केंद्र सरकार में जल्द बड़े स्तर पर कैबिनेट फेरबदल की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। अटकलें हैं कि Narendra Modi रविवार (28 जून) या सोमवार (29 जून) को अपने मंत्रिपरिषद में बदलाव कर सकते हैं।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में जल्द ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 28 या 29 जून के आसपास मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है।
यदि ऐसा होता है, तो यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बड़ा कैबिनेट पुनर्गठन होगा, जिसका उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठनात्मक संतुलन स्थापित करना हो सकता है।
मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें क्यों तेज हुईं?
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष संगठनात्मक नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इसके अलावा, 23 जून को प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात ने भी कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं को और गति दी है।
हालांकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच नियमित संवैधानिक मुलाकातें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इन घटनाक्रमों को संभावित मंत्रिमंडलीय बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। अभी तक इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नए चेहरों को मिल सकती है जगह
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, प्रस्तावित फेरबदल में कुछ नए सांसदों और नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव या जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी संभव माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक प्रदर्शन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का नया स्वरूप तैयार कर सकती है। विशेष रूप से उन राज्यों पर ध्यान दिया जा सकता है, जहां आने वाले समय में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं।
चुनावी रणनीति पर भी रहेगी नजर
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कैबिनेट फेरबदल की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब भारतीय जनता पार्टी कई राज्यों में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल कर सरकार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
इसके अलावा, पार्टी संगठन में संभावित बदलावों को देखते हुए कुछ नेताओं को सरकार से हटाकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। हालांकि इस संबंध में भी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद बढ़ीं अटकलें
कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को उस समय और बल मिला, जब केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने 23 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने उसी दिन उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनका मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था।
भारतीय संविधान के अनुसार, यदि कोई मंत्री छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं बनता या उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है और वह दोबारा निर्वाचित या मनोनीत नहीं होता, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है। हालांकि उनके इस्तीफे को लेकर सरकार या भाजपा की ओर से कोई अतिरिक्त राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।
मोदी सरकार 3.0 में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
जॉर्ज कुरियन ने 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। बाद में उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। केरल से आने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता कुरियन लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं और दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में भाजपा के विस्तार के प्रयासों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी नियुक्ति को राज्य में पार्टी की ईसाई समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी माना गया था।









