Noel Tata ने लंबे समय तक लो-प्रोफाइल भूमिका निभाने के बाद Tata Trusts की कमान संभालकर समूह में अपना प्रभाव मजबूत किया है। Chandrasekaran के नेतृत्व से बाहर होने के बाद Tata Sons के अगले चेयरमैन के चयन में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
Noel Tata: Tata Group में Noel Tata का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। Tata Trusts के चेयरमैन के रूप में उनकी भूमिका उन्हें Tata Sons और पूरे समूह के governance structure में महत्वपूर्ण स्थान देती है। Mehli Mistry के हटने और N Chandrasekaran के नेतृत्व से बाहर होने के बाद Noel Tata अब अगले चेयरमैन के चयन में निर्णायक आवाज बन सकते हैं।
Trent से Tata Trusts तक Noel Tata का सफर
Noel Tata का Tata Group में प्रभाव अचानक नहीं बढ़ा है। उन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक सुर्खियों से दूर रहते हुए समूह की अलग-अलग कंपनियों में काम किया और अपनी पहचान एक शांत लेकिन प्रभावी कारोबारी के रूप में बनाई। उनकी सबसे प्रमुख भूमिका Tata Group की retail company Trent में रही, जहां Westside और Zudio जैसे ब्रांड्स के विस्तार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Ratan Tata के मुकाबले Noel Tata का सार्वजनिक प्रोफाइल हमेशा कम रहा है। इसके बावजूद बोर्डरूम में उनकी मौजूदगी और समूह की कंपनियों के संचालन को लेकर उनका दृष्टिकोण उन्हें Tata Group के महत्वपूर्ण decision-makers में शामिल करता रहा है।
Tata Sons के चेयरमैन पद को लेकर Noel Tata का नाम पहले भी चर्चा में आया था। हालांकि, Ratan Tata के बाद पहले Cyrus Mistry और फिर N Chandrasekaran को यह जिम्मेदारी मिली। Noel Tata को वास्तविक प्रभाव की स्थिति तब मिली, जब Ratan Tata के निधन के बाद उन्होंने Tata Trusts की कमान संभाली।
Tata Trusts की कमान ने बढ़ाया प्रभाव
Tata Trusts Tata Sons में लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में Trusts के चेयरमैन का Tata Group के governance और strategic decisions में काफी महत्व है। Noel Tata के सामने शुरुआत से ही Trusts के भीतर अलग-अलग विचार रखने वाले प्रभावशाली सदस्यों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रही।
Mehli Mistry के साथ मतभेद इसी दौर में सामने आए। Mistry लंबे समय से Ratan Tata के करीबी माने जाते थे और Trusts के भीतर उनका प्रभाव था। Vijay Singh की Tata Sons बोर्ड में nominee director के तौर पर reappointment को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आया।
बाद में Mehli Mistry के trustee के तौर पर दोबारा नियुक्त नहीं होने और उनके पद से हटने के बाद Trusts के भीतर Noel Tata की स्थिति और मजबूत हुई। इस घटनाक्रम को उनके नेतृत्व की पहली बड़ी organizational test के तौर पर देखा गया।
Chandrasekaran के बाद succession में Noel की भूमिका अहम
Tata Sons के नेतृत्व को लेकर Noel Tata और N Chandrasekaran के बीच मतभेद भी सामने आए। Tata Sons बोर्ड की एक बैठक में Noel Tata ने समूह की कुछ unlisted companies में हुए नुकसान को लेकर सवाल उठाए और Chandrasekaran के कार्यकाल के विस्तार को लेकर कई मुद्दे सामने रखे।
इस घटनाक्रम ने दिखाया कि Noel Tata अब केवल Trusts के औपचारिक प्रमुख नहीं हैं, बल्कि Tata Sons के governance और leadership decisions में सक्रिय भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। उन्होंने Sir Dorabji Tata Trust में अपने बेटे Neville Tata को भी बोर्ड में शामिल किया, जिससे Tata family की Trust-level presence और मजबूत हुई।
अब Chandrasekaran के नेतृत्व की दौड़ से बाहर होने के बाद Tata Sons के अगले चेयरमैन का चयन Tata Group के लिए सबसे महत्वपूर्ण succession decisions में से एक होगा। इस प्रक्रिया में Tata Trusts की हिस्सेदारी और Noel Tata की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Tata Group की स्थापना Jamsetji Tata ने 1868 में की थी। आज यह 100 से अधिक देशों में कारोबार करने वाला वैश्विक conglomerate है। Tata Sons इसकी प्रमुख investment holding और promoter company है, जबकि Tata Trusts के पास Tata Sons की लगभग 66 प्रतिशत equity हिस्सेदारी है। ऐसे में Trusts और उनके नेतृत्व की भूमिका समूह के शीर्ष स्तर के governance में बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।












