उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने के लिए संरक्षित खेती पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में चंपावत जिले में नाबार्ड पॉलीहाउस योजना किसानों के लिए आय बढ़ाने का नया अवसर लेकर आई है। योजना के तहत किसानों को पॉलीहाउस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब तक जिले के 130 किसान इसके लिए आवेदन कर चुके हैं। खास बात यह है कि पॉलीहाउस की कुल लागत का बड़ा हिस्सा योजना के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि किसान को निर्धारित अंशदान ही देना होगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी आधुनिक तरीके से खेती करना आसान हो सकता है।
चंपावत जैसे पर्वतीय जिले में खेती कई तरह की प्राकृतिक चुनौतियों से प्रभावित होती है। बारिश, तापमान में बदलाव, तेज धूप, ठंड और मौसम के अचानक बदलने से खुले खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे में पॉलीहाउस किसानों को नियंत्रित और संरक्षित वातावरण में सब्जियों तथा दूसरी उद्यान फसलों की खेती करने का विकल्प देता है। इसका उद्देश्य केवल पॉलीहाउस का ढांचा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों को ऐसी खेती से जोड़ना है जिसमें सीमित जमीन पर बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फसल हासिल की जा सके।
चंपावत में योजना के तहत 50 वर्ग मीटर, 100 वर्ग मीटर और 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के पॉलीहाउस स्थापित किए जाने हैं। किसानों की जरूरत और निर्धारित मानकों के आधार पर पॉलीहाउस का चयन किया जाएगा। छोटे आकार के पॉलीहाउस उन किसानों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकते हैं, जिनके पास जमीन कम है और जो पारंपरिक खेती के साथ संरक्षित खेती शुरू करना चाहते हैं। वहीं बड़े आकार के पॉलीहाउस के जरिए अधिक क्षेत्र में सब्जी और उद्यान फसलों का उत्पादन किया जा सकता है।
योजना की सबसे बड़ी आकर्षक बात किसानों का सीमित अंशदान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसान को निर्धारित लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा। 50 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस के लिए किसान का अंशदान लगभग 19 हजार रुपये और 100 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस के लिए लगभग 35 हजार रुपये बताया गया है। यानी किसान को पूरी लागत अकेले नहीं उठानी होगी। इसी वजह से योजना छोटे किसानों के लिए भी आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर बन सकती है। हालांकि वास्तविक अंशदान स्वीकृत प्रस्ताव और लागू लागत के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग से मौजूदा शर्तों की पुष्टि करना जरूरी है।
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक किसान ‘अपणी सरकार’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक चंपावत में अब तक 130 किसानों ने आवेदन किया है। बारिश का दौर समाप्त होने के बाद पॉलीहाउस स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे संकेत मिलता है कि योजना को लेकर किसानों में रुचि बनी हुई है और बड़ी संख्या में किसान संरक्षित खेती की ओर बढ़ना चाहते हैं।
पॉलीहाउस खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से फसल को काफी हद तक बचा सकता है। खुले खेत में जहां लगातार बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवा या तापमान में अचानक बदलाव से फसल प्रभावित हो सकती है, वहीं पॉलीहाउस के अंदर फसल के लिए अपेक्षाकृत नियंत्रित वातावरण तैयार किया जा सकता है। इससे खेती का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही किसान ऐसी सब्जियों और उद्यान फसलों पर ध्यान दे सकता है जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
चंपावत जैसे पहाड़ी क्षेत्र में जमीन का आकार अक्सर छोटा और खेत ढलान वाले होते हैं। ऐसे में प्रति इकाई क्षेत्र अधिक उत्पादन हासिल करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। संरक्षित खेती इसी दिशा में उपयोगी तकनीक मानी जाती है। यदि किसान बाजार की मांग के अनुसार फसल का चयन करे, उत्पादन का सही समय तय करे और स्थानीय बाजार के साथ बेहतर विपणन व्यवस्था बनाए तो पॉलीहाउस उसकी कृषि आय बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि इससे होने वाली आय निश्चित नहीं होती और फसल, बाजार भाव, उत्पादन लागत, प्रबंधन तथा बिक्री व्यवस्था जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
