गरीबों पर बुलडोजर चलाने वाले नगर निगम की खुली पोल: 90% गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं, नगर आयुक्त-ट्रैफिक DSP ने जांच का दिया आश्वासन

मुजफ्फरपुर नगर निगम की करीब 90% गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं होने का मामला सामने आया है। नगर आयुक्त और ट्रैफिक DSP ने जांच का आश्वासन दिया।
गरीबों पर बुलडोजर चलाने वाले नगर निगम की खुली पोल: 90% गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं, नगर आयुक्त-ट्रैफिक DSP ने जांच का दिया आश्वासन
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मुजफ्फरपुर में अतिक्रमण हटाने और गरीबों के ठेले-खोमचे पर कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहने वाले नगर निगम की अपनी गाड़ियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नगर निगम की करीब 90 प्रतिशत गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं लगी है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

एक तरफ नगर निगम की टीमें शहर में सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई करती हैं। कई बार गरीब और छोटे दुकानदारों के ठेले, गुमटी या अन्य सामान को हटाने के लिए बुलडोजर और निगम की गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ निगम के वाहनों पर ही नंबर प्लेट नहीं होने की बात सामने आने से लोग सवाल उठा रहे हैं कि नियमों का पालन कराने वाली संस्था खुद अपने वाहनों के मामले में कितनी गंभीर है।

मामला सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों से इस संबंध में सवाल किया गया। नगर आयुक्त ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। वहीं ट्रैफिक डीएसपी ने भी नंबर प्लेट के बिना चल रही नगर निगम की गाड़ियों की स्थिति की जांच कराने की बात कही है।

नंबर प्लेट किसी भी वाहन की पहचान के लिए सबसे जरूरी माध्यमों में से एक है। सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए निर्धारित नियमों के तहत वाहन की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देना जरूरी होता है। ऐसे में यदि किसी सरकारी या नगर निगम के वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन वाहनों का संचालन किस आधार पर किया जा रहा है।

मामले को लेकर लोगों का कहना है कि आम नागरिकों के वाहन में छोटी सी कमी मिलने पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करती है। नंबर प्लेट, हेलमेट, दस्तावेज और अन्य नियमों को लेकर आम लोगों से लगातार नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में सरकारी संस्था की गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं होने की शिकायत सामने आने पर समान नियम लागू करने की मांग उठ रही है।

नगर निगम की गाड़ियां शहर में लगातार अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल होती हैं। इनमें कचरा उठाने वाले वाहन, सफाई से जुड़े वाहन, अतिक्रमण हटाने वाली गाड़ियां, पानी और अन्य जरूरी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहन शामिल हो सकते हैं। इन वाहनों की शहर में रोजाना आवाजाही होती है। ऐसे में उनकी पहचान स्पष्ट होना जरूरी है।

नंबर प्लेट नहीं होने से किसी वाहन की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है। यदि निगम की कोई गाड़ी सड़क पर दुर्घटना कर दे या किसी विवाद में शामिल हो जाए तो वाहन की पहचान में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से नंबर प्लेट का मुद्दा केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।

मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के वाहनों की संख्या और उनके दस्तावेजों की जांच किए जाने की जरूरत है। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कितने वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, कितने वाहनों पर नंबर प्लेट लगी है और किन वाहनों को बिना नंबर प्लेट के सड़क पर चलाया जा रहा है।

ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी यदि जांच की जाती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि नियमों के तहत नगर निगम के वाहनों की स्थिति क्या है। जांच में वाहन के रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी शामिल की जा सकती है।

इस मामले ने नगर निगम की कार्रवाई को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है। शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान निगम की टीमें सड़क किनारे मौजूद छोटे दुकानदारों और गरीब परिवारों के खिलाफ कार्रवाई करती हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब नगर निगम दूसरों से नियमों का पालन कराने की बात करता है तो उसे अपने वाहनों पर भी वही नियम लागू करने चाहिए।

गरीबों और छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई के दौरान नगर निगम की गाड़ियों और मशीनों का इस्तेमाल होने से यह मामला और चर्चा में आ गया है। लोगों का कहना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। सरकारी संस्था हो या आम नागरिक, सड़क पर चलने वाले हर वाहन की पहचान और जरूरी दस्तावेज स्पष्ट होने चाहिए।

स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर अब नगर निगम से जवाबदेही की मांग की जा रही है। लोग जानना चाहते हैं कि यदि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं लगी है तो इतने समय से इन वाहनों की निगरानी क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि वाहनों के रखरखाव और दस्तावेजों की जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभाग की है।

नगर आयुक्त की ओर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद अब लोगों की नजर कार्रवाई पर है। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो निगम को सभी वाहनों के दस्तावेज और नंबर प्लेट दुरुस्त कराने के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट करनी पड़ सकती है।

ट्रैफिक पुलिस की जांच से भी स्थिति साफ होने की उम्मीद है। यदि नंबर प्लेट नहीं होने की शिकायत सही साबित होती है तो संबंधित वाहनों के खिलाफ यातायात नियमों के तहत क्या कार्रवाई हो सकती है, यह भी जांच के बाद स्पष्ट होगा।

शहर में सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। नगर निगम की गाड़ियां सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं और उनका इस्तेमाल आम जनता की सेवाओं के लिए किया जाता है। इसलिए इन वाहनों की पहचान, दस्तावेज और संचालन व्यवस्था स्पष्ट रहना जरूरी है।

नंबर प्लेट को लेकर उठे सवाल के बीच नगर निगम के वाहन बेड़े का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की मांग भी उठ सकती है। इससे यह पता चल सकेगा कि निगम के पास कुल कितने वाहन हैं, उनमें से कितने सड़क पर चल रहे हैं और कितने वाहनों की स्थिति दुरुस्त है।

फिलहाल नगर निगम और ट्रैफिक विभाग की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितने प्रतिशत वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं है और इसके पीछे क्या कारण है।

कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर में गरीबों और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने वाले नगर निगम की गाड़ियों पर ही नंबर प्लेट नहीं होने का मामला सामने आने से उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। करीब 90 प्रतिशत वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने के आरोप के बाद नगर आयुक्त और ट्रैफिक डीएसपी ने जांच का आश्वासन दिया है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि कितने वाहन नियमों के मुताबिक संचालित हो रहे हैं और किन वाहनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया।

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