रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप की चेतावनी, क्या बढ़ रहा है वर्ल्ड वॉर-3 का खतरा, आइए जानें

रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप ने चेतावनी दी कि बढ़ता संघर्ष वर्ल्ड वॉर-3 को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ते रहे तो वैश्विक संकट गहरा सकता है।

ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चेतावनी दी कि हालात ऐसे ही बिगड़े तो वर्ल्ड वॉर-3 का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने युद्ध खत्म करने की धीमी कोशिशों पर नाराजगी जताई। अमेरिका मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन रूस-यूक्रेन की जिद समाधान रोक रही है।

Russia-Ukraine War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि यह संघर्ष दुनिया को एक बड़े संकट की ओर धकेल सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे, तो यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध (World War-3) में बदल सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने 25,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर सैनिक थे, और यह स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। ट्रंप ने वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की रणनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि अब केवल शब्दों से काम नहीं चलेगा, बल्कि तत्काल कूटनीतिक कदम उठाने होंगे।

युद्ध खत्म करने की ट्रंप की कोशिश

ट्रंप ने कहा कि वे इस संघर्ष को जल्द समाप्त करवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रूस और यूक्रेन की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर वे निराश हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की जिद और बीच की धीमी बातचीत ने समाधान को और मुश्किल बना दिया है। ट्रंप के अनुसार, “मैं चाहता हूं कि हत्याएं बंद हों। पिछले महीने हजारों सैनिक मारे गए हैं। 

यह खून-खराबा खत्म होना चाहिए, लेकिन स्थिति जितनी तेजी से बदलनी चाहिए, उतनी नहीं बदल रही।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका लगातार मध्यस्थ (mediator) की भूमिका में काम कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों की आंतरिक राजनीति और फैसलों की गति समस्या को और उलझा रही है।

थर्ड वर्ल्ड वॉर की आशंका क्यों बढ़ रही

ट्रंप का कहना है कि लंबे समय तक खिंचते युद्ध, बढ़ते हथियारों का इस्तेमाल और महाशक्तियों की अप्रत्यक्ष भागीदारी दुनिया को एक बड़े global conflict (वैश्विक संघर्ष) के करीब ले जा रही है। उनके मुताबिक, “ऐसी हलचलें अक्सर बड़े युद्धों को जन्म देती हैं और यह वही स्थिति है जिससे दुनिया को बचना चाहिए।” 

उन्होंने कहा कि जब शक्तिशाली देश बातचीत के बजाय एक-दूसरे को जवाब देने की नीति अपनाते हैं, तब सामरिक तनाव तेजी से बढ़ता है। यही कारण है कि ट्रंप बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि वास्तविक खतरा अब दूर नहीं है।

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया और नीति में सख्ती

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी माना कि ट्रंप युद्धविराम (ceasefire) की धीमी प्रगति से बहुत निराश हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अब सिर्फ औपचारिक बैठकों (formal meetings) में समय नहीं गंवाना चाहते, जहां परिणाम बहुत कम निकलते हैं। लेविट के अनुसार, “प्रेसिडेंट अब खाली बातचीत (empty talks) से थक चुके हैं। 

वह सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं ताकि यह जंग खत्म हो सके।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए mediator के रूप में काफी मेहनत की है, लेकिन दोनों देशों की स्थितियों और राजनीतिक दबावों के कारण समाधान बार-बार टलता जा रहा है।

यूक्रेन के लिए अमेरिकी मदद

ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि अमेरिका, सुरक्षा समझौते (security agreement) के तहत यूक्रेन की मदद करने को तैयार है, बशर्ते कि यह कदम युद्ध समाप्ति में योगदान दे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका कोई भी ऐसा प्रस्ताव नहीं देगा जो संघर्ष को और लंबा करे। हालांकि ट्रंप ने निराशा जताई कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर तुरंत साइन नहीं किया, जिससे कीव के अधिकारियों पर काफी दबाव बढ़ गया। 

क्या है डोनबास विवाद 

स्थिति तब और उलझ गई जब जेलेंस्की ने डोनबास क्षेत्र को लेकर एक बयान दिया जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि यूक्रेन की जनता मतदान करके तय करे कि यह क्षेत्र रूस को सौंपा जाए या नहीं। क्रेमलिन की मांग है कि यूक्रेन पूर्वी क्षेत्रों से सेना पूरी तरह हटाए, जिसमें डोनेट्स्क और लुहान्स्क शामिल हैं। ये वही इलाके हैं जिन्हें रूस चार साल के हमलों में भी पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाया। इस बयान ने यूक्रेन के भीतर भी बड़ी बहस छेड़ दी है, क्योंकि बड़ी आबादी इस क्षेत्र को यूक्रेन की पहचान का हिस्सा मानती है।

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