कनाडा में मोहन भागवत बोले, चरित्र और आचरण से विश्व गुरु बना भारत, महाशक्ति बनने की कोशिश नहीं की

मोहन भागवत ने टोरंटो में कहा कि भारत चरित्र और आचरण से विश्व गुरु बना, महाशक्ति नहीं। कार्यक्रम में कनाडा के 10 प्रांतों से 2,000 लोग पहुंचे।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की सेवा परंपरा और वसुधैव कुटुंबकम् का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत चरित्र और आचरण के कारण विश्व गुरु बना, महाशक्ति नहीं।

टोरंटो: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक परंपरा और वैश्विक भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर शासन करने के बजाय मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी और अपने चरित्र व आचरण के बल पर विश्व गुरु बना। कार्यक्रम में कनाडा के सभी 10 प्रांतों से 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए।

टोरंटो में मोहन भागवत ने दिया वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-मित्रता के साथ विश्व को अपनाएं’ कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम् यानी पूरे विश्व को एक परिवार मानने की भारतीय अवधारणा पर जोर दिया।

कनाडा में मोहन भागवत बोले, चरित्र और आचरण से विश्व गुरु बना भारत, महाशक्ति बनने की कोशिश नहीं की

मोहन भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया के किसी हिस्से से भारत से सहायता मांगी गई, भारत ने मदद से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर भारत ने बिना मांगे भी सहायता का हाथ बढ़ाया है। उनके अनुसार, दूसरों की मदद करना भारत की परंपरा और स्वभाव का हिस्सा रहा है।

महाशक्ति नहीं, सेवा के कारण विश्व गुरु बना भारत

मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय भारत को महाशक्ति कहा जा सकता था, लेकिन उस दौर में भी भारत ने दुनिया पर शासन नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व की सेवा को प्राथमिकता दी।

उन्होंने कहा कि भारत अपने चरित्र और आचरण के कारण ‘विश्वगुरु’ बना, न कि ‘महाशक्ति’ के रूप में। उनके मुताबिक भारत का उदय मानवता को अधिक एकजुट और अधिक स्वतंत्र बनाने की दिशा में देखा जाना चाहिए।

भागवत ने हिंदू समाज की वैश्विक भूमिका के संदर्भ में भी विचार रखे और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।

कनाडा के 10 प्रांतों से पहुंचे 2,000 से ज्यादा लोग

RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान के तहत मोहन भागवत अमेरिका के न्यूयॉर्क के बाद रविवार को कनाडा के टोरंटो पहुंचे। टोरंटो में आयोजित इस कार्यक्रम में कनाडा के सभी 10 प्रांतों से 2,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन Canadian Hindus for Outreach, Relations and Dialogue की ओर से किया गया था। इसे कनाडा के 175 से अधिक संगठनों का समर्थन प्राप्त था।

आयोजन का उद्देश्य हिंदू समुदाय के बीच संवाद और आपसी अपनत्व को मजबूत करना तथा कनाडाई समाज में सकारात्मक और रचनात्मक योगदान को बढ़ावा देना था।

अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद पर जोर

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने हिंदू पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ विभिन्न समुदायों के बीच सम्मान, संवाद और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि विविधता वाले समाज में सभी समुदायों को आपसी सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कनाडाई समाज में हिंदू समुदाय की भूमिका और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी उन्होंने विचार रखे।

कार्यक्रम का मुख्य विचार ‘वसुधैव कुटुंबकम्—संपूर्ण विश्व एक परिवार है’ पर आधारित रहा।

जेसन केनी और कश्मीर सिंह धालीवाल भी हुए शामिल

कार्यक्रम में अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर और कनाडा के पूर्व संघीय कैबिनेट मंत्री जेसन केनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कनाडा के विभिन्न सांस्कृतिक समुदायों के साथ संवाद और कनाडा-भारत संबंधों से जुड़े विषयों में भूमिका निभाई है।

खालसा दीवान सोसाइटी और ऐतिहासिक रास स्ट्रीट गुरुद्वारा का प्रतिनिधित्व करने वाले कश्मीर सिंह धालीवाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी को कनाडा में हिंदू और सिख समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और सहयोग के संदर्भ में देखा गया।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कनाडा जैसे विविधतापूर्ण समाज में अलग-अलग समुदाय आपसी सम्मान और सहयोग की भावना के साथ देश के विकास में सकारात्मक योगदान दें।

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