मणिमहेश में राधाष्टमी पर बर्फ के बीच शाही स्नान: त्रिलोचन महादेव के वंशज निभाएंगे डल झील तोड़ने की परंपरा

मणिमहेश में राधाष्टमी पर बर्फ के बीच शाही स्नान होगा। त्रिलोचन महादेव के वंशज शिव चेले डल झील तोड़ेंगे। स्नान का मुहूर्त 19 सितंबर शाम 3:28 बजे तक रहेगा।
मणिमहेश में राधाष्टमी पर बर्फ के बीच शाही स्नान: त्रिलोचन महादेव के वंशज निभाएंगे डल झील तोड़ने की परंपरा
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक चरण राधाष्टमी के अवसर पर शुरू होने जा रहा है। ऊंचाई वाले मणिमहेश क्षेत्र में ताजा बर्फबारी के बीच श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह बना हुआ है। राधाष्टमी के बड़े न्हौण यानी शाही स्नान से पहले संचूई गांव के शिव चेले मणिमहेश डल झील पहुंचकर सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार झील तोड़ने की रस्म निभाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह रस्म पूरी होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए पवित्र डल झील में शाही स्नान का रास्ता खुलता है।

मणिमहेश यात्रा में संचूई गांव के शिव चेलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इन्हें त्रिलोचन महादेव के वंशज माना जाता है। परंपरा के अनुसार शिव चेले सबसे पहले पवित्र डल झील तक पहुंचते हैं और झील पार कर डल तोड़ने की रस्म पूरी करते हैं। इस धार्मिक प्रक्रिया के बाद ही राधाष्टमी के बड़े स्नान की शुरुआत होती है। इस बार भी शिव चेले अपनी पारंपरिक जिम्मेदारी निभाने के लिए भरमौर से मणिमहेश की ओर रवाना हुए हैं।

ताजा कार्यक्रम के अनुसार 18 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे शिव चेले डल झील पहुंचकर झील तोड़ने की परंपरा निभाएंगे। इसके बाद दोपहर 1 बजे से राधाष्टमी का मुख्य शाही स्नान शुरू होगा। यह स्नान अगले दिन यानी 19 सितंबर की शाम 3:28 बजे तक जारी रहेगा। इसलिए यदि कहीं शाही स्नान का मुहूर्त 2:28 बजे तक बताया जा रहा है तो उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार सही समय 19 सितंबर शाम 3:28 बजे तक है।

इस धार्मिक आयोजन को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर सहित कई क्षेत्रों से श्रद्धालु भरमौर पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधाष्टमी के शाही स्नान में शामिल होने के लिए मणिमहेश की ओर बढ़ रहे हैं। कई स्थानों से छड़ी यात्राएं भी इस दौरान भरमौर और मणिमहेश क्षेत्र की ओर पहुंच रही हैं। छड़ी यात्रा को भी मणिमहेश की धार्मिक परंपराओं का अहम हिस्सा माना जाता है।

इस बार मणिमहेश में मौसम ने श्रद्धालुओं की मुश्किलें भी बढ़ाई हैं। शाही स्नान से ठीक पहले क्षेत्र में मौसम खराब हुआ और डल झील तथा आसपास के ऊंचे इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई। रिपोर्ट के अनुसार डल झील के आसपास करीब तीन इंच तक बर्फ गिरी, जबकि गौरीकुंड तक भी बर्फबारी हुई। खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण यात्रा को कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। मौसम में सुधार के बाद प्रशासन ने यात्रा को दोबारा शुरू किया।

मणिमहेश तक पहुंचने वाला रास्ता आसान नहीं है। करीब 13 किलोमीटर लंबे पथरीले ट्रैक पर बर्फ और बारिश के कारण फिसलन बढ़ने से श्रद्धालुओं के लिए परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से मौसम और ट्रैक की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यात्रा मार्ग पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड के जवानों को भी तैनात रखा गया है, ताकि किसी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

