निशिकांत दुबे का तीखा हमला: जनता ने गांधी परिवार का अहंकार तोड़ा, आपातकाल को बताया लोकतंत्र की हत्या

निशिकांत दुबे ने अपने बयान में कहा कि जनता ने गांधी परिवार के अहंकार को तोड़ा और आपातकाल को लोकतंत्र की हत्या बताया। जानें उनके ताजा आरोप और राजनीतिक

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 21 मार्च 2026 को आपातकाल की वर्षगांठ पर कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता ने 1977 में गांधी परिवार का अहंकार तोड़ दिया और इंदिरा गांधी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

Jharkhand News: झारखंड के गोड्डा से निशिकांत दुबे ने 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त होने की वर्षगांठ पर कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता ने 20 मार्च 1977 को गांधी परिवार के अहंकार को जमीन पर ला दिया और खुद इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर "कांग्रेस का काला अध्याय" शीर्षक से पोस्ट करते हुए आपातकाल को लोकतंत्र की हत्या बताया। उन्होंने कहा कि 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ, जिसे उन्होंने इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों का परिणाम बताया।

आपातकाल को लोकतंत्र की हत्या कहा

दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से लिखा कि आपातकाल भारत के लोकतंत्र के लिए काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ, जो इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों का परिणाम था। उनके अनुसार, इस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगी और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ीं।

दुबे ने आरोप लगाया कि सत्ता का केंद्रीकरण संविधान की मूल भावना के विपरीत था और देश को गंभीर संकट में डाल दिया। उन्होंने कहा, "जनता ने उस समय अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और गांधी परिवार के अहंकार को जमीन पर ला दिया।"

आपातकाल के दौरान लगे गंभीर आरोप

सांसद निशिकांत दुबे ने आपातकाल के दौरान हुए विभिन्न अत्याचारों का जिक्र किया। उनके अनुसार:

  • लाखों लोगों को जबरन जेल में डाला गया।
  • हजारों लोगों की पुलिस हिरासत या अत्याचार में मौत हुई।
  • लगभग 1 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई।
  • प्रेस और मीडिया की स्वतंत्रता पर पूर्ण रोक लगी।

मौलिक अधिकारों को समाप्त किया गया और 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा का कार्यकाल 6 साल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन कदमों से न्यायिक समीक्षा और संस्थागत संतुलन कमजोर हुआ। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को कानूनी प्रक्रियाओं से ऊपर रखने की कोशिश की गई, जबकि जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान मानवाधिकारों का उल्लंघन था।

कांग्रेस पर जारी निशाना

दुबे ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर लगातार हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा समस्याओं की जड़ में कांग्रेस की नीतियां हैं। उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत उन्होंने “कांग्रेस का काला अध्याय” नाम से एक श्रृंखला शुरू की है। यह श्रृंखला 17 मार्च 2026 से चल रही है और इसमें कांग्रेस के कार्यकाल से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया जा रहा है।

उनके अनुसार, इस श्रृंखला का उद्देश्य नागरिकों को कांग्रेस के अतीत की नीतियों और उनके लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि जनता को इतिहास की सच्चाई जाननी चाहिए ताकि भविष्य में लोकतंत्र की रक्षा हो सके। दुबे ने अपने पोस्ट में भारत के अधिकारिक गजट की तस्वीर साझा की, जिसमें आपातकाल के दौरान किए गए संवैधानिक संशोधनों का विवरण था। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों ने संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया।

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