टीएमसी के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena (UBT)) में टूट की चर्चा तेज हो गई है। खबरों के मुताबिक पार्टी के कुछ बागी सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और संभावना जताई जा रही है कि इनमें से करीब 6 सांसद लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं।
Women Reservation Bill & Delimitation: आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश की राजनीति में महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) को लेकर बड़ी हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि केंद्र सरकार संसद में महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण से जुड़ा बिल दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार के पास इस संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी बहुमत मौजूद है या नहीं।
संसद सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
आगामी मॉनसून सत्र अगले महीने शुरू होने की संभावना है, और इसी के साथ सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुट गए हैं। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे इस सत्र में केंद्र में रह सकते हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को फिर से पेश करने की संभावना पर विचार चल रहा है, हालांकि इसमें कुछ संशोधन भी संभव हैं ताकि सहयोगी दलों को साथ लाया जा सके।
महिला आरक्षण विधेयक लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परिसीमन के बाद ही लोकसभा और विधानसभा सीटों का नया ढांचा तय होगा। सरकार के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि 2029 के चुनावों में बढ़ी हुई सीटों के साथ व्यवस्था लागू करनी है, तो परिसीमन और विधेयक दोनों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना होगा।
राजनीतिक समर्थन और गठबंधन समीकरण
![]()
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की है, जो संविधान संशोधन के लिए आवश्यक होता है। वर्तमान राजनीतिक स्थिति में:
- कुछ विपक्षी दलों के रुख में बदलाव देखने को मिल रहा है
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में अंदरूनी अस्थिरता की खबरें हैं
- वहीं कुछ सहयोगी दलों को मनाने के प्रयास भी जारी हैं
सरकार का मानना है कि यदि कुछ प्रमुख क्षेत्रीय दल समर्थन करते हैं, तो विधेयक को पारित कराना संभव हो सकता है।
DMK की भूमिका और संभावित बदलाव
सूत्रों के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को साथ लाने के लिए विधेयक में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। Dravida Munnetra Kazhagam ने पहले परिसीमन को लेकर चिंता जताई थी कि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर असर पड़ सकता है। पार्टी की मांग है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ अन्याय न हो।
इसी वजह से सरकार बिल के शब्दों और ढांचे में बदलाव पर विचार कर रही है। परिसीमन (Delimitation) को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में चिंता बनी हुई है कि बढ़ती जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राज्य की सीटें घटाई नहीं जाएंगी, लेकिन नए फॉर्मूले पर चर्चा जारी है।









