मंडी में सांप के डसने से मासूम भाई-बहन की मौत पेट दर्द की शिकायत पर परिजनों ने किया उपचार, सांप दिखा तो अस्पताल लेकर भागे

मंडी में सांप के डसने से मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। पेट दर्द समझकर परिजनों ने घर पर उपचार किया, सांप दिखा तो अस्पताल लेकर पहुंचे।
मंडी में सांप के डसने से मासूम भाई-बहन की मौत पेट दर्द की शिकायत पर परिजनों ने किया उपचार, सांप दिखा तो अस्पताल लेकर भागे
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। जहरीले सांप के डसने से मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने पेट दर्द की शिकायत की थी। परिजनों को उस समय सर्पदंश की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने बच्चों की हालत को सामान्य बीमारी समझते हुए घर पर ही उपचार शुरू कर दिया। बाद में जब घर में सांप दिखाई दिया तो परिवार को सर्पदंश की आशंका हुई। इसके बाद दोनों बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सर्पदंश की घटनाओं में समय पर चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर में बच्चों की मौजूदगी से रौनक रहती थी, वहां अचानक मातम छा गया। परिवार के लोगों के लिए सबसे पीड़ादायक बात यह रही कि शुरुआत में उन्हें इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे सांप का डसना हो सकता है। बच्चों ने पेट दर्द की शिकायत की तो परिजनों ने इसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझा और घर पर उपचार करने का प्रयास किया।

इसी दौरान जब परिवार के लोगों को सांप दिखाई दिया तो उन्हें पूरे घटनाक्रम का अंदाजा हुआ। सांप देखने के बाद परिजन घबरा गए और बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए भागे। अस्पताल पहुंचने तक दोनों बच्चों की हालत गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों मासूमों की मौत हो गई। इस घटना ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी सदमे में डाल दिया।

बरसात के मौसम में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में सांपों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने का खतरा बढ़ जाता है। लगातार बारिश के कारण सांप अपने बिलों और प्राकृतिक ठिकानों से बाहर निकलकर सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश करते हैं। ऐसे में घरों के आसपास, लकड़ी के ढेर, घास-झाड़ियों, पत्थरों के बीच और गोशालाओं में इनके छिपे होने की आशंका रहती है। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे में सांप आसानी से दिखाई नहीं देते।

मंडी सहित हिमाचल के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में कई परिवार ऐसे घरों में रहते हैं, जहां घर के आसपास खेत, जंगल, झाड़ियां और प्राकृतिक ढलान होते हैं। बारिश के दौरान इन जगहों से सांपों का निकलकर घरों के नजदीक पहुंचना संभव है। इसलिए विशेषज्ञ आम तौर पर बरसात के दिनों में घर के आसपास सफाई रखने, रात में बाहर निकलते समय रोशनी का इस्तेमाल करने और बच्चों को अंधेरे स्थानों या लकड़ी के ढेर के पास अकेले न जाने देने की सलाह देते हैं।

इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बच्चों की शुरुआती शिकायत पेट दर्द की थी। सर्पदंश के मामले में हर बार शुरुआत में स्पष्ट रूप से यह पता नहीं चलता कि व्यक्ति को सांप ने काटा है। कुछ मामलों में काटने का निशान भी आसानी से नजर नहीं आता। यही वजह है कि अगर किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ती है और आसपास सांप दिखाई देता है या सर्पदंश की आशंका है, तो इसे सामान्य पेट दर्द या कमजोरी मानकर घर पर उपचार करने के बजाय तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी होता है।

सांप के जहर का असर सांप की प्रजाति, काटने की जगह और जहर की मात्रा समेत कई कारकों पर निर्भर कर सकता है। कुछ जहरीले सांपों के काटने पर शरीर में गंभीर न्यूरोलॉजिकल या रक्त संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मरीज को कमजोरी, उल्टी, चक्कर, सूजन, धुंधला दिखाई देना, बोलने या निगलने में परेशानी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए सर्पदंश की आशंका होने पर लक्षणों का इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है।

सर्पदंश के बाद सबसे जरूरी कदम मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है। मरीज को अनावश्यक रूप से चलाने या दौड़ाने से बचाना चाहिए और काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखना चाहिए। घरेलू नुस्खों के भरोसे रहना, घाव पर चीरा लगाना, जहर चूसने की कोशिश करना या झाड़-फूंक में समय गंवाना नुकसानदायक हो सकता है। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दूसरा व्यक्ति भी सर्पदंश का शिकार हो सकता है।

यदि सांप की पहचान सुरक्षित दूरी से संभव हो जाए तो चिकित्सकों को उसके बारे में जानकारी दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए सांप के करीब जाना जरूरी नहीं है। मरीज को प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल पहुंचाना ही सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जहां उपलब्ध हो, सर्पदंश के उपचार के लिए चिकित्सकीय निगरानी और एंटी-स्नेक वेनम जैसी सुविधाएं जरूरी होती हैं।

मंडी की यह घटना बरसात के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा संदेश देती है। छोटे बच्चे अक्सर घर के आसपास खेलते हैं और उन्हें यह पता नहीं होता कि कौन-सी जगह खतरनाक हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को घर के आसपास घास, झाड़ियों और अनावश्यक सामान के ढेर को साफ रखना चाहिए। जमीन पर रखे जूते, कपड़े या अन्य सामान इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांच लेना भी जरूरी है।

गांवों में लकड़ी, घास और निर्माण सामग्री के ढेर लंबे समय तक घर के आसपास पड़े रहते हैं। बारिश के दौरान ऐसे स्थान सांपों के लिए छिपने की जगह बन सकते हैं। इसलिए इन सामानों को हटाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। रात में खेत या घर के बाहर जाने पर टॉर्च का इस्तेमाल करना चाहिए और बिना देखे किसी छेद, झाड़ी या पत्थरों के बीच हाथ नहीं डालना चाहिए।

इस हादसे ने यह भी दिखाया कि किसी गंभीर आपात स्थिति में शुरुआती पहचान कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार को शुरुआत में सर्पदंश की जानकारी होती तो संभव है कि बच्चों को पहले ही चिकित्सा सुविधा मिल जाती। हालांकि किसी व्यक्ति की जान बचने या न बचने के बारे में केवल इस आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि सर्पदंश की गंभीरता कई चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

मासूम भाई-बहन की मौत के बाद परिवार के लोगों के सामने ऐसा दुख है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। दोनों बच्चों का एक साथ चले जाना परिवार के लिए गहरे सदमे का कारण बना है। आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं और परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।

बरसात के दौरान हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर बच्चों को अकेले ऐसे स्थानों पर नहीं भेजना चाहिए जहां सांप या अन्य जहरीले जीव छिप सकते हैं। घर में सांप दिखाई देने पर उसे खुद पकड़ने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित विभाग से सहायता लेना ज्यादा सुरक्षित है।

सबसे जरूरी बात यह है कि सर्पदंश को कभी सामान्य घटना मानकर घर पर उपचार करने में समय नहीं गंवाना चाहिए। अगर सांप के काटने की थोड़ी भी आशंका हो तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। मंडी में दो मासूमों की मौत की यह घटना परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द छोड़ गई है, लेकिन इससे दूसरे परिवारों को बरसात के मौसम में अतिरिक्त सतर्क रहने और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की सीख जरूर मिलती है।

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