तेलंगाना के वारंगल निवासी गडदासु मणिकांत ने जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। उनकी उपलब्धि पर भाजपा नेता एराबेल्ली प्रदीप राव ने सम्मानित किया।
वारंगल: तेलंगाना के वारंगल के युवा मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी गडदासु मणिकांत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है। जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिता में मणिकांत ने एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर न केवल देश बल्कि तेलंगाना और अपने गृह नगर वारंगल (ओरुगल्लू) का भी गौरव बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्य नेता और वारंगल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष एराबेल्ली प्रदीप राव ने उनके प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर उनका सम्मान किया।
यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय खेल प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत का प्रतीक मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की शानदार सफलता
मार्शल आर्ट्स दुनिया के सबसे अनुशासित और कठिन खेलों में से एक माना जाता है। जापान जैसे देश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। गडदासु मणिकांत ने प्रतियोगिता में बेहतरीन तकनीक, मानसिक मजबूती और वर्षों की मेहनत का प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किया। उनकी जीत ने भारत की मार्शल आर्ट्स प्रतिभा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ देश में मार्शल आर्ट्स के प्रति युवाओं की रुचि भी बढ़ाते हैं।
एराबेल्ली प्रदीप राव ने किया सम्मानित
मणिकांत की उपलब्धि के बाद भाजपा नेता और वारंगल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन एराबेल्ली प्रदीप राव उनके मार्शल आर्ट्स अकादमी पहुंचे। उन्होंने मणिकांत को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनकी सफलता पर बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मणिकांत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर वारंगल और पूरे तेलंगाना का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ी युवाओं के लिए प्रेरणा बनते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। प्रदीप राव ने भविष्य में भी हर संभव सहयोग देने का भरोसा व्यक्त किया।
दो दशक की मेहनत का मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
गडदासु मणिकांत पिछले लगभग 20 वर्षों से मार्शल आर्ट्स का नियमित अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने केवल एक या दो नहीं बल्कि मार्शल आर्ट्स की 10 अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। लंबे समय तक लगातार अभ्यास, अनुशासन और समर्पण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनकी सफलता यह साबित करती है कि निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण किसी भी खिलाड़ी को वैश्विक पहचान दिला सकता है।
सैकड़ों बच्चों को दे रहे आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
मणिकांत केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं बल्कि एक समर्पित प्रशिक्षक भी हैं। वे अपनी अकादमी में सैकड़ों बच्चों और युवाओं को आत्मरक्षा तथा मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक फिटनेस विकसित करना भी है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और मणिकांत इस दिशा में लगातार योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार रिकॉर्ड
मणिकांत भारत के 23 राज्यों में आयोजित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। अपने लंबे खेल करियर में उन्होंने 350 से अधिक पुरस्कार और पदक जीते हैं। इतनी बड़ी संख्या में सम्मान प्राप्त करना उनकी निरंतरता, प्रतिभा और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारत के उभरते हुए मार्शल आर्ट्स खिलाड़ियों में विशेष स्थान दिलाया है।
परिवार का भी हुआ सम्मान
सम्मान समारोह के दौरान एराबेल्ली प्रदीप राव ने मणिकांत के माता-पिता को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे परिवार का महत्वपूर्ण योगदान होता है। माता-पिता के सहयोग, त्याग और प्रोत्साहन के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होता। उन्होंने परिवार को बधाई देते हुए मणिकांत के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने मणिकांत
मणिकांत की सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां नई पीढ़ी को खेलों की ओर आकर्षित करती हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मार्शल आर्ट्स केवल एक खेल नहीं बल्कि आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन का भी माध्यम माना जाता है।
भारत में मार्शल आर्ट्स का बढ़ता महत्व
हाल के वर्षों में भारत में मार्शल आर्ट्स के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता से इस खेल को नई पहचान मिल रही है। सरकार और विभिन्न खेल संस्थाएं भी खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित संसाधन और निरंतर सहयोग मिलता रहा, तो भारत भविष्य में मार्शल आर्ट्स की दुनिया में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।









