ब्रिटेन का 100 साल पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी संकट में: लीज खत्म होने के बाद बंद होने का खतरा

ब्रिटेन का ऐतिहासिक भारतीय रेस्तरां Veeraswamy बंद होने के खतरे में है क्योंकि क्राउन एस्टेट ने लीज रिन्यू करने से इनकार कर दिया है। इमारत में बदलाव की योजना

ब्रिटेन का ऐतिहासिक भारतीय रेस्तरां Veeraswamy बंद होने के खतरे में है क्योंकि क्राउन एस्टेट ने लीज रिन्यू करने से इनकार कर दिया है। इमारत में बदलाव की योजना के चलते मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।

लंदन: ब्रिटेन का सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी (Veeraswamy) अब अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहा है। लगभग 100 साल पुरानी इस प्रतिष्ठित डाइनिंग जगह पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि इसकी मौजूदा इमारत की लीज जून 2025 में समाप्त हो चुकी है और इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया है। अब यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है, जहां रेस्तरां की मालिक कंपनी अपने ऐतिहासिक अस्तित्व को बचाने की कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

इमारत मालिक क्राउन एस्टेट का क्या है कहना?

जिस इमारत में वीरास्वामी रेस्तरां चल रहा है, वह क्राउन एस्टेट के स्वामित्व में है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सार्वजनिक संपत्ति संस्था है, जो औपचारिक रूप से राजा या रानी के नाम पर संचालित होती है।

संस्था का कहना है कि वह इमारत में बड़े पैमाने पर बदलाव और पुनर्विकास (redevelopment) करना चाहती है। योजना के तहत ऑफिस स्पेस को नया रूप देकर अधिक आधुनिक और लाभदायक बनाया जाएगा।

क्राउन एस्टेट के अनुसार, इसी वजह से मौजूदा लीज को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। प्रस्तावित बदलावों में ऑफिस एंट्री और रेस्तरां क्षेत्र के बीच संरचनात्मक परिवर्तन शामिल हैं, जिससे एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जा सके और संपत्ति की व्यावसायिक क्षमता बढ़ाई जा सके।

अदालत में पहुंचा मामला, 5 दिन की सुनवाई शुरू

वीरास्वामी की मूल कंपनी MW Eat ने क्राउन एस्टेट के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। यह मामला सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में 29 जून से पांच दिनों की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

कंपनी का कहना है कि प्रस्तावित निर्माण कार्य रेस्तरां को पूरी तरह हटाए बिना भी किया जा सकता है, इसलिए लीज समाप्त करना आवश्यक नहीं है। दूसरी ओर, क्राउन एस्टेट का तर्क है कि पुनर्विकास परियोजना के लिए पूरी इमारत का पुनर्गठन जरूरी है।

1926 से चल रही ऐतिहासिक पहचान

वीरास्वामी की स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी। पिछले लगभग एक सदी से यह रेस्तरां ब्रिटेन में भारतीय व्यंजनों का सबसे प्रतिष्ठित नाम माना जाता है। यह सिर्फ एक रेस्तरां नहीं, बल्कि ब्रिटेन में भारतीय भोजन के इतिहास और सांस्कृतिक प्रभाव का प्रतीक भी रहा है। यहां समय-समय पर कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भोजन कर चुकी हैं, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई।

विश्व प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी

अपने लंबे इतिहास के दौरान वीरास्वामी ने कई प्रतिष्ठित मेहमानों की मेजबानी की है। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, अभिनेता चार्ली चैपलिन, मार्लन ब्रैंडो और लॉरेंस ओलिवियर जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने भी यहां भोजन किया था। यह तथ्य इस रेस्तरां को ब्रिटिश इतिहास और भारतीय भोजन संस्कृति के बीच एक अनोखा पुल बनाता है।

ब्रिटेन का 100 साल पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी संकट में: लीज खत्म होने के बाद बंद होने का खतरा

मिशेलिन स्टार और वैश्विक पहचान

वीरास्वामी को वर्ष 2016 में प्रतिष्ठित मिशेलिन स्टार से सम्मानित किया गया था, जो दुनिया के सबसे बड़े रेस्तरां सम्मान में से एक माना जाता है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यह रेस्तरां केवल ऐतिहासिक नहीं बल्कि आधुनिक समय में भी उच्च गुणवत्ता वाले भोजन और सेवा के लिए जाना जाता है।

दिलचस्प ऐतिहासिक कहानियां और परंपराएं

वीरास्वामी से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां भी मशहूर हैं। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की परंपरा को लोकप्रिय बनाने में इस रेस्तरां की भूमिका रही है।

रेस्तरां के इतिहास के अनुसार, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वे यहां भोजन करना पसंद करते थे। उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक बैरल भी यहां रखवाया था ताकि वह करी के साथ परोसी जा सके। ये कहानियां इसे केवल एक रेस्तरां नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में भी स्थापित करती हैं।

युद्ध और संकटों से बचा, लेकिन अब कानूनी चुनौती सामने

वीरास्वामी ने अपने लंबे इतिहास में कई कठिन दौर देखे हैं। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए ब्लिट्ज (जर्मन बमबारी) से भी सुरक्षित रहा। रेस्तरां ने समय-समय पर आर्थिक मंदी, बदलते बाजार और प्रतिस्पर्धा का सामना किया, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती कानूनी है—जिसमें इसका अस्तित्व दांव पर लगा है।

पुनर्विकास योजना और विवाद

क्राउन एस्टेट का कहना है कि 2023 में आई बाढ़ के बाद इमारत की ऊपरी मंजिलों पर स्थित ऑफिस खाली पड़े हैं, जिनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इन्हें पुनर्विकसित करके आधुनिक व्यावसायिक स्पेस में बदला जाएगा। योजना के तहत रेस्तरां और ऑफिस के बीच संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे, जिससे संपत्ति का मूल्य और किराया दोनों बढ़ सके।

लेकिन रेस्तरां मालिकों का कहना है कि यह बदलाव बिना उन्हें हटाए भी किया जा सकता है। उनका तर्क है कि रेस्तरां को हटाने की जरूरत नहीं है और यह फैसला ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है।

स्थानांतरण पर भारी खर्च का दावा

MW Eat कंपनी का कहना है कि अगर उन्हें यह स्थान छोड़ना पड़ा, तो यह सिर्फ शिफ्टिंग का मामला नहीं होगा। उन्हें लंदन के किसी प्रीमियम इलाके में नई जगह ढूंढनी होगी और उसे उसी स्तर का प्रतिष्ठित रेस्तरां बनाने के लिए तैयार करना होगा। इस प्रक्रिया में रसोई, इंटीरियर, लाइसेंस, स्टाफ व्यवस्था और कई अन्य खर्च शामिल होंगे। साथ ही, बंद रहने की अवधि में आय का नुकसान भी होगा।

कंपनी का अनुमान है कि कुल लागत लगभग 50 लाख पाउंड (करीब 57–58 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि क्राउन एस्टेट द्वारा दिया गया मुआवजा इस खर्च का बहुत छोटा हिस्सा है।

Leave a comment