Nursery Admission 2026-27: दिल्ली के स्कूलों ने अभिभावकों से नजदीकी स्कूल चुनने की अपील

नर्सरी और कक्षा-1 के एडमिशन में पास के स्कूल चुनना फायदेमंद है। इससे बच्चे लंबी यात्रा, ट्रैफिक और प्रदूषण से बचेंगे और पढ़ाई व स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।

दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी और कक्षा-1 के एडमिशन जारी हैं, जिसमें पास के स्कूल को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है। नजदीकी स्कूल चुनने से बच्चों को लंबी यात्रा, ट्रैफिक-जाम और प्रदूषण का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की दिनचर्या पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

Delhi School Admission Tips: इस साल दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी और कक्षा-1 के एडमिशन चल रहे हैं, और स्कूलों ने अभिभावकों से सलाह दी है कि घर के पास वाले स्कूल को प्राथमिकता दें। इससे बच्चे लंबी दूरी तय करने, ट्रैफिक-जाम और प्रदूषण का सामना नहीं करेंगे। स्कूलों के अनुसार नजदीकी स्कूल चुनने से बच्चों की पढ़ाई, सेहत और समय की बचत होती है। एडमिशन में घर और स्कूल की दूरी के आधार पर अंक दिए जाते हैं, जिससे पास के बच्चों को प्राथमिकता मिलती है।

पास का स्कूल चुनना जरूरी

दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी और कक्षा-1 के एडमिशन जारी हैं और स्कूलों का सुझाव है कि घर के नजदीकी स्कूल को प्राथमिकता दी जाए। पास के स्कूल में पढ़ाई करने से बच्चों को लंबी यात्रा, ट्रैफिक-जाम और प्रदूषण का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे बच्चे कम थकेंगे और उनकी दिनचर्या प्रभावित नहीं होगी।

स्कूलों का मानना है कि लंबा सफर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है। घर के पास स्कूल चुनने से समय की बचत होती है और बच्चों का ध्यान पढ़ाई और गतिविधियों पर केंद्रित रहता है। एक प्रिंसिपल के अनुसार, दिल्ली में ट्रैफिक जाम आम है, इसलिए नजदीकी स्कूल बच्चों के लिए अधिक सुविधाजनक है।

एडमिशन में दूरी का महत्व

अधिकारियों के अनुसार, स्कूल एडमिशन में घर और स्कूल की दूरी के आधार पर अंक दिए जाते हैं। 0-1 किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले बच्चों को सबसे अधिक अंक मिलते हैं, जबकि 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहने वाले बच्चों को सबसे कम अंक मिलते हैं। इसका मतलब यह है कि नजदीकी बच्चों को एडमिशन मिलने की संभावना अधिक होती है।

इस प्वाइंट-आधारित व्यवस्था से स्कूल यह सुनिश्चित करते हैं कि आसपास के बच्चों को प्राथमिकता मिले और एडमिशन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। यह नीति बच्चों की सुविधा और स्कूल की क्षमता दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

अभिभावकों की राय

अभिभावक मानते हैं कि पास का स्कूल चुनने से बच्चे कम थकेंगे और समय पर स्कूल पहुंच पाएंगे। इससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं कुछ अभिभावक सोचते हैं कि अगर पसंदीदा स्कूल दूर है तो एडमिशन में मुश्किल हो सकती है, लेकिन अधिकतर लोग नजदीकी स्कूल को सबसे सुविधाजनक विकल्प मानते हैं।

घर के पास वाले स्कूल में एडमिशन बच्चों की रोजमर्रा की दिनचर्या, स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए बेहतर विकल्प साबित होता है। यह व्यवस्था न केवल सुविधा बढ़ाती है, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से बच्चों को बचाती है।

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