संसद में ईरान-यूएस युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने देश को महंगाई और तेल आपूर्ति जोखिम के लिए आगाह किया। विपक्ष ने सरकार पर आर्थिक नीतियों और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल उठाए।
New Delhi: राज्यसभा और लोकसभा में मंगलवार को देश की आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और इसके प्रभावों को लेकर देश को आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध न केवल वैश्विक ऊर्जा संकट को बढ़ा रहा है, बल्कि भारत में महंगाई और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने चेताया कि नागरिकों को आने वाले समय में इन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और यह भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक अंतर मंत्रालयी समूह बनाया है, जो नियमित बैठक कर आयात-निर्यात की बाधाओं का मूल्यांकन करता है। मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय काम कर रहे हैं और उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए अत्यंत चिंता का विषय है।
लोकसभा में विपक्ष का तीखा हमला
वहीं लोकसभा में विपक्ष ने सरकार पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनावों के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रखी जा रही हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही देश को नई आर्थिक वास्तविकताओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों के बीच सरकार की नीतियां आम नागरिकों पर दबाव डाल सकती हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पहले भी प्रतिकूल परिस्थितियों में देश को संभाल चुकी है और इस बार भी सक्षम है। उन्होंने लोकसभा में वित्त विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल नारा नहीं बल्कि सरकार की विचारधारा है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में सिर्फ ‘सिलेंडर संकट’ नहीं बल्कि ‘सरेंडर संकट’ भी है, जहां महत्वपूर्ण निर्णय अमेरिका के प्रभाव में आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से देश को गंभीर नुकसान हो रहा है।
सांसदों की मानवीय पहल
![]()
जम्मू-कश्मीर के बारामूला संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय सांसद अब्दुल रशीद शेख ने लोकसभा में घोषणा की कि वह अपने एक महीने का वेतन ईरान के उस स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए दान करेंगे, जिसमें हाल ही में हुए हमले में 100 से अधिक बच्चियों की जान गई थी। शेख ने कहा कि सरकार को इस समय ईरान के साथ खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने युद्ध की मार झेल रहे आम नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का संदेश दिया।
राज्यसभा में अन्य मुद्दों पर चर्चा
राज्यसभा में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने देशभर में 18,646 जन औषधि केंद्रों के संचालन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये केंद्र लोगों को किफायती दरों पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराते हैं। नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना की शुरुआत 2008 में संप्रग सरकार द्वारा की गई थी, लेकिन वर्ष 2014 तक केवल 80 केंद्र खोले गए थे।
शिक्षा के क्षेत्र में राज्यसभा में चिंता व्यक्त की गई। सांसद सुमित्रा बाल्मीकि ने परीक्षा के दौरान विवाह और अन्य समारोहों में डीजे के लाउड स्पीकर से होने वाले शोर से विद्यार्थियों की पढ़ाई में व्यवधान पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने सरकार से कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
दिल्ली के अग्निकांड
राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बीते सप्ताह हुए अग्निकांड का मुद्दा राज्यसभा में उठाया गया। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण नौ सदस्यों की मौत हुई। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस मामले में शून्यकाल के दौरान भी चर्चा हुई और विपक्ष ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
आर्थिक चुनौतियों का समाधान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत ने इस चुनौती का सामना करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। उन्होंने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने अंतर मंत्रालयी समिति बनाई है, जो लगातार ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक बाधाओं का आकलन कर रही है। मोदी ने कहा कि यह समय सतर्कता, तैयारी और सामूहिक प्रयास का है।
विपक्ष ने पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर केंद्र की आलोचना जारी रखी। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों में पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीति की कमी है। वहीं भाजपा नेताओं ने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश इन परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना करेगा।








