मणिपुर में दो अलग-अलग ड्रग्स विरोधी अभियान, अफीम और संदिग्ध ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

मणिपुर के चुराचांदपुर और सेनापति जिलों में अलग-अलग मादक पदार्थ विरोधी अभियानों के दौरान दो लोगो को गिरफ्तार किया। पुलिस ने अफीम और संदिग्ध ब्राउन शुगर बरामद की।

मणिपुर में सुरक्षा बलों और पुलिस ने दो अलग-अलग मादक पदार्थ विरोधी अभियानों में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अफीम, संदिग्ध ब्राउन शुगर और एक कार बरामद की गई, जबकि मामले की जांच जारी है।

चुराचांदपुर: मणिपुर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस ने दो अलग-अलग जिलों में सफल कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में अफीम और संदिग्ध ब्राउन शुगर बरामद की गई। अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की जांच जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जब्त किए गए मादक पदार्थों का संबंध किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से है या नहीं।

हाल के महीनों में मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। इन ताजा कार्रवाइयों को उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

चुराचांदपुर में घर पर छापेमारी, 13.230 किलोग्राम अफीम बरामद

पहली कार्रवाई 2 अगस्त को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के सांगाईकोट उप-मंडल के टी. खुआंगखाई गांव में की गई। सुरक्षा बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर एक घर पर छापेमारी की, जहां से 43 वर्षीय सेइखोगिन माते को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से लगभग 13.230 किलोग्राम अफीम बरामद हुई। अधिकारियों ने बरामद मादक पदार्थ को जब्त कर लिया और आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों के हवाले कर दिया। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बरामद अफीम स्थानीय स्तर पर तैयार की गई थी या इसे किसी अन्य क्षेत्र से लाकर संग्रहित किया गया था।

सेनापति जिले में नाका चेकिंग के दौरान दूसरी गिरफ्तारी

उसी दिन दूसरी कार्रवाई मणिपुर के सेनापति जिले में की गई। पुलिस ने टी. खुल्लेन नाका चेकपोस्ट पर नियमित वाहन जांच के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका। तलाशी के दौरान पुलिस ने असम के डिब्रूगढ़ निवासी अरुण दत्ता (50) को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक स्विफ्ट डिजायर कार (पंजीकरण संख्या AS-06K1306) तथा आठ साबुनदानीनुमा पैकेट बरामद किए गए, जिनमें लगभग 80 ग्राम संदिग्ध ब्राउन शुगर होने की आशंका है। जब्त किए गए पदार्थ को जांच के लिए फोरेंसिक परीक्षण हेतु भेजा जाएगा, ताकि उसकी वास्तविक प्रकृति और गुणवत्ता की पुष्टि की जा सके।

मादक पदार्थों की तस्करी पर लगातार कार्रवाई

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट होने के कारण यह इलाका कई बार अवैध तस्करी के मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स, केंद्रीय सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से नियमित अभियान चला रही हैं। इन अभियानों के तहत सीमा क्षेत्रों, राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

दोनों मामलों की जांच जारी

अधिकारियों के अनुसार, दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद मादक पदार्थ किस स्रोत से आए थे और इन्हें किस स्थान तक पहुंचाया जाना था।

इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन मामलों का संबंध किसी संगठित तस्करी गिरोह या अंतरराज्यीय नेटवर्क से है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

नशे के खिलाफ सरकार की रणनीति

मणिपुर सरकार और केंद्रीय एजेंसियां पिछले कुछ वर्षों से मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त अभियान चला रही हैं। राज्य सरकार ने नशीले पदार्थों की खेती, उत्पादन, परिवहन और तस्करी पर रोक लगाने के लिए कई विशेष अभियान शुरू किए हैं।

इन अभियानों के तहत अवैध पोस्ता खेती को नष्ट करने, तस्करी मार्गों की पहचान करने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य न केवल तस्करी पर रोक लगाना है, बल्कि युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और संगठित अपराध को बढ़ावा मिलता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी बढ़ाने, अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने से ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

दोनों मामलों में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बरामद मादक पदार्थों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि बरामद पदार्थ प्रतिबंधित श्रेणी के हैं, तो आरोपियों पर मादक पदार्थ एवं मन:प्रभावी पदार्थ (NDPS) कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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