मिजोरम में तीन बड़े ड्रग्स विरोधी अभियान, ₹8 करोड़ से अधिक की हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त

मिजोरम पुलिस ने तीन अलग-अलग मादक पदार्थ विरोधी अभियानो मे 8 करोड़ से अधिक मूल्य की हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त की। चार आरोपियो को गिरफ्तार कर जाँच में जुटी

मिजोरम पुलिस ने तीन अलग-अलग ड्रग्स विरोधी अभियानों में ₹8 करोड़ से अधिक मूल्य की हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त की। कार्रवाई के दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा मामलों में NDPS एक्ट के तहत जांच जारी है।

आइजोल: पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मिजोरम पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में 1 अगस्त को चलाए गए तीन अलग-अलग मादक पदार्थ विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस ने ₹8 करोड़ से अधिक मूल्य की हेरोइन और मेथामफेटामाइन जब्त की। इन कार्रवाइयों में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ मादक पदार्थ एवं मन:प्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है। सभी मामलों में विस्तृत जांच जारी है ताकि पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पहला ऑपरेशन: चाम्फाई में वाहन से हेरोइन बरामद

पहली कार्रवाई चाम्फाई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भर्ती कांस्टेबलों की सहायता से की। पुलिस ने सुबह लगभग 11:30 बजे खानकॉन चेक गेट पर आइजोल की ओर जा रहे एक सूमो वाहन को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन से 10 साबुन के डिब्बों में पैक 118 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹23.6 लाख है। इस मामले में 27 वर्षीय वानलालमुआना, जो म्यांमार के ताहान क्षेत्र के शानम्यो का निवासी बताया गया है, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दूसरा ऑपरेशन: मेथामफेटामाइन की बड़ी खेप पकड़ी गई

उसी दिन दोपहर लगभग 1:30 बजे चाम्फाई स्पेशल टास्क फोर्स ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने चाम्फाई से आइजोल जा रहे एक टाटा ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली। वाहन से 10 बंडलों में पैक 9.796 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की गई। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹7.83 करोड़ बताई गई है। इस मामले में 32 वर्षीय वानलालरुआतसाका, जो चाम्फाई जिले के मेलबुक गांव का निवासी है, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने वाहन को भी जब्त कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

तीसरा ऑपरेशन: ज़ेमाबॉक में हेरोइन के साथ दो गिरफ्तार

तीसरी कार्रवाई स्पेशल नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन की टीम ने ज़ेमाबॉक क्षेत्र में की। पुलिस ने यहां से 20 साबुन के डिब्बों में पैक 241.21 ग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद की। मौके से असम के कछार जिले के रहने वाले दो लोगों—हुसैन अहमद लस्कर (23) और नूर अहमद लस्कर (34)—को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक महिंद्रा बोलेरो पिकअप वाहन भी जब्त किया, जिसका कथित रूप से नशीले पदार्थों के परिवहन में इस्तेमाल किया जा रहा था। दोनों आरोपियों के खिलाफ भी NDPS अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

सीमा मार्गों पर बढ़ी निगरानी

मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय सीमा म्यांमार और बांग्लादेश से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि यह इलाका लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता है। हाल के वर्षों में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा क्षेत्रों, राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ा दी है। आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचनाओं और संयुक्त अभियानों की मदद से तस्करी के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिजोरम की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सतर्कता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

NDPS कानून के तहत होगी कार्रवाई

तीनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ NDPS अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं। बरामद मादक पदार्थों को जांच और फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा ताकि उनकी गुणवत्ता और प्रकृति की पुष्टि की जा सके। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद ड्रग्स किस स्रोत से लाई गई थीं और इन्हें किस स्थान तक पहुंचाया जाना था। यदि जांच में किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

ड्रग्स नेटवर्क पर लगातार सख्ती

मिजोरम पुलिस पिछले कुछ समय से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। पुलिस का कहना है कि राज्य को ड्रग्स ट्रांजिट रूट बनने से रोकना प्राथमिकता है। इसके लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है और खुफिया सूचनाओं के आधार पर नियमित छापेमारी की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य न केवल तस्करों को गिरफ्तार करना है, बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है।

समाज और युवाओं पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती भी है। नशीले पदार्थों का प्रसार युवाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है और इससे अपराध, स्वास्थ्य समस्याओं तथा सामाजिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए ड्रग्स तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई को समाज के हित में महत्वपूर्ण माना जाता है।

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