घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 29 रुपये बढ़ने के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये हो गई है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में रसोई गैस कई देशों की तुलना में सस्ती बनी हुई है।
New Delhi: घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद सरकार ने अंतरराष्ट्रीय तुलना के आधार पर अपने फैसले का बचाव किया है। सरकार का दावा है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती लागत और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत में रसोई गैस की कीमतें कई पड़ोसी और विकसित देशों के मुकाबले कम हैं। हालांकि बढ़ी हुई कीमतों ने घरेलू उपभोक्ताओं के बजट पर अतिरिक्त दबाव जरूर बढ़ाया है।
29 रुपये बढ़े घरेलू सिलेंडर के दाम
देशभर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। हालिया बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आम उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों का सामना कर रहे हैं।
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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेष रूप से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है।
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय तुलना से किया बचाव
सरकार का दावा है कि कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी कई देशों के मुकाबले सस्ती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 942 रुपये में उपलब्ध है, जबकि पाकिस्तान में इसकी कीमत करीब 1,046 रुपये, नेपाल में 1,207 रुपये, बांग्लादेश में लगभग 1,225 रुपये और श्रीलंका में 1,241 रुपये तक पहुंच चुकी है।
विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका में समान क्षमता का एलपीजी सिलेंडर लगभग 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया में 1,765 रुपये और कनाडा में 2,411 रुपये तक का बताया गया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत कम बोझ डाला जा रहा है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले परिवारों को अभी भी एलपीजी पर सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। सरकार प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजती है। इस सब्सिडी के बाद पात्र परिवारों के लिए एक सिलेंडर की प्रभावी कीमत लगभग 642 रुपये रह जाती है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। ग्रामीण क्षेत्रों में उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और आगे की चुनौती
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के कारण एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर कोई संकट नहीं है और वैकल्पिक स्रोतों से भी आयात बढ़ाया जा रहा है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत की कीमतें कम दिखाई देती हैं, लेकिन घरेलू आय और खर्च के संदर्भ में 942 रुपये का सिलेंडर अभी भी कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण खर्च है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में हर बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है। ऐसे में सरकार के दावे और आम लोगों की आर्थिक वास्तविकता के बीच संतुलन बनाए रखना आने वाले समय की बड़ी चुनौती बना रहेगा।