राधाष्टमी के शाही स्नान को मणिमहेश यात्रा का सबसे प्रमुख धार्मिक पड़ाव माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस अवसर पर डल झील में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्ते और बदलते मौसम के बावजूद मणिमहेश पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पहले भरमौर पहुंचते हैं और इसके बाद पैदल यात्रा करते हुए हड़सर, धनछो और आगे के रास्ते से डल झील तक पहुंचते हैं।

संचूई के शिव चेलों द्वारा डल झील तोड़ने की रस्म को देखने के लिए भी श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता रहती है। यह केवल स्नान की शुरुआत से जुड़ी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मणिमहेश यात्रा की पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शिव चेले 18 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे डल झील पहुंचेंगे और इसके बाद परंपरा के अनुसार झील तोड़ने की रस्म पूरी की जाएगी।

जागरण की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि भाद्रपद शुक्ल सप्तमी की अवधि के दौरान शिव चेलों द्वारा डल झील पार करने की परंपरा निभाई जाती है। पंचांग के अनुसार सप्तमी 17 सितंबर सुबह 10:49 बजे शुरू होकर 18 सितंबर दोपहर 1 बजे तक रही। इसके बाद 18 सितंबर दोपहर 1 बजे से राधाष्टमी का मुख्य स्नान काल शुरू हुआ, जो 19 सितंबर शाम 3:28 बजे तक रहेगा।

मणिमहेश यात्रा के इस चरण में धार्मिक आयोजन के साथ-साथ प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। बर्फबारी के कारण रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं और कई जगहों पर पैदल चलना कठिन हो सकता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और यात्रा प्रबंधन समिति के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

राधाष्टमी के शाही स्नान को लेकर भरमौर क्षेत्र में भी काफी चहल-पहल है। अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और छड़ी यात्राओं के कारण धार्मिक माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु शाही स्नान के समय का इंतजार कर रहे हैं और डल झील में पवित्र स्नान के लिए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। मणिमहेश कैलाश के दर्शन और डल झील में स्नान को लेकर लोगों में विशेष आस्था देखने को मिल रही है।

इस बीच प्रशासन मौसम की स्थिति को भी लगातार मॉनिटर कर रहा है। हाल में खराब मौसम के कारण यात्रा रोकने का फैसला भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मौसम और ट्रैक की स्थिति को देखते हुए ही आगे की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है।

मणिमहेश क्षेत्र में हुई बर्फबारी ने यात्रा के धार्मिक वातावरण को और भी अलग रूप दे दिया है। एक तरफ बर्फ से ढका डल झील क्षेत्र और मणिमहेश कैलाश का प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है, वहीं दूसरी तरफ बर्फ और फिसलन के कारण यात्रा में सावधानी की जरूरत भी बढ़ गई है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले यात्रियों को ऊंचाई वाले क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।

राधाष्टमी के इस शाही स्नान के साथ मणिमहेश यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण पूरा होगा। शिव चेलों द्वारा डल झील तोड़ने की रस्म के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए स्नान का क्रम शुरू होता है। इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के इस पवित्र अवसर पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि मौसम की चुनौती के बीच यात्रा कर रहे लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

मणिमहेश यात्रा की यह परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि चंबा और भरमौर क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। संचूई के शिव चेलों की परंपरा, डल झील का शाही स्नान और मणिमहेश कैलाश की यात्रा हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को यहां खींचती है। राधाष्टमी के अवसर पर होने वाला बड़ा न्हौण इसी धार्मिक परंपरा का प्रमुख हिस्सा है।

इस वर्ष भी श्रद्धालु बर्फबारी और खराब मौसम के बीच इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए मणिमहेश पहुंच रहे हैं। 18 सितंबर को शिव चेले डल झील तोड़ने की परंपरा निभाएंगे और इसके बाद दोपहर 1 बजे से शाही स्नान का क्रम शुरू होगा। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार राधाष्टमी का यह स्नान 19 सितंबर शाम 3:28 बजे तक जारी रहेगा।

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