1 एकड़ में कमाएं 1.50 लाख रुपये! मुजफ्फरपुर में ईख की खेती के लिए किसानों को मिलेगा मुफ्त बीज

मुजफ्फरपुर में ईख विस्तार योजना के तहत किसानों को मुफ्त बीज मिलेगा। उर्वरक और कीटनाशी पर सब्सिडी भी मिलेगी, 1 एकड़ से 1.5 लाख तक मुनाफे का अनुमान है।
1 एकड़ में कमाएं 1.50 लाख रुपये! मुजफ्फरपुर में ईख की खेती के लिए किसानों को मिलेगा मुफ्त बीज
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मुजफ्फरपुर जिले के किसानों के लिए ईख यानी गन्ने की खेती को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। कृषि विभाग ने जिले में ईख की खेती का रकबा बढ़ाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष पहल शुरू की है। ईख विस्तार योजना के तहत किसानों को खेती के लिए निशुल्क बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही उर्वरक और कीटनाशी खरीदने पर भी सरकार की ओर से सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई है। योजना के तहत जिले में 200 एकड़ क्षेत्र में ईख की खेती के लिए किसानों को मुफ्त बीज देने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि एक हेक्टेयर तक क्षेत्र में ईख की खेती करने वाले किसान इस योजना के तहत बीज का लाभ ले सकेंगे और बीज के लिए उन्हें राशि नहीं देनी होगी।

कृषि विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले के सभी 16 प्रखंडों में ईख की रोपाई को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए इच्छुक किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। योजना का उद्देश्य केवल किसानों को बीज उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि जिले में ईख की खेती का क्षेत्र बढ़ाना और किसानों को ऐसी फसल की ओर प्रोत्साहित करना है जिससे उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर आमदनी मिल सके। विभाग की ओर से किसानों को खेती की तकनीक, बीज और खेती में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक सामग्री पर सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

ईख की खेती को लेकर विभाग की ओर से बताया गया है कि किसान मुख्य रूप से दो तरीकों से इसकी खेती कर सकते हैं। पहली विधि में गन्ने के टुकड़ों यानी बीज के रूप में इस्तेमाल होने वाले गन्ने को खेत में लगाया जाता है। इस तरीके में एक एकड़ खेत के लिए करीब 25 क्विंटल बीज की जरूरत पड़ती है। दूसरी विधि नर्सरी में तैयार पौधों से खेती करने की है। इस पद्धति में एक एकड़ क्षेत्र में करीब 10 हजार पौधे लगाए जाते हैं। किसानों को अपनी सुविधा और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार खेती की विधि चुनने का अवसर मिल सकता है।

ईख की रोपाई के लिए अक्टूबर और फरवरी का समय महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग के अनुसार एक बार बीज लगाने के बाद उचित प्रबंधन, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि कार्यों के जरिए दो बार और उत्पादन लिया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि किसान एक बार खेत तैयार कर फसल लगाने के बाद अगली फसल के लिए उपलब्ध संसाधनों और तकनीक के अनुसार उत्पादन चक्र को आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि वास्तविक उत्पादन मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम, सिंचाई, बीज की गुणवत्ता, रोग-कीट नियंत्रण और खेती के प्रबंधन जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

योजना की एक महत्वपूर्ण सुविधा यह है कि किसान निर्धारित नर्सरी से बीज प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए किसानों को बीज की कीमत सीधे चुकाने की जरूरत नहीं होगी। विभाग की ओर से बीज की राशि संबंधित नर्सरी संचालक को दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इससे किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए मुफ्त बीज की सुविधा खेती शुरू करने में मददगार साबित हो सकती है, क्योंकि फसल लगाने के शुरुआती चरण में बीज की लागत किसानों के कुल खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

ईख की खेती में केवल बीज ही नहीं, बल्कि उर्वरक और कीटनाशी का खर्च भी महत्वपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए योजना में उर्वरक और कीटनाशी की खरीद पर भी सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। इससे किसानों की उत्पादन लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि सब्सिडी की वास्तविक राशि, पात्रता और खरीद की प्रक्रिया के संबंध में किसानों को संबंधित कृषि विभाग के अधिकारियों से ताजा जानकारी लेना जरूरी होगा, क्योंकि योजना के नियम और उपलब्धता के अनुसार प्रक्रिया अलग हो सकती है।

कृषि विभाग के सहायक ईख निदेशक अरविंद कुमार रवि के अनुसार ईख की खेती किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है। विभाग के अनुमान के मुताबिक एक एकड़ में करीब 300 से 400 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। लागत निकालने के बाद किसानों को करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक मुनाफा होने की संभावना बताई गई है। हालांकि यह आंकड़ा अनुमानित है और किसान की वास्तविक कमाई गन्ने की उपज, बाजार या मिल को मिलने वाले मूल्य, खेती की लागत और मौसम समेत कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसलिए किसानों को इसे निश्चित आमदनी के बजाय विभाग की ओर से बताए गए संभावित लाभ के रूप में देखना चाहिए।

