अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। ‘शक्तिमान’ फेम अभिनेता ने राष्ट्रगान को लेकर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा है कि भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेता और 'शक्तिमान' फेम मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने भारत के राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर अपनी राय जाहिर करते हुए 'जन गण मन' की जगह 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। एक इंटरव्यू में अभिनेता ने कहा कि 'वंदे मातरम' देश की भावना और इतिहास से अधिक गहराई से जुड़ा हुआ है।
मुकेश खन्ना का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। हालांकि, मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है, जबकि 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।
'जन गण मन' को लेकर मुकेश खन्ना ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी IANS को दिए एक इंटरव्यू में मुकेश खन्ना ने दावा किया कि 'जन गण मन' को राष्ट्रगान बनाए जाने के पीछे ऐतिहासिक संदर्भों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे ब्रिटिश शासन के दौर से जोड़ते हुए कहा कि यह गीत तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट के सम्मान में लिखा गया था। अभिनेता ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उन्होंने करीब तीन साल पहले भी 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की बात कही थी। उनके मुताबिक, 'वंदे मातरम' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश की राष्ट्रीय भावना से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ गीत है।
हालांकि, 'जन गण मन' को लेकर मुकेश खन्ना का ऐतिहासिक दावा विवादित है। इतिहासकारों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन गण मन' की रचना की थी और इसे 1911 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया था। इसे ब्रिटिश सम्राट के सम्मान में लिखे जाने की व्याख्या पर लंबे समय से बहस होती रही है।
'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की मांग

मुकेश खन्ना ने 'वंदे मातरम' की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा गीत बताया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि देश में 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान का दर्जा दिया जाए। अभिनेता ने यह भी बताया कि उन्होंने 'वंदे मातरम' का एक लंबा संस्करण रिकॉर्ड किया है। उनके मुताबिक, उन्होंने इस गीत पर काम किया है और चाहते हैं कि इसका ऐसा प्रस्तुतीकरण सामने आए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए।
उनका कहना है कि देश के स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी 'वंदे मातरम' को प्रमुखता मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
'जन गण मन' हटाने की कही बात
मुकेश खन्ना ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के रूप में हटाकर 'वंदे मातरम' को उसकी जगह लाया जाए। उन्होंने कहा कि देश में इस बदलाव की दिशा में जल्द काम होना चाहिए। हालांकि, किसी गीत को राष्ट्रगान से हटाकर दूसरे गीत को राष्ट्रगान का दर्जा देना केवल सार्वजनिक बयान या प्रशासनिक निर्णय का विषय नहीं है। इसके लिए केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के तहत निर्णय की आवश्यकता होगी।
'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' में क्या अंतर है?
भारत में दोनों गीतों का अपना अलग संवैधानिक और ऐतिहासिक महत्व है। 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है, जबकि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है। 'वंदे मातरम' मूल रूप से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं 'जन गण मन' को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया था। दोनों रचनाओं का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय पहचान में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।










