नोएडा में साइबर ठगी के एक मामले की जांच कर रही साइबर क्राइम पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी साइबर ठगों को अपने बैंक खाते और दूसरे म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे। इन खातों में ठगी से हासिल रकम मंगाई जाती थी। इसके बदले आरोपी कुल रकम का 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे। पुलिस की जांच में दोनों के बैंक खातों में साइबर ठगी से जुड़े करीब 3.40 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। दोनों आरोपियों को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार और सुमित कुमार, दोनों निवासी खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 21 वर्ष बताई गई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों नोएडा साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक मामले में वांछित चल रहे थे। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दोनों तक पहुंच बनाई। पुलिस जांच में सामने आया कि जिस गिरोह से दोनों आरोपी जुड़े थे, वह लोगों को पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करता था। इसके लिए कथित तौर पर लोन की जरूरत रखने वाले लोगों का डाटा जुटाया जाता था। इसके बाद उन्हें फोन या अन्य डिजिटल माध्यमों से संपर्क कर लोन स्वीकृत होने की जानकारी दी जाती थी। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी लोन सैंक्शन लेटर भी भेजे जाते थे।
इसके बाद ठग पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज सत्यापन या दूसरे शुल्क के नाम पर रकम जमा कराने के लिए कहते थे। जैसे ही पीड़ित बताए गए बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करता था, रकम अलग-अलग खातों के माध्यम से आगे भेज दी जाती थी। पुलिस का आरोप है कि इसी नेटवर्क में तुषार और सुमित अपने बैंक खातों की सुविधा उपलब्ध कराते थे।
पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि दोनों आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे। ठगी की रकम उनके खाते में आने के बाद वे अपना हिस्सा निकाल लेते और बाकी रकम संबंधित साइबर अपराधियों तक पहुंचा देते थे। इस तरह वे सीधे पीड़ितों से संपर्क किए बिना साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने में मदद करते थे।
पुलिस के मुताबिक, तुषार के बैंक खाते में करीब 1.20 लाख रुपये और सुमित कुमार के खाते में करीब 2.20 लाख रुपये आए थे। दोनों खातों में हुई रकम को जोड़ने पर कुल लेनदेन करीब 3.40 लाख रुपये का पाया गया। पुलिस अब इन पैसों के स्रोत और आगे भेजे गए धन की जानकारी जुटा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
जांच के दौरान इन बैंक खातों को लेकर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर भी शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से इन खातों के संबंध में दो शिकायतें दर्ज थीं। इससे पुलिस को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल एक से ज्यादा साइबर ठगी की घटनाओं में किया गया हो सकता है। अब अलग-अलग राज्यों से जुड़ी शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड को आपस में मिलाया जा रहा है।
यह पूरा मामला फर्जी लोन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से जुड़ा है। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी पहले संभावित ग्राहकों की जानकारी जुटाते हैं और फिर उन्हें कम ब्याज पर या तुरंत लोन दिलाने का भरोसा देते हैं। पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए कई बार बैंक या वित्तीय संस्था जैसे दिखने वाले दस्तावेज और संदेश भेजे जाते हैं। इसके बाद अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।
पुलिस के सामने अब इस गिरोह के मुख्य सदस्यों तक पहुंचने की चुनौती है। गिरफ्तार दोनों युवकों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उन साइबर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है, जो इन बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी युवकों ने सिर्फ अपने खाते उपलब्ध कराए थे या उन्होंने दूसरे लोगों के नाम पर भी बैंक खाते खुलवाकर उन्हें गिरोह को दिया था।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंकिंग एप, चैट, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल उपकरणों में किन लोगों से संपर्क के प्रमाण मिलते हैं। साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों की कड़ियां जोड़ना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि ठगी की रकम अक्सर एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से ट्रांसफर की जाती है। ऐसे में पुलिस डिजिटल ट्रेल के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस इस मामले में पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा गया था। अब तुषार और सुमित की गिरफ्तारी के बाद मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ गई है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
पुलिस की जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया है कि साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग खुद भी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं। अक्सर कुछ लोग आसान कमीशन या थोड़े समय में पैसे कमाने के लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं। लेकिन यदि उस खाते में साइबर अपराध से जुड़ी रकम आती है तो खाता धारक से भी पूछताछ की जा सकती है और उसकी भूमिका के आधार पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इस तरह के बैंक खातों को साइबर अपराध की भाषा में अक्सर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इनका इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को आगे भेजने या उसकी असली पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने कितने बैंक खाते उपलब्ध कराए और इन खातों से कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर ऐसे फोन कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर से सावधान रहने की जरूरत है, जिनमें कम ब्याज पर तत्काल लोन देने का दावा किया जाता है और लोन जारी करने से पहले प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क किसी निजी खाते में जमा कराने को कहा जाता है।
पुलिस ने लोगों को यह भी सलाह दी है कि किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग या अन्य वित्तीय जानकारी इस्तेमाल करने के लिए न दें। साइबर ठग अक्सर कमीशन का लालच देकर लोगों से खाते उपलब्ध कराने को कहते हैं। लेकिन ऐसा खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होने पर खाताधारक खुद जांच के दायरे में आ सकता है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो उसे तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंक खातों और लेनदेन को ट्रेस करने तथा रकम को रोकने की संभावना बढ़ती है।
फिलहाल नोएडा साइबर क्राइम पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उनके बैंक खातों में आए 3.40 लाख रुपये की रकम के अलावा दूसरे लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लोन के नाम पर कितने लोगों को निशाना बनाया गया, गिरोह ने कितनी रकम की ठगी की और गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि साइबर ठगी में केवल फोन करने या पीड़ित को झांसा देने वाले लोग ही नहीं, बल्कि ठगी की रकम को अपने खातों में लेने और आगे पहुंचाने वाले लोग भी जांच के दायरे में आते हैं। 10 प्रतिशत कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दोनों युवकों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की बाकी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।