नेपाल बाढ़: 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर, सैकड़ों बच्चे अब भी लापता

नेपाल बाढ़ के बाद 9 दिन से सुरंग में फंसे 2 मजदूरों को बचाया गया। रसुवा-नुवाकोट में करीब 600 बच्चे लापता हैं, जबकि चितवन में 95 शवों की पहचान हुई।

नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद राहत अभियान जारी है। नौ दिन से सुरंग में फंसे दो मजदूरों को बचा लिया गया है। रसुवा और नुवाकोट में करीब 600 बच्चे लापता हैं, जबकि चितवन में 95 शवों की पहचान हुई है।

काठमांडू: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। बचाव टीमों ने नौ दिन तक सुरंग में फंसे दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हालांकि, आपदा के बाद कई इलाकों में अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 बच्चों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए गए हैं और अब तक 95 शवों की पहचान हो चुकी है।

नौ दिन बाद सुरंग से निकाले गए दो मजदूर

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान के दौरान राहत टीमों को बड़ी सफलता मिली। सुरंग के भीतर करीब नौ दिनों से फंसे दो मजदूरों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बचाव दल को आशंका है कि सुरंग के अंदर और लोग भी फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से सुरंग में तलाशी और बचाव अभियान जारी रखा गया है। अधिकारियों और बचावकर्मियों का ध्यान अब संभावित रूप से फंसे अन्य लोगों तक पहुंचने पर है।

यह बचाव अभियान ऐसे समय में हुआ है, जब नेपाल के कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश और शवों की बरामदगी का काम एक साथ चल रहा है।

चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान

बाढ़ प्रभावित नेपाल में शवों की बरामदगी और पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए गए हैं।

अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान करने तथा उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।

आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को अपने लापता परिजनों की जानकारी हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण प्रशासन के सामने सटीक आंकड़े जुटाना भी चुनौती बना हुआ है।

रसुवा और नुवाकोट में करीब 600 बच्चे लापता

फ्लैश फ्लड से प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 बच्चों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रसुवा में करीब 280 बच्चे लापता बताए जा रहे हैं। वहीं नुवाकोट में यह संख्या 300 से 350 के बीच बताई गई है। नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में ही करीब 250 बच्चों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन स्कूलों और स्थानीय संस्थानों से बच्चों से जुड़े आंकड़े जुटा रहा है। हालांकि, संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण लापता बच्चों की सटीक संख्या निर्धारित करना मुश्किल हो रहा है।

अधिकारियों के सामने स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि कुछ बच्चों के मिलने की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की सूचनाएं भी लगातार मिल रही हैं।

बाढ़ के बाद दोनों जिलों में 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन बच्चों और स्कूल कर्मचारियों की जानकारी जुटाकर उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।

नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका से मुआवजा नहीं मांगा

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया है कि देश ने भारत, चीन या अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग नहीं की है।

खनाल के अनुसार, नेपाल की अपील यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय रसुवा में हुई आपदा को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के संदर्भ में देखे और हिमालयी देशों की सहायता के लिए आगे आए।

उन्होंने भारत की ओर से तत्काल राहत और बचाव सहायता उपलब्ध कराने के लिए आभार जताया। नेपाल सरकार ने बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है।

नेपाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और सरकार का कहना है कि पर्वतीय इलाकों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

एनवीडिया ने नेपाल के लिए 10 मिलियन डॉलर की मदद दी

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर है और करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए बताई गई है।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को सहायता के लिए धन्यवाद दिया।

वागले के मुताबिक, इस सहायता के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपए से अधिक राशि जमा हो चुकी है। यह राशि बाढ़ और फ्लैश फ्लड से प्रभावित लोगों के राहत एवं पुनर्वास कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।

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संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठा सकते हैं PM बालेन

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से भी जाना जाता है, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर उसके प्रभाव का मुद्दा उठा सकते हैं।

रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने उनके संभावित न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

इससे पहले शाह ने महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसके बाद नेपाल की कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।

अब रसुवा की आपदा के बाद जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा नेपाल के अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में फिर प्रमुखता से सामने आया है।

भारत ने भेजी राहत की छठी और सातवीं खेप

भारत ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत एवं बचाव सहायता जारी रखी है। भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे।

दोनों C-130J विमानों के जरिए कुल 21.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई। इसमें फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण भी शामिल हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा में आई फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत की ओर से लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।

राहत अभियान के सामने कई चुनौतियां

नेपाल में जारी बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में लापता लोगों की सही संख्या निर्धारित करना, प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना और शवों की पहचान करना शामिल है। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण प्रशासन को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटानी पड़ रही है।

रसुवा और नुवाकोट में लापता बच्चों की संख्या को लेकर भी आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। कुछ बच्चों के मिलने की जानकारी सामने आ रही है, जबकि स्कूलों और स्थानीय प्रशासन से नई सूचनाएं मिल रही हैं।

दूसरी ओर, सुरंग में फंसे लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम भी जारी है।

नेपाल सरकार के सामने अब तत्काल राहत के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण की चुनौती भी है। अंतरराष्ट्रीय सहायता, भारत की राहत सामग्री और निजी क्षेत्र से मिली वित्तीय मदद इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल, बचाव एजेंसियां लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता दे रही हैं। नौ दिन बाद दो मजदूरों का जिंदा बचाया जाना राहत अभियान के लिए बड़ी सफलता है, लेकिन सैकड़ों बच्चों और अन्य लापता लोगों की तलाश अब भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।

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