नोएडा में बुधवार सुबह वायु प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शहर के आसमान में स्मॉग की मोटी चादर छाई रही और कई इलाकों में धुंध के कारण दृश्यता भी प्रभावित हुई। सबसे खराब स्थिति सेक्टर-62 में देखने को मिली, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 427 तक पहुंच गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। शहर का औसत एक्यूआई सुबह नौ बजे 316 दर्ज किया गया। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से सुबह घरों से निकलने वाले लोगों को सांस लेने और आंखों में जलन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सेक्टर-62 में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंचना चिंता का विषय है। नोएडा के दूसरे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सेक्टर-150 में एक्यूआई 351, सेक्टर-110 में 350, सेक्टर-39 में 317 और सेक्टर-1 में 251 दर्ज किया गया। इससे साफ है कि प्रदूषण का असर शहर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है। हालांकि अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर दर्ज आंकड़ों में अंतर हो सकता है और समय के साथ एक्यूआई में बदलाव भी होता रहता है।
दिल्ली-एनसीआर में हवा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रेप के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू की हैं। इसके तहत सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और एंटी स्मॉग गन के इस्तेमाल जैसे उपाय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के कदम भी शामिल हैं।
ग्रेप-2 की पाबंदियां लागू होने के बावजूद नोएडा में प्रदूषण से राहत नहीं मिल रही है। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी, वाहनों का धुआं और डीजल जनरेटर जैसे स्रोत प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकते हैं। स्थानीय रिपोर्टों में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों और नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में केवल पाबंदियां लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी पालन और नियमित निगरानी की भी जरूरत है।
प्रदूषण का असर आम लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। खराब हवा में लंबे समय तक रहने से खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मौसम में लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने और खुले स्थानों पर अधिक देर तक व्यायाम करने से बचना चाहिए। बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है।
नोएडा और दिल्ली के बीच आने-जाने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है। दिल्ली बॉर्डर पर वाहनों की जांच के कारण कुछ स्थानों पर यातायात का दबाव और जाम की स्थिति बनने की खबर है। सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर के आसपास वाहनों की कतारों से रोजाना सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लग सकता है। प्रदूषण के बीच यातायात व्यवस्था पर बढ़ता दबाव भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
एक्यूआई के मानकों के अनुसार 301 से 400 के बीच हवा बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी में मानी जाती है। ऐसे में सेक्टर-62 का एक्यूआई 427 पहुंचना नोएडा के लिए गंभीर चिंता का संकेत है। ग्रेप-2 के तहत उठाए जा रहे कदमों के साथ प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सख्ती और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि शहर के लोगों को जहरीली हवा से राहत मिल सके।







