अलवर की पोक्सो अदालत ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर फरीदाबाद ले जाकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी अरबाज को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट और पेश किए गए मजबूत सबूतों के आधार पर आया, जिसमें घटना की पूरी श्रृंखला स्पष्ट रूप से सामने आई।
Rajasthan: अलवर जिले में पोक्सो विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी अरबाज पुत्र तौफीक को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाकर सख्त रुख अपनाया है। विशेष लोक अभियोजक प्रशांत यादव के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 6 जुलाई 2024 को टपूकड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया कि 5 जुलाई की रात आरोपी अपनी 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथी के साथ फरीदाबाद ले गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता का बयान, मेडिकल रिपोर्ट और केस से जुड़े अन्य सबूत अदालत में पेश किए, जिन्हें निर्णायक माना गया। अदालत ने मामले को नाबालिग के खिलाफ जघन्य अपराध मानते हुए अधिकतम सजा दी। फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया, जबकि प्रशासन ने इसे बाल उत्पीड़न मामलों में सख्ती का स्पष्ट संदेश बताया।
किशोरी पर लगातार अत्याचार के ठोस सबूत
अदालत में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपी अरबाज ने नाबालिग को फरीदाबाद में तीन से चार दिन तक बंधक बनाकर जबरन दुष्कर्म किया। पुलिस ने पीड़िता को दस्तयाब कर उसके बयान दर्ज किए, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने पर पुलिस ने अरबाज के खिलाफ पोक्सो और दुष्कर्म की धाराओं में आरोप-पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 18 गवाहों के बयान और 30 दस्तावेज पेश किए, जिन्हें अदालत ने अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त माना।

कठोर सजा का न्यायिक आधार
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी अरबाज को दोषी ठहराया। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पोक्सो अधिनियम का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन उत्पीड़न और शोषण से सुरक्षित रखना है, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में दहशत और जागरूकता दोनों उत्पन्न हो सकें।
विशिष्ट न्यायाधीश हिंमाकनी गौड़ ने कहा कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज की नैतिक संरचना पर भी गंभीर आघात है। इसी आधार पर अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में पीड़िता को 2 लाख रुपये प्रतिकर दिलवाने की अनुशंसा भी की, ताकि उसे मानसिक और सामाजिक पुनर्वास में सहायता मिल सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की यह जिम्मेदारी है कि पीड़िता के जीवन में आई व्यवधानों को कम करने के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
इसके अतिरिक्त, आरोपी पर 47 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने साफ किया कि आर्थिक दंड अपराध की गंभीरता को दर्शाने के साथ-साथ पीड़िता के समर्थन का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यह निर्णय संदेश देता है कि नाबालिगों पर अत्याचार करने वालों के लिए किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।











