मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर बवाल, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर बवाल, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। सरकार इसे सुविधाओं के विस्तार का प्रोजेक्ट बता रही है।

New Delhi: काशी की पहचान सिर्फ एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में है। इसी काशी का मणिकर्णिका घाट, जहां जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होती है, अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। घाट के प्रस्तावित पुनर्विकास को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि विकास के नाम पर धार्मिक विरासत से खिलवाड़ किया जा रहा है।

मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे बेस्वाद सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण का उदाहरण बताया है। खरगे का कहना है कि जिस घाट पर सदियों से लोग मोक्ष की कामना लेकर आते हैं, वहां बुलडोजर चलाना आस्था पर चोट है।

X पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इनमें मणिकर्णिका घाट पर कथित ध्वस्तीकरण के दृश्य दिखाए गए हैं। उन्होंने लिखा कि काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है। खरगे ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है मानो हर ऐतिहासिक निशान को हटाकर सिर्फ नई नामपट्टिकाएं लगाने का उद्देश्य हो।

श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि हर साल लाखों लोग अपने जीवन के अंतिम संस्कार के लिए काशी आते हैं। मणिकर्णिका घाट उनके लिए सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार का इरादा इन श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात करने का है। उनका कहना है कि घाट का स्वरूप बदलने से उसकी आत्मा को नुकसान पहुंचेगा।

ऐतिहासिक धरोहर का संदर्भ

खरगे ने याद दिलाया कि मणिकर्णिका घाट की ऐतिहासिक जड़ें गुप्त काल तक जाती हैं। बाद में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। कांग्रेस का आरोप है कि इतनी दुर्लभ धरोहर को नुकसान पहुंचाना सांस्कृतिक अपराध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि भारत की जीवित परंपरा का प्रतीक है।

व्यापारिक हितों का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे प्रधानमंत्री के व्यापारिक मित्रों को फायदा पहुंचाने की मंशा है। खरगे ने आरोप लगाया कि पहले प्राकृतिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपा गया और अब सांस्कृतिक धरोहर की बारी आ गई है।

जनता के सामने रखे दो सवाल

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सीधे जनता से जुड़े दो सवाल रखे हैं। पहला सवाल यह है कि क्या धरोहर को संरक्षित रखते हुए स्वच्छता, जीर्णोद्धार और सुविधाओं का विकास संभव नहीं था। दूसरा सवाल यह है कि सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियों को तोड़कर मलबे में क्यों फेंका गया। क्या उन्हें किसी संग्रहालय में सुरक्षित नहीं रखा जा सकता था।

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की योजना की शुरुआत 7 जुलाई 2023 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य घाट पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 17.56 करोड़ रुपये बताई गई है।

सरकार का विकास मॉडल

योजना के तहत घाट पर विशेष अतिथियों के लिए बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ रैंप, दर्शन क्षेत्र, आम श्रद्धालुओं के लिए बैठने की सुविधा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा घाट पर लकड़ी का एक विशेष प्लाजा बनाने की योजना है, जहां अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे अव्यवस्था खत्म होगी और लोगों को सहूलियत मिलेगी।

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