मकर संक्रांति 2026: श्रद्धा, आस्था और दान-पुण्य का पर्व

मकर संक्रांति 2026: श्रद्धा, आस्था और दान-पुण्य का पर्व

इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण का आरंभ कहा जाता है। खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व खिचड़ी के नाम से बड़े उत्साह और धार्मिक भावना के साथ मनाया जाता है।

मकर संक्रांति 2026 कब है

हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 2026 में 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संक्रांति अन्य संक्रांतियों की तुलना में अधिक पुण्यदायी मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन से देवताओं का दिन आरंभ होता है।

शुभ मुहूर्त और पुण्यकाल

मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है।

  • पुण्यकाल: सुबह से सूर्यास्त तक
  • महापुण्यकाल: सूर्य संक्रांति के समय से लगभग दो घंटे तक

मान्यता है कि इस दौरान किया गया दान-पुण्य कई गुना फल देता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

खिचड़ी पर्व का विशेष महत्व

बिहार और पूर्वांचल में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाने की परंपरा है। इस दिन चावल और दाल से बनी खिचड़ी का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है। घर-घर में खिचड़ी, तिल-गुड़ और घी से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं। जरूरतमंदों को भोजन कराना और खिचड़ी का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे अन्न-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

दान-पुण्य का महत्व

मकर संक्रांति पर दान का खास महत्व है। इस दिन किए गए दान से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
इस अवसर पर

  • तिल और गुड़
  • चावल, दाल और खिचड़ी
  • कंबल और गर्म वस्त्र
  • तांबा या पीतल के बर्तन

का दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दिया गया दान सीधे पुण्य फल देता है।

पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद तिल, अक्षत और लाल फूल के साथ सूर्य मंत्र का जाप करें। घर में बनी खिचड़ी या तिल-गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगाकर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें और जरूरतमंदों में दान करें।

धार्मिक और सामाजिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में समानता, दान और सेवा की भावना को भी मजबूत करता है। यही कारण है कि इस दिन दान-पुण्य को विशेष स्थान दिया गया है।

कुल मिलाकर, मकर संक्रांति 2026 आस्था, परंपरा और सामाजिक सद्भाव का पर्व है। सही मुहूर्त में पूजा, स्नान और दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आने की मान्यता है। इसलिए इस पावन दिन को पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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