NEET आंदोलन के बीच नागालैंड के युवक ने भेजे ₹68 हजार के 150 पिज्जा, सोशल मीडिया पर छाई मानवीय पहल

जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए नागालैंड के युवक ने Zomato के जरिए करीब ₹68,000 के 150 पिज्जा भेजे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बीच नागालैंड के एक युवक ने लगभग ₹68 हजार के 150 पिज्जा छात्रों के लिए भेजकर एकजुटता दिखाई। सोशल मीडिया पर उनकी इस पहल की जमकर सराहना हो रही है।

कोहिमा: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच नागालैंड के एक युवक की मानवीय पहल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल न हो पाने के बावजूद युवक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए 150 डोमिनोज़ फार्महाउस चीज़ बर्स्ट पिज्जा ऑर्डर किए। इस ऑर्डर की कुल कीमत लगभग ₹67,734 बताई गई है। युवक का यह कदम केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे देशभर से छात्रों के प्रति एकजुटता और संवेदनशीलता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।

कौन हैं यह युवक?

रिपोर्टों के अनुसार, यह युवक नागालैंड का रहने वाला है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @adiespoems नाम से सक्रिय है। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि वे दिल्ली जाकर आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों की स्थिति ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने लिखा कि जब उन्हें यह एहसास हुआ कि कई छात्र अपने घरों से दूर रहकर आंदोलन कर रहे हैं और कई बार उन्हें पर्याप्त भोजन भी नहीं मिल पाता, तब उन्होंने उनकी मदद करने का निर्णय लिया।

लगभग ₹68 हजार का ऑनलाइन ऑर्डर

युवक ने 22 जुलाई की शाम ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए 150 फार्महाउस चीज़ बर्स्ट पिज्जा ऑर्डर किए। साझा किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, पिज्जा की मूल कीमत ₹64,650 थी। टैक्स और डिलीवरी शुल्क जोड़ने के बाद कुल बिल ₹67,734 तक पहुंच गया। इतनी बड़ी संख्या में पिज्जा का ऑर्डर देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने आश्चर्य भी जताया और युवक की उदारता की प्रशंसा भी की।

डिलीवरी पार्टनर को दिया भावुक संदेश

युवक ने बताया कि जब डिलीवरी पार्टनर ने पूछा कि पिज्जा किसे सौंपना है, तो उन्होंने केवल इतना कहा— "कृपया यह खाना उस व्यक्ति को दे दीजिए जिसने अब तक कुछ नहीं खाया है।" रिपोर्ट के अनुसार, यह जवाब सुनकर डिलीवरी पार्टनर कुछ क्षण के लिए चुप हो गया और फिर भावुक होकर बोला कि यह मदद प्रदर्शनकारियों के लिए बहुत मायने रखती है। युवक ने कहा कि यह प्रतिक्रिया उनके लिए बेहद भावुक करने वाली थी और उन्हें महसूस हुआ कि छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बड़ी राहत बन सकती है।

'दिखावा नहीं, प्रेरणा देना चाहता हूं'

अपनी पोस्ट में युवक ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की प्रसिद्धि या प्रशंसा हासिल करना नहीं है। उन्होंने लिखा कि वे चाहते हैं कि लोग समझें कि किसी भी सामाजिक मुद्दे पर समर्थन केवल मौके पर मौजूद रहकर ही नहीं दिया जाता। यदि कोई दूर रहकर भी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करता है, तो वह भी महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे किसी कारणवश किसी आंदोलन या सामाजिक अभियान में शामिल नहीं हो सकते, तब भी जरूरतमंद लोगों की सहायता के अन्य रास्ते तलाश सकते हैं।

सोशल मीडिया पर मिली व्यापक सराहना

यह पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने युवक की सराहना की। कई लोगों ने इसे मानवता और सहानुभूति का उदाहरण बताया। कुछ उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है और यह दिखाती है कि संवेदनशीलता किसी भी दूरी से बड़ी होती है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों को भोजन उपलब्ध कराना व्यावहारिक और उपयोगी सहायता है, जिससे लंबे समय तक धरने पर मौजूद लोगों को राहत मिल सकती है।

आंदोलन के दौरान सहयोग की भूमिका

किसी भी लंबे सार्वजनिक प्रदर्शन या आंदोलन में भोजन, पानी, दवाइयों और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा की गई स्वैच्छिक सहायता आंदोलनकारियों को आवश्यक राहत प्रदान कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों के दौरान मानवीय सहायता सामाजिक सहयोग की सकारात्मक मिसाल होती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ने आसान बनाया सहयोग

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और डिजिटल भुगतान सेवाओं ने आज दूर-दराज़ बैठे लोगों के लिए भी सहायता पहुंचाना आसान बना दिया है। नागालैंड से दिल्ली तक भोजन भेजने की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि तकनीक के माध्यम से लोग देश के किसी भी हिस्से में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचा सकते हैं।

सामाजिक संदेश बना यह कदम

यह पहल केवल पिज्जा भेजने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि किसी भी सामाजिक या मानवीय मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने के कई तरीके हो सकते हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास लोगों को एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी और सहयोग की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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