NCPI क्या है? TMC के बागी सांसदों के विलय के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) क्या है? TMC के बागी सांसदों के विलय के दावे के बाद पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गई है। जानें पूरा

Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) में बगावत के बाद अचानक चर्चा में आई NCPI का पूरा नाम Nationalist Citizens' Party of India है

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के एक समूह ने खुद को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जोड़ने का दावा किया है। इस घटनाक्रम के बाद एक अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है और लोग इसके इतिहास, राजनीतिक आधार और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानना चाहते हैं।

हालांकि, संसदीय मान्यता, दल-बदल कानून और किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक स्थिति से जुड़े अंतिम निर्णय संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के अधीन होते हैं। ऐसे में बागी सांसदों के दावों और संभावित राजनीतिक प्रभावों पर सभी की नजर बनी हुई है।

क्या है NCPI?

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर त्रिपुरा और बंगाली भाषी समुदायों के बीच माना जाता है। पार्टी ने सीमित स्तर पर चुनावी राजनीति में भागीदारी की है, लेकिन अब तक राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर कोई बड़ी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर सकी है।

पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अपेक्षाकृत छोटा है और अब तक इसका संसद या किसी राज्य विधानसभा में प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं रहा है। हालांकि, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने इसे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया है।

TMC के बागी सांसदों के दावे से बढ़ी चर्चा

NCPI क्या है? TMC के बागी सांसदों के विलय के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों के एक बागी समूह ने अलग राजनीतिक पहचान बनाने और NCPI के साथ विलय का दावा किया। इस समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की मांग भी की है। यदि संसदीय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इन दावों को मान्यता मिलती है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय गठबंधन समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और संसदीय प्राधिकरणों द्वारा तय किए जाएंगे।

क्या NDA की बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है NCPI?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का विलय औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है और वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन जारी रखते हैं, तो संसद में NCPI का आकार तेजी से बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पार्टी, सांसदों की संख्या के आधार पर, NDA की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल हो सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह संसदीय मान्यता, दल-बदल कानून और संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं के परिणामों पर निर्भर करेगा।

NCPI ने वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, पार्टी को चुनाव में कोई सीट नहीं मिली। इसके बावजूद उसने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास जारी रखा। पार्टी का पंजीकरण पश्चिम बंगाल के हावड़ा क्षेत्र से भी जुड़ा बताया जाता है और यह समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता दिखाती रही है।

क्या है पार्टी का चुनाव चिह्न?

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, NCPI एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इस कारण इसके पास कोई स्थायी या आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं है। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान निर्वाचन आयोग ने पार्टी को अस्थायी रूप से "सात किरणों वाली पेन की निब" (Seven-Stroke Ink Pen Nib) का चुनाव चिह्न आवंटित किया था। गैर-मान्यता प्राप्त दलों को चुनाव के दौरान उपलब्धता के आधार पर अस्थायी चुनाव चिह्न दिए जाते हैं।

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