मुजफ्फरपुर में ईख की खेती को बढ़ावा देने की कोशिश का संबंध जिले में गन्ना आधारित उद्योग को फिर से विस्तार देने की कवायद से भी जुड़ा हुआ है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही जिले के कुछ इलाकों में गन्ने की खेती का क्षेत्र बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है। वर्तमान में जिले के 124 गांवों में करीब 650 किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं और यहां उत्पादित गन्ना सिथवलिया चीनी मिल भेजा जा रहा है।

मोतीपुर चीनी मिल के संभावित पुनरुद्धार के कारण किसानों के बीच भी गन्ने की खेती को लेकर रुचि बढ़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार अभी मीनापुर, कांटी, मोतीपुर और साहेबगंज के कई गांवों में किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। मिल के संचालन की संभावना के साथ मड़वन, पारू, बंदरा, बोचहां और कुढ़नी जैसे प्रखंडों तक खेती का विस्तार करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन इलाकों में पहले बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती थी, लेकिन चीनी मिल बंद होने के बाद इसका रकबा कम हो गया था।

गन्ने की खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध और बीज की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से मीनापुर में दो आधुनिक गन्ना नर्सरी विकसित करने की योजना की जानकारी सामने आई है। दोनों नर्सरियों में हर साल करीब पांच लाख पौधे तैयार किए जाने की योजना है। एक एकड़ में लगभग 10 हजार पौधों की जरूरत के हिसाब से इन नर्सरियों से अतिरिक्त क्षेत्र में गन्ने की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। सरकार की ओर से नर्सरी निर्माण पर अनुदान की व्यवस्था भी की जा रही है।

इससे पहले जुलाई 2026 में भी मुजफ्फरपुर के किसानों के लिए प्रमाणित गन्ना बीज की नर्सरी को लेकर योजना सामने आई थी। उस योजना में सामान्य वर्ग के किसानों को प्रमाणित गन्ना बीज पर 260 रुपये प्रति क्विंटल और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान देने की जानकारी दी गई थी। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज का इस्तेमाल बढ़ाना और गन्ने की उत्पादकता में सुधार करना बताया गया था।

गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों का एक उद्देश्य भविष्य में चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध कराना भी है। यदि स्थानीय स्तर पर गन्ने का उत्पादन बढ़ता है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार या मिल की सुविधा मिलती है तो खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि किसानों के लिए उत्पादन के साथ उचित मूल्य और समय पर भुगतान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए खेती का रकबा बढ़ाने के साथ बाजार व्यवस्था और खरीद की प्रक्रिया भी अहम भूमिका निभाएगी।

मुफ्त बीज की योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी बताया गया है। जिले के सभी 16 प्रखंडों के किसान योजना में आवेदन कर सकते हैं। किसानों को आवेदन से पहले अपनी जमीन, खेती के क्षेत्रफल और योजना से संबंधित पात्रता की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। एक हेक्टेयर तक ईख की खेती करने वाले किसानों को बीज उपलब्ध कराने की बात कही गई है। आवेदन और बीज वितरण से संबंधित किसी भी भ्रम की स्थिति में किसान अपने प्रखंड कृषि कार्यालय या संबंधित ईख विकास अधिकारी से जानकारी ले सकते हैं।

किसानों के लिए यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईख एक ऐसी फसल है जिसमें शुरुआती निवेश और लंबे समय तक फसल प्रबंधन की जरूरत होती है। मुफ्त बीज मिलने से खेती की शुरुआत में खर्च कम हो सकता है, जबकि उर्वरक और कीटनाशी पर सब्सिडी से आगे की लागत में राहत मिल सकती है। लेकिन अच्छी पैदावार के लिए केवल सरकारी सहायता पर्याप्त नहीं होगी। खेत की तैयारी, समय पर रोपाई, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, रोग-कीट प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण बीज का इस्तेमाल भी उत्पादन को प्रभावित करेगा।

कृषि विभाग का लक्ष्य जिले में ईख की खेती का रकबा बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी में वृद्धि करना है। विभाग की ओर से बताए गए अनुमान के अनुसार अच्छी परिस्थितियों में एक एकड़ से 300 से 400 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है और लागत के बाद एक से डेढ़ लाख रुपये तक मुनाफे की संभावना बताई गई है। लेकिन किसानों को खेती शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी, पानी की उपलब्धता, स्थानीय बाजार और गन्ने की खरीद व्यवस्था का भी आकलन करना चाहिए। संभावित आय हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होगी।

कुल मिलाकर मुजफ्फरपुर में ईख की खेती करने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कृषि विभाग की यह पहल शुरुआती लागत कम करने वाली साबित हो सकती है। ईख विस्तार योजना के तहत 200 एकड़ क्षेत्र में खेती के लिए मुफ्त बीज देने की तैयारी है और जिले के सभी 16 प्रखंडों के किसान आवेदन कर सकते हैं। साथ ही उर्वरक और कीटनाशी पर सब्सिडी की सुविधा भी दी जाएगी। दूसरी ओर, मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा शुरू करने और नई गन्ना नर्सरियां विकसित करने की कवायद से जिले में गन्ने की खेती के लिए बाजार और उत्पादन दोनों को मजबूत करने की कोशिश दिखाई दे रही है। किसानों के लिए अब महत्वपूर्ण यह होगा कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करें, पात्रता की जानकारी लें और खेती से जुड़े सभी खर्च तथा संभावित बाजार को समझकर ही फसल का क्षेत्र तय करें।

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