जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन ने एक नया इतिहास रच दिया। 26 जुलाई 2026 की तारीख इस आंदोलन के लिए हमेशा याद रखी जाएगी। जब भी किसी आंदोलन का इतिहास लिखा जाता है, उसमें सिर्फ नारे और प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि वे चेहरे भी शामिल होते हैं, जो उसकी पहचान बन जाते हैं।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई 2026 में हुए छात्र आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और युवाओं की भागीदारी को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी। इस आंदोलन के दौरान कई चेहरे सामने आए, लेकिन छात्र नेता नेहा बोरा ने अपने भाषणों, सक्रियता और लंबे विरोध प्रदर्शन के कारण खास पहचान बनाई। आंदोलन से पहले भी वह शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखती रही हैं। हालांकि, जंतर-मंतर के प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक चर्चित छात्र नेता के रूप में पहचान दिलाई।
जंतर-मंतर आंदोलन में क्यों चर्चा में रहीं नेहा बोरा?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा अलग-अलग मुद्दों को लेकर जुटे थे। इसी बीच नेहा बोरा भी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहीं। उनके भाषणों में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकार और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठते रहे। आंदोलन के दौरान उनके भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और आंदोलन के दौरान छात्रों को हुई चोटों को लेकर सवाल उठाए। उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी स्पष्ट भाषा और बेबाक अंदाज ने युवाओं के एक वर्ग को प्रभावित किया।
हालांकि, आंदोलन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े विभिन्न दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में अलग हो सकती है। ऐसे में इन घटनाओं को लेकर सामने आए आरोपों और आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है।
23 दिनों की भूख हड़ताल ने खींचा ध्यान
आंदोलन के दौरान नेहा बोरा के लंबे अनशन ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। इस दौरान उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई और उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होने की खबरें सामने आईं। लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की चर्चा के बीच आंदोलन स्थल पर उनसे मिलने कई लोग पहुंचे।
अभिनेत्री शबाना आजमी की उनसे मुलाकात भी चर्चा में रही। बताया गया कि शबाना आजमी ने उनसे बातचीत की और अनशन समाप्त करने के लिए उन्हें समझाया। यह मुलाकात आंदोलन के भावुक पलों में से एक के तौर पर सामने आई।
कौन हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा का संबंध उत्तराखंड से बताया जाता है। उनके बचपन का कुछ समय पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी बीता। पढ़ाई के साथ उन्होंने थिएटर और सामाजिक गतिविधियों में रुचि दिखाई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की।
वर्तमान में नेहा बोरा के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से पीएचडी करने की जानकारी सामने आई है। छात्र राजनीति और सामाजिक मुद्दों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी रही हैं और संगठन में अध्यक्ष की भूमिका निभाने की जानकारी भी सामने आई है। AISA जेएनयू समेत देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति से जुड़ा एक सक्रिय संगठन है।
शिक्षा से लेकर सामाजिक मुद्दों तक सक्रियता
नेहा बोरा की सार्वजनिक सक्रियता केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही। वह शिक्षा के निजीकरण, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखती रही हैं। इसके अलावा मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो मामले और गाजा के मानवीय संकट जैसे विषयों पर भी उनकी सार्वजनिक टिप्पणियां सामने आई हैं।
उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता का अंदाज पारंपरिक छात्र राजनीति से कुछ अलग दिखाई देता है। वह अपने भाषणों में युवाओं की भाषा और आधुनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल करती हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी उनके भाषणों और गतिविधियों को लेकर चर्चा देखने को मिलती है।
Gen-Z छात्र राजनीति का नया चेहरा?
नेहा बोरा को उनके समर्थक नई पीढ़ी की छात्र राजनीति की प्रभावशाली आवाज के तौर पर देखते हैं। उनके व्यक्तित्व में अकादमिक पृष्ठभूमि, सामाजिक सक्रियता और सार्वजनिक मंच पर बेबाक अभिव्यक्ति का मेल दिखाई देता है। जंतर-मंतर आंदोलन ने उनकी पहचान को और व्यापक बनाया, लेकिन उनके सार्वजनिक जीवन की कहानी केवल एक आंदोलन तक सीमित नहीं है। शिक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में रही है।