नाबार्ड की योजना के जरिए पॉलीहाउस आधारित खेती को बढ़ावा देने का एक उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना भी है। चंपावत में बड़ी संख्या में लोग कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं। यदि छोटे किसान भी आधुनिक तकनीक अपनाकर सब्जी उत्पादन बढ़ाते हैं तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से किसानों को बाजार से जोड़ने और कृषि आधारित आय के नए रास्ते बनाने की संभावना भी बढ़ती है।
पॉलीहाउस में किसान सामान्य तौर पर सब्जियों के अलावा फूल और अन्य उद्यान फसलों की संरक्षित खेती कर सकते हैं। हालांकि किस पॉलीहाउस में कौन सी फसल उगाई जाएगी, यह स्थानीय जलवायु, बाजार की मांग, किसान की तकनीकी क्षमता और विभागीय सलाह पर निर्भर करता है। इसलिए केवल पॉलीहाउस मिल जाना पर्याप्त नहीं है। बेहतर परिणाम के लिए किसान को फसल चयन, बीज, सिंचाई, पोषण, रोग नियंत्रण, तापमान प्रबंधन और बाजार तक पहुंच की जानकारी भी जरूरी होगी।
योजना में आवेदन करने वाले किसानों के लिए अगला चरण पात्रता और प्रस्ताव की जांच से जुड़ा होगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पॉलीहाउस स्थापित किया जाएगा। उपलब्ध सरकारी योजना संबंधी दस्तावेजों में संरक्षित खेती के लिए स्वीकृति के बाद सूचीबद्ध कंपनियों के माध्यम से निर्माण और विभागीय निरीक्षण के बाद सहायता भुगतान जैसी प्रक्रिया का उल्लेख मिलता है। हालांकि चंपावत में वर्तमान नाबार्ड योजना की सटीक प्रक्रिया और लागू शर्तों के लिए किसान को जिला उद्यान विभाग से जानकारी लेना चाहिए।
किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे किसी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट के झांसे में न आएं। ऑनलाइन आवेदन, पात्रता, किसान अंशदान, पॉलीहाउस के आकार और निर्माण से संबंधित सभी जानकारी आधिकारिक विभागीय माध्यम से ही प्राप्त करनी चाहिए। यदि किसी किसान से योजना के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है तो भुगतान करने से पहले संबंधित उद्यान अधिकारी से सत्यापन करना बेहतर होगा।
चंपावत में 130 किसानों का आवेदन करना इस बात का संकेत है कि पहाड़ी क्षेत्र के किसान भी अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। अगर योजना का क्रियान्वयन समय पर होता है और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण तथा बाजार से जोड़ने में मदद मिलती है तो आने वाले समय में पॉलीहाउस खेती जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। खासकर ऐसे किसान, जिनके पास जमीन सीमित है लेकिन वे उच्च मूल्य वाली सब्जियों या उद्यान फसलों की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है।
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को आवेदन करने से पहले अपनी जमीन, सिंचाई सुविधा और खेती की योजना को लेकर पूरी तैयारी करनी चाहिए। पॉलीहाउस में निवेश के बाद नियमित देखभाल की जरूरत होती है। फसल की मांग और बिक्री की व्यवस्था पहले से समझना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्पादन बढ़ने के साथ बाजार तक पहुंच नहीं होने पर किसान को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इसलिए संरक्षित खेती को केवल सब्सिडी या कम लागत वाले ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि पूरी कृषि व्यवसाय योजना के रूप में देखना ज्यादा फायदेमंद होगा।
फिलहाल चंपावत में योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है और 130 किसान आवेदन कर चुके हैं। 50, 100 और 500 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस स्थापित किए जाने की योजना है। 50 वर्ग मीटर के लिए करीब 19 हजार रुपये और 100 वर्ग मीटर के लिए करीब 35 हजार रुपये किसान अंशदान बताया गया है। बारिश का दौर समाप्त होने के बाद स्थापना कार्य आगे बढ़ने की उम्मीद है। योजना के माध्यम से किसानों को मौसम से सुरक्षित खेती, बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादन और आय बढ़ाने का अवसर देने की कोशिश की जा रही है।








