अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के 22 साल पुराने अंतरिक्ष टेलीस्कोप ‘स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ को बचाने के लिए भेजा गया प्राइवेट स्पेसक्राफ्ट ‘लिंक’ अपना मिशन पूरा नहीं कर सका। करीब तीन महीने पहले लॉन्च किया गया लिंक शुक्रवार को पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने के दौरान नष्ट हो गया।
केप कैनावेरल: NASA के 22 साल पुराने Neil Gehrels Swift Observatory को बचाने के लिए भेजा गया LINK रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट आखिरकार अपना मुख्य मिशन पूरा नहीं कर सका। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और निजी कंपनी Katalyst Space की इस महत्वाकांक्षी कोशिश का उद्देश्य Swift टेलीस्कोप को पकड़कर उसकी कक्षा को ऊंचा करना था, ताकि वह लंबे समय तक अंतरिक्ष से ब्रह्मांड की रहस्यमयी घटनाओं का अध्ययन कर सके।
लेकिन LINK में आई तकनीकी समस्याओं के कारण यह योजना सफल नहीं हो पाई। 25 सितंबर 2026 को LINK ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया और नष्ट हो गया।
करीब 30 मिलियन डॉलर का था मिशन
NASA ने Swift की कक्षा को बढ़ाने के लिए Katalyst Space को करीब 30 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 250 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। LINK को 3 जुलाई 2026 को Northrop Grumman के Pegasus XL रॉकेट से लॉन्च किया गया था। इसे Swift तक पहुंचकर उसे रोबोटिक आर्म्स की मदद से पकड़ना और धीरे-धीरे ज्यादा ऊंची कक्षा में ले जाना था। NASA के अनुसार, यह मिशन अंतरिक्ष में सर्विसिंग तकनीक के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रयोग था।
LINK में क्यों आई तकनीकी खराबी?
लॉन्च के कुछ सप्ताह बाद LINK के attitude control system में गंभीर समस्याएं सामने आईं। अंतरिक्ष यान को अपनी दिशा और स्थिति नियंत्रित करने में परेशानी होने लगी और वह तेजी से घूमने लगा। NASA के मुताबिक, LINK के तीन reaction wheels में से दो काम करना बंद कर चुके थे। इसके अलावा cold-gas thruster system में भी कुछ क्षमता प्रभावित हुई थी।
इंजीनियरों ने कई प्रयासों के जरिए LINK की घूमने की गति कम की और बाद में उसका नियंत्रण काफी हद तक स्थिर किया। लेकिन शुरुआती समस्या के कारण मिशन की मूल योजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं रहा। अगस्त में NASA और Katalyst Space ने आधिकारिक रूप से Swift को पकड़कर उसकी कक्षा बढ़ाने की कोशिश रोक दी।

Swift को बचाने की जरूरत क्यों पड़ी?
Swift Observatory को 2004 में लॉन्च किया गया था। यह अंतरिक्ष दूरबीन खास तौर पर gamma-ray bursts और ब्रह्मांड में होने वाली दूसरी तेज और शक्तिशाली घटनाओं का अध्ययन करने के लिए बनाई गई है। इसकी खासियत यह है कि यह किसी अचानक होने वाली घटना का पता लगाकर बहुत तेजी से अपनी दिशा बदल सकती है और अलग-अलग वैज्ञानिक उपकरणों से उसका अध्ययन कर सकती है।
पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद हर अंतरिक्ष यान को वातावरण के बेहद हल्के खिंचाव का सामना करना पड़ता है। समय के साथ यह drag उपग्रह की ऊंचाई कम करता है। Swift की स्थिति में बढ़ी हुई सौर गतिविधि ने इस atmospheric drag को और बढ़ा दिया, जिससे उसकी कक्षा अनुमान से ज्यादा तेजी से नीचे आने लगी।
असफलता के बावजूद LINK ने किया महत्वपूर्ण काम
मुख्य मिशन भले ही पूरा नहीं हुआ, लेकिन LINK को पूरी तरह बेकार नहीं माना जा रहा है। NASA और Katalyst ने इसके बाद मिशन को एक तकनीकी प्रदर्शन में बदल दिया। सितंबर में LINK ने अपनी रोबोटिक क्षमताओं और अंतरिक्ष में नजदीकी संचालन से जुड़े कई परीक्षण किए। NASA के अनुसार, LINK Swift की कक्षा के करीब 12 से 15 किलोमीटर तक पहुंच गया था।
इस दौरान अंतरिक्ष यान ने अपनी तीनों रोबोटिक भुजाओं को भी तैनात किया और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का परीक्षण किया। इन गतिविधियों से भविष्य में दूसरे उपग्रहों की कक्षा बदलने या अंतरिक्ष में उनकी सर्विसिंग करने वाले मिशनों के लिए उपयोगी डेटा मिला। Katalyst Space ने बताया कि LINK ने करीब 85 दिनों तक अंतरिक्ष में काम किया और इस दौरान हासिल हुआ फ्लाइट डेटा भविष्य की रोबोटिक सर्विसिंग तकनीकों के विकास में मदद करेगा।












