Success Story: तीसरे प्रयास में Utkarsh Singh ने क्रैक किया NDA, पिता से मिली देश सेवा की प्रेरणा

दो असफलताओं के बाद आजमगढ़ के उत्कर्ष सिंह ने तीसरे प्रयास में NDA परीक्षा पास कर AIR 257 हासिल की। फौजी पिता से मिली प्रेरणा बनी सफलता की वजह।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के उत्कर्ष सिंह ने लगातार दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में NDA परीक्षा पास की। फौजी पिता से मिली प्रेरणा और सही रणनीति के दम पर उन्होंने ऑल इंडिया 257वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा किया।

NDA Success Story: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले उत्कर्ष सिंह की कहानी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। दो बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में NDA परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उनकी यात्रा सेना में शामिल होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

फौजी पिता से मिली प्रेरणा, बचपन से तय था लक्ष्य

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के एक छोटे से गांव में रहने वाले उत्कर्ष सिंह बचपन से ही सेना के माहौल में पले-बढ़े। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं और उन्हें वर्दी में देखकर ही उत्कर्ष ने तय कर लिया था कि वह भी देश की सेवा करेंगे। यही सपना उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। उनका मानना था कि सेना में अधिकारी बनने के लिए केवल सपना देखना काफी नहीं, बल्कि लगातार मेहनत करना भी जरूरी है।

पढ़ाई के दौरान भी उत्कर्ष ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 94 प्रतिशत और 12वीं बोर्ड में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। विज्ञान वर्ग (PCM) चुनने के पीछे भी उनका उद्देश्य NDA परीक्षा की मजबूत तैयारी करना था। स्कूल में उनकी पहचान मेधावी छात्रों में होती थी और वे शुरुआत से ही अनुशासित दिनचर्या का पालन करते थे।

दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में मिली सफलता

उत्कर्ष का NDA तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पहले प्रयास में बोर्ड परीक्षाओं के कारण उनकी तैयारी पूरी तरह नहीं हो सकी। दूसरे प्रयास में उन्होंने लिखित परीक्षा तो बेहतर की, लेकिन SSB इंटरव्यू में अंतिम चरण तक पहुंचने के बाद चयन नहीं हो पाया। इस असफलता ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी समझने का अवसर बनाया।

उन्होंने SSB इंटरव्यू की तैयारी नए तरीके से शुरू की, अपने आत्मविश्वास पर काम किया और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास किया। तीसरे प्रयास के दौरान एक छोटी सी गलती ने उनकी योजना बदल दी। वह भारतीय सेना में जाना चाहते थे, लेकिन आवेदन पत्र में प्रेफरेंस भरते समय हुई त्रुटि के कारण उन्हें नेवी SSB का मौका मिला। उन्होंने इसे चुनौती की तरह स्वीकार किया और पूरी तैयारी के साथ इंटरव्यू दिया। आखिरकार उनका चयन हुआ और उन्होंने NDA-154 परीक्षा में ऑल इंडिया 257वीं रैंक हासिल की। यह पल उनके परिवार, खासकर उनके पिता के लिए गर्व का क्षण बन गया।

स्मार्ट तैयारी बनी सफलता की सबसे बड़ी वजह

उत्कर्ष सिंह का मानना है कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि सही रणनीति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी पढ़ाई को व्यवस्थित किया। सुबह के समय गणित की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया, कठिन विषयों को समझने के लिए ऑनलाइन शैक्षणिक वीडियो की मदद ली और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का नियमित अभ्यास किया।

उन्होंने छोटे और उपयोगी नोट्स तैयार किए, जरूरी बिंदुओं को हाइलाइट किया और रिवीजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। GAT पेपर के लिए उन्होंने अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों पर अतिरिक्त समय दिया। उनकी तैयारी का सबसे बड़ा आधार निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास था।

आज उत्कर्ष सिंह की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो NDA या अन्य रक्षा सेवाओं की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि असफलता सफलता की राह में आने वाला एक पड़ाव भर है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार की जाए और गलतियों से सीखने का साहस हो, तो तीसरा प्रयास भी जिंदगी बदल सकता है।

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