनेस्को ने ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा दिया है। यह सम्मान लखनऊ की तहज़ीब और स्वाद की वैश्विक पहचान है

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो अपने नवाबी अंदाज़ और लज़ीज़ पकवानों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली है।

UNESCO Creative Cities 2025: अवधी तहज़ीब और नवाबी खानपान के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को अब विश्व स्तर पर नई पहचान मिल गई है। यूनेस्को (UNESCO) ने लखनऊ को उसकी समृद्ध पाककला विरासत (Culinary Heritage) के लिए ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी (Creative City of Gastronomy)’ घोषित किया है। 

यह सम्मान विश्व नगर दिवस 2025 (World Cities Day 2025) के अवसर पर प्रदान किया गया, जिससे भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान और सशक्त हुई है।

अवधी खानपान से वैश्विक पहचान तक

लखनऊ का नाम नवाबों की तहज़ीब, आतिथ्य सत्कार और लजीज पकवानों के लिए सदियों से प्रसिद्ध रहा है। कबाब, बिरयानी, चाट, कुल्फी और मिठाइयों के लिए मशहूर यह शहर अब आधिकारिक रूप से विश्व पाककला मानचित्र पर दर्ज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्रे अजोले (Audrey Azoulay) ने शुक्रवार, 31 अक्टूबर को 58 नए शहरों को यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (UCCN) में शामिल करने की घोषणा की। इस सूची में अब 100 से अधिक देशों के कुल 408 शहर शामिल हो चुके हैं।

यूनेस्को का यह नेटवर्क उन शहरों को सम्मानित करता है जो संस्कृति और रचनात्मकता को सतत विकास का प्रमुख आधार बनाते हैं — चाहे वह कला, संगीत, डिजाइन, फिल्म, हस्तशिल्प, साहित्य या पाककला हो।

भारत के लिए गौरव का क्षण

भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स (X)’ पर लिखा, यह भारत के लिए गर्व का क्षण है। लखनऊ की समृद्ध पाककला विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। यूनेस्को द्वारा ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा मिलना लखनऊ की रसोई और संस्कृति दोनों की जीत है। लखनऊ भारत का तीसरा शहर है जिसे पाककला श्रेणी में यह सम्मान मिला है। इससे पहले जयपुर (हस्तशिल्प) और वाराणसी (संगीत) को यूनेस्को की रचनात्मक शहरों की सूची में शामिल किया गया था। अब लखनऊ ने अपनी अवधी व्यंजनों की समृद्ध परंपरा के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है।

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने कहा, रचनात्मक शहर यह साबित करते हैं कि संस्कृति और क्रिएटिव उद्योग केवल परंपरा नहीं, बल्कि विकास के ठोस प्रेरक हैं। ये शहर स्थानीय पहलों को समर्थन देते हैं, निवेश को आकर्षित करते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क’ (UCCN) देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार, सामाजिक एकजुटता तथा सतत विकास को गति देता है।

लखनऊ की तहज़ीब और स्वाद का संगम

लखनऊ की पाककला अपनी नवाबी विरासत और शाही नज़ाकत के लिए प्रसिद्ध है। यहां का खाना सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है। तुंडे कबाबी, गलावटी कबाब, कुलचा-निहारी, शीरमाल, और लखनवी बिरयानी जैसे व्यंजन आज दुनिया भर में भारतीय स्वाद के दूत बन चुके हैं। यूनेस्को की यह मान्यता लखनऊ की उसी अनूठी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है, जिसने शहर को ‘नवाबों का शहर’ और अब ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ बना दिया है।

दुनिया के अन्य शहर भी शामिल

इस वर्ष की सूची में लखनऊ के साथ कई अन्य शहरों को भी सम्मानित किया गया है।

  • संगीत के लिए – किसुमु (केन्या) और न्यू ऑरलियंस (अमेरिका)
  • डिज़ाइन के लिए – रियाद (सऊदी अरब)
  • पाककला के लिए – मातोसिन्होस (पुर्तगाल) और कुएनका (इक्वाडोर)
  • फिल्म के लिए – गीज़ा (मिस्र)
  • साहित्य के लिए – एबरिस्टविथ (ब्रिटेन)

लखनऊ के शामिल होने से भारत की सांस्कृतिक पहचान को और भी वैश्विक स्वरूप मिला है। वर्ष 2004 में स्थापित यह नेटवर्क उन शहरों को जोड़ता है जो रचनात्मकता को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का आधार बनाते हैं। यह सात क्षेत्रों में काम करता है — हस्तशिल्प, डिजाइन, फिल्म, गैस्ट्रोनॉमी, साहित्य, संगीत और मीडिया आर्ट्स। लखनऊ का नाम शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय शहर अब स्थानीय विरासत को वैश्विक ब्रांड में बदलने की दिशा में अग्रसर हैं।

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