मजबूरी या रणनीति! पश्चिमी नेताओं की चीन यात्राओं में बढ़ा रुझान, अमेरिका पर भरोसा कम

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेता चीन दौरे पर। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और टैरिफ धमकियों से पश्चिमी देशों में नई रणनीति और आर्थिक-सामरिक बदलाव।

पश्चिमी देशों के नेता अमेरिका पर भरोसा घटने के चलते चीन दौरे पर हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी मजबूत करने के लिए चीन से सीधे संपर्क कर रहे हैं।

World News: हाल के महीनों में पश्चिमी देशों के नेताओं की चीन यात्राओं में तेजी देखी जा रही है। इस सूची में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस, कनाडा, फिनलैंड और आयरलैंड के प्रमुख शामिल हैं। स्टार्मर बुधवार को तीन दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे। इसके अलावा जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी अगले महीने 24 से 27 फरवरी के बीच चीन का दौरा करने वाले हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सिर्फ औपचारिक या आर्थिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसमें एक गहरी राजनीतिक और रणनीतिक वजह छिपी है। यूरोपीय और अन्य पश्चिमी देशों के नेताओं का चीन दौरा एक संकेत है कि वे अमेरिकी नेतृत्व पर भरोसा कम महसूस कर रहे हैं और वैश्विक राजनीतिक संतुलन में बदलाव को देखते हुए नए विकल्प तलाश रहे हैं।

ट्रंप की नीतियों से यूरोप में बढ़ा असंतोष

पश्चिमी देशों के नेताओं की चीन यात्राओं की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और टैरिफ धमकियां मानी जा रही हैं। ट्रंप के आक्रमक रवैये, NATO पर सवाल उठाना, ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग और यूरोपीय गठबंधनों को नजरअंदाज करना यूरोपीय देशों के लिए चिंता का कारण बन गया है।

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ नीति से व्यापार में अनिश्चितता और जोखिम बढ़ गया है। अमेरिका ने यूरोपीय देशों पर 15 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है, जिसका सीधा असर फ्रांस और जर्मनी पर पड़ा है। हाल ही में ट्रंप ने उन आठ यूरोपीय देशों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जो ग्रीनलैंड में अमेरिकी दावों का विरोध कर रहे थे।

ट्रंप की धमकियां

बीते 23 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के मंच से ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका अब यूरोपीय देशों को अपने बाजार और सैन्य सुरक्षा की सुविधा मुफ्त में नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने 'ट्रेड वॉर' को आगे बढ़ाएगा और टैरिफ को अमेरिकी बाजार में प्रवेश की कीमत बताया।

ट्रंप की इस सख्त नीति और टैरिफ धमकियों ने यूरोपीय देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि व्यापार और राजनीतिक संबंधों में अमेरिका पर अब पूर्ण भरोसा नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि कई पश्चिमी देशों के नेता चीन से संबंध सुधारने और व्यापारिक अवसरों को बनाए रखने के लिए सीधे संपर्क कर रहे हैं।

चीन के साथ रिश्ते सुधारने की रणनीति

पश्चिमी देशों के नेताओं की चीन यात्राएं केवल आर्थिक कारणों से नहीं हैं। इनका उद्देश्य चीन के साथ राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना भी है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक राजनीति में अस्थिरता पैदा की है। ऐसे में यूरोपीय देश अब चीन से टकराव की बजाय सीमित और संभले हुए रिश्ते रखना चाहते हैं।

थिंक टैंक एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट का कहना है कि पश्चिमी देश चीन से संतुलित संबंध स्थापित करके वैश्विक स्तर पर अकेले न पड़ें, यह उनकी मुख्य प्राथमिकता बन गई है। चीन भी इसी मौके का फायदा उठाकर पश्चिमी देशों के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